निलम्बित कोतवाल को क्षमा करके खाकी के हीरो बन जायेंगे ‘पुष्कर’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। सरकार का मुखिया किसी से भी अनजाने मंे हुई कोई गलती को क्षमा कर आवाम के बीच एक बडी प्रसिद्धि पा लेता है क्योंकि मुखिया पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता है और एक पुलिसकर्मी से लेकर कोई भी अफसर अपने मुखिया की सुरक्षा में कभी भी जानबूझकर कोई चूक नहीं कर सकता। उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में सरकार के मुखिया की सुरक्षा को हमेशा अभेद बनाने के लिए पुलिस के दरोगा और अधिकारी आगे रहते हैं और चंद दिन पूर्व जब इगास के एक समारोह में जा रहे मुख्यमंत्री के काफिले की फ्लीट रास्ता भटकर गलत दिशा मंे चली गई तो उसके बाद इसका गुनाहगार नेहरू कालोनी के कोतवाल को ठहरा दिया गया और उसके बाद उन्हें निलम्बित कर दिया गया लेकिन जब इस मामले का सच सामने आया तो पता चला कि रात्रि में सडक में हो रखा गड्ढा कोतवाल के साथ पायलट कर रहे ड्राईवर को नहीं दिखा और गाडी गड्ढे में हिचकोले खाई तो उससे गाडी की लाईटें बंद हो गई और वहां अंधेरा होने के कारण मुख्यमंत्री की फ्लीट गलत दिशा मंे मुड गई लेकिन यह चूक एक अनहोनी ही बन गई क्योंकि वहां अंधेरा होने के कारण ड्राईवर को रास्ता ही समझ नहीं आया। निलम्बित किये गये कोतवाल के पक्ष में काफी पुलिस उससे हमदर्दी रख रही है और उनका मानना है कि निलम्बित कोतवाल एक गजब का कोतवाल है जिसे आज तक की नौकरी में एक बार भी लाईन हाजिर होने तक का दंड नहीं मिला क्योंकि वह खाकी की गरिमा को हमेशा ध्यान में रखकर अपने कर्तव्य का निर्वाहन करता रहा है ऐसे में पुलिस से लेकर आवाम का भी मानना है कि निलम्बित कोतवाल को क्षमाकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खाकी और आवाम के बीच एक रियल हीरो बन जायेंगे और यह बात भी शीशे की तरह साफ होगी कि राज्य के मुख्यमंत्री न्याय के प्रति कितने गम्भीर रहते हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य की कमान जबसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संभाली है तो हर तरफ उनको महानायक के रूप में देखा जा रहा है और यह महानायक राज्य में सबके साथ एक जैसा व्यवहार कर उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढता जा रहा है। उत्तराखण्ड छोटा राज्य है और यहां कभी भी किसी महानुभाव की सुरक्षा में तैनात फ्लीट से कोई चूक हुई हो ऐसा देखने को नहीं मिला लेकिन चंद दिन पूर्व राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फ्लीट को ले जा रहे नेहरू कालोनी कोतवाल मुकेश त्यागी विभाग की एक खटारा जिप्सी में उन्हें पायलट कर रहे थे और जैसे ही पायलट करते हुए वह दून युनिवर्सिटी के अन्दर पहुंचे तो कोतवाल की खटारा हो चुकी गाडी एक गड्ढे में हिचकोले खा गई और उसकी दोनो लाईटें बंद हो गई और वहां धना अंधेरा होने के कारण कोतवाल की गाडी मुख्यमंत्री को गलत दिशा में ले गई जिससे मुख्यमंत्री काफी नाराज हुये लेकिन पुलिस के किसी भी बडे अधिकारी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह बताने का साहस नहीं किया कि कोतवाल जिस खटारा गाडी से उन्हें पायलट कर रहा था उसकी अचानक लाईटें बंद होने के कारण यह चूक हुई? मुख्यमंत्री की फ्लीट गलत दिशा मंे गई उसके लिए मुख्यमंत्री का गुस्से में होना स्वाभाविक था लेकिन पुलिस के कुछ अफसरों का भी यह दायित्व था कि वह मुख्यमंत्री को यह सच भी बताते कि जिस गाडी से कोतवाल पायलट कर रहा था वह पायलट करने लायक शायद थी ही नहीं? निलम्बित कोतवाल पुलिस और आवाम के बीच एक बेहतर छवि बनाने वाला खाकीधारी है और आज तक मुकेश त्यागी पर भ्रष्टाचार और किसी को नाजायज तंग करने का तिनकाभर भी आरोप नहीं लगा और तो और अपनी नौकरी के दौरान वह एक बार भी लाईन हाजिर तक नहीं हुआ जिसके चलते पुलिस के काफी दरोगाओं और मुकेश त्यागी को पहचानने वाले लोगों के मन में एक पीडा दिखाई दे रही है कि उसका निलम्बन गलत हुआ है क्योंकि अगर मुकेश त्यागी ने यह चूक जानबूझकर की है तो उसकी जांच कराकर उस पर मुख्यमंत्री की सुरक्षा के साथ खिलवाड करने का मुकदमा भी दर्ज होना चाहिए? अगर यह चूक लाईटें बंद होने और अंधकार होने के कारण हुई है तो मुख्यमंत्री को बडा दिल करके निलम्बित किये गये कोतवाल को क्षमा कर देना चाहिए जिससे उनका इकबाल पुलिस और आवाम के बीच में भी और बुलंद होगा कि पुष्कर वास्तव में एक दयावान मुख्यमंत्री भी हैं?

हाकिम राजधानी में कोतवाल और थानेदारों के पास हैं खटारा गाडियां?
ऐसी खटारा गाडियों से क्यों फ्लीट कराया जाता है सीएम का काफिला!
देहरादून। नेहरू कालोनी थाना प्रभारी के पास जो सरकारी गाडी मौजूद थी और मुख्यमंत्री के काफिले को फ्लीट करते हुए उसकी दोनो लाईटें गड्ढे में हिचकोले खाने से बंद हुई तो उसका खामियाजा कोतवाली के कोतवाल को निलम्बन के रूप में भुगतना पड गया लेकिन पुलिस मुख्यालय से लेकर जनपद के पुलिस अफसरों को कब दिखाई देगा कि राजधानी में ही कुछ कोतवाल और थानेदारों के पास ऐसी ही खटारा गाडियां हैं जिनसे अगर सीएम के काफिले को फ्लीट कराया गया तो वह कहीं पर भी धोखा दे सकती हैं और उससे फिर किसी कोतवाल पर गाज गिर सकती है? ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि राज्य के मुखिया के काफिले में अगर खटारा गाडियों से फ्लीट कराई जा रही है तो इसका दोष भी तो उन अफसरों पर जरूर आना चाहिए जो इन गाडियों से सीएम के काफिले को फ्लीट कराने का आदेश देते हैं?
मुख्यमंत्री के काफिले को नेहरू कालोनी थाना प्रभारी ने फ्लीट किया और उसकी दोनो लाईटें बंद होने का दंड कोतवाल को निलम्बन के रूप में मिला लेकिन क्या पुलिस मुख्यालय ने यह जानने की कोशिश कि जिस गाडी से कोतवाल मुख्यमंत्री के काफिले को फ्लीट कर रहा था वह गाडी इस लायक थी कि वह मुख्यमंत्री के काफिले को फ्लीट कर लेती? राजधानी में कुछ कोतवाल और थाना प्रभारियों की गाडियां खटारा बताई जा रही है लेकिन इस ओर पुलिस के किसी भी अफसर का ध्यान कब जायेगा यह एक सोचनीय विषय है लेकिन जो कोतवाल व थानेदार सरकारी गाडियों से अपराधियों पर शिकंजा कसने और तत्काल मौके पर पहुंचने का दम रखते हैं अगर उनकी गाडियां खटारा होंगी तो वह क्या अपराधियों से लड पायंेगे इसका अनुमान क्या पुलिस महकमें के आला अफसरों को नहीं है? पुलिस महकमें में दबी जुबान में यह बात उठ रही है कि कुछ कोतवाल व थानेदारों की गाडियां खटारा हैं और वह कभी मुख्यमंत्री के काफिले को रात में फ्लीट करने के लिए आगे आये तो उनसे भी नेहरू कालोनी कोतवाल जैसी चूक हो सकती है? अब देखना है कि क्या राज्य को अपराधमुक्त करने का मिशन कोतवाल व थानेदार अपनी खटारा गाडियों से कभी कर पायेंगे?

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