करे कोये और भरे कोये
दयावान सीएम निलम्बित कोतवाल को देंगे क्षमादान?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की जनता का दिल जीतकर हृदय सम्राट कहलाने लगे हैं और यह भी कहा जा रहा है कि हृदय सम्राट के मन मंे हर इंसान के लिए एक दयाभाव भी है इसलिए उन्हें दयावान के रूप मंे भी एक पहचान मिलने लगी है जिसकी गूंज आये दिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कानों में भी गूंज रही है कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हमेशा हसते मुस्कराते हुए सरकार को सही दिशा में ले जा रहे हैं। वहीं दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री दून यूनिवर्सिटी इगास के समारोह में भाग लेने के लिए जा रहे थे तो सडक में एक गड्ढे ने नेहरू कालोनी कोतवाल की उस गाडी को अंधा बना दिया जो मुख्यमंत्री को फ्लीट करके कार्यक्रम स्थल पर ले जा रहे थे। गड्ढे के चलते कोतवाल की गाडी की लाईटें बंद होने और वहां अंधकार होने के कारण मुख्यमंत्री की फ्लीट गलत दिशा में चली गई और उससे राज्य के मुख्यमंत्री काफी नाराज भी हुये लेकिन सबसे बडी बात यह थी कि सडक में अगर गड्ढा न होता तो कोतवाल की गाडी की लाईट बंद न होती तो फ्लीट कार्यक्रम स्थल पर ही पहुंचती। गड्ढे और कार का गुनाह कोतवाल को निलम्बन के रूप मंे दिये जाने पर राजधानी से लेकर गढवाल के कुछ दरोगाओं को काफी दर्द दे रहा है और अब वह राज्य के मुख्यमंत्री से इंसाफ की दरकार कर रहे हैं कि वह बडा हृदय रखते हुए कोतवाल को उस गुनाह की सजा से मुक्त करा दें जो गुनाह उसने जानबूझकर नहीं किया था। मुख्यमंत्री से काफी पुलिस को उम्मीद है कि वह कोतवाल को माफ जरूर कर देंगे।
मुख्यमंत्री की सुरक्षा में चूक होना एक बडा गुनाह ही माना जाता है लेकिन अगर कोई चूक सडक में हो रखे गड्ढे और रात के अंधेरे में हो जाये तो शायद वह जानबूझकर करी गई चूक नहीं माना जाना चाहिए? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड की जनता हृदय सम्राट और दयावान के रूप में देख रही है और वह मानती है कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी इंसाफ परस्त राजनेता हैं और वह किसी के साथ भी अन्याय नहीं कर सकते इसीलिए जब दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री की फ्लीट में आगे चल रहे नेहरू कालोनी के पूर्व कोतवाल मुकेश त्यागी की सरकारी गाडी एक गड्ढे में झटका खाई तो उसकी दोनो लाईटें बंद हो गई और वहां गुप अंधेरा होने के कारण मुख्यमंत्री की फ्लीट गलत दिशा में मुड गई और उससे मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में जाने से कुछ देर भी हुई। इस चूक पर मुख्यमंत्री नाराज हुये और उसी के चलते राजधानी के पुलिस कप्तान ने आनन-फानन में नेहरू कालोनी कोतवाल मुकेश त्यागी को निलम्बित कर दिया। कोतवाल को निलम्बित किये जाने पर राजधानी व पहाड में तैनात कुछ दरोगाओं को इस निलम्बन पर काफी दर्द है क्योंकि मुकेश त्यागी को एक कर्मठ और ईमानदार माना जाता है और वह कभी भी राज्य के मुखिया की सुरक्षा में जानबूझकर चूक नहीं कर सकते थे? कुछ दरोगाओं का कहना था कि करे कोये और भरे कोये का नमूना राजधानी में कोतवाल के निलम्बन को देखकर हो गया क्योंकि मुख्यमंत्री पहले से ही सडकों को गड्ढामुक्त करने का आदेश देते आ रहे हैं और कुछ समय पूर्व उन्हांेने नैनीताल में भी सडकों में गड्ढों को लेकर अपनी नाराजगी दिखाई थी। ऐसे में अब पुलिस के काफी दरोगाओं का मानना है कि राज्य के युवा मुख्यमंत्री आवाम के बीच दयावान बन चुके हैं ऐसे में उन्हें अपना दयावान का रूप मुकेश त्यागी के प्रति भी दिखाकर उन्हें क्षमा कर देना चाहिए और काफी दरोगाओं को मुकेश त्यागी प्रकरण में राज्य के दयावान और हृदय सम्राट बन चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इंसाफ की दरकार बनी हुई है।