सीएम को याद आता है अपना बचपना
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में अब तक राज्य की जनता को कई पूर्व मुख्यमंत्री देखने को मिले जिनमें से अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने बच्चों व बुजुर्गों को कभी भी गले लगाने का साहस आगे बढकर नहीं दिखाया जिसके चलते हमेशा यह सवाल खडे होते रहे कि क्या कोई राजनेता मुख्यमंत्री बनने के बाद इतना बडा हो जाता है कि वह बच्चों व बुजुर्गों से भी दूरी बनाने में अपनी शान समझता है? उत्तराखण्ड में पिछले एक साल से राज्य के अन्दर जो दृश्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के देखने को मिलते आ रहे हैं उसे देखकर किसी को यकीन ही नहीं हो रहा कि क्या ऐसा भी मुख्यमंत्री होता है जो बच्चों के साथ बच्चा बनकर अपना बचपना उनके बीच शेयर करता है और किसी भी बुजुर्ग महिला को देखकर मुख्यमंत्री उन्हें अपनी मां कहकर जिस तरह से पुकारते हैं वह उत्तराखण्ड में मासूम बच्चों और बुजुर्ग महिलाओं को एक बडा सकून दे रहा है और मुख्यमंत्री ने जिस तरह से अपने सरकारी आवास मंे किसी भी स्कूल के बच्चों को मिलने में रूचि दिखा रखी है उसी का परिणाम है कि वह मासूम बच्चों के दिलों में भी इस कदर राज करने लगे हैं जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री को कई बार बच्चों के साथ बच्चा बनते हुए देखा गया है और उनके साथ वह अपने बचपन की यादों को साझा करते हैं शायद उसकी गूंज देश के प्रधानमंत्री के कानों में जरूर गूंजती है तभी तो नरेन्द्र मोदी पुष्कर सिंह धामी को कभी अपना सखा तो कभी अपना छोटा भाई कहने से पीछे नहीं हटे हैं। पुष्कर सिंह धामी की सौम्यता और हर समय हसमुख चेहरा अब उत्तराखण्ड को एक नई मुस्कान देता हुआ दिखाई दे रहा है और यह मुस्कान 2025 में उत्तराखण्ड का इतिहास जरूर बदल देगी ऐसी उम्मीद उत्तराखण्डवासियों से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी बनी हुई है।
उत्तराखण्ड में भी गजब की सत्ता देखने को मिलती रही है। हैरानी वाली बात है कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सत्ता चलाने के लिए हिटलरशाही और अहंकार का रास्ता अपनाया था और अपनी हिटलरशाही से सरकार के गलत कार्यों को उजागर करने वालों का दमन करने के लिए उन्होंने जो हथकंडे अपनाये उसी का परिणाम रहा कि राज्य के अन्दर अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री आवाम का दिल जीतने में फिसड्डी ही साबित हुये? सबसे हैरानी वाली बात है कि जिस युवा नेता पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी उन्हें कभी भी मंत्री पद तक नहीं दिया गया लेकिन जब उन्हें मुख्यमंत्री पद की कमान मिली तो उन्होंने अपनी स्वच्छ और पारदर्शी नीति से उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए जब अपने कदम आगे बढाने शुरू किये तो उससे राज्य की जनता उन्हें अपना महानायक मानने लगी और उनकी प्रसिद्धि उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली में भाजपा के बडे-बडे नेताओं के बीच जिस तरह से बढती जा रही है वह उत्तराखण्ड के एक शुभ संकेत ही माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक साल के कार्यकाल में जिस तरह से बच्चों के साथ बच्चा बनकर उनके साथ अपने बचपने को साझा किया और बुजुर्ग महिलाओं को उन्हांेने अपने सीने से लेकर उन्हे मां का दर्जा देकर गले से लगाया वह राज्यवासियों के मन में एक संदेश देता आ रहा है कि जो मुख्यमंत्री अपने आपको बच्चों व बुजुर्ग महिलाओं के बीच जाकर उन्हंे अपना बना रहा है और उन्हें अपनेपन का अहसास कराता है वह मुख्यमंत्री भले ही कुछ सफेदपोशों की नजरों मंे न भा रहे हों लेकिन राज्य की जनता को तो मुख्यमंत्री का सौम्य रूप उन्हें हृदय सम्राट से जरूर नवाज रहा है। देखने में आया कि पहाड के बडकोट से एक स्कूल का जत्था राजधानी में टूर पर आया हुआ था और उनके अध्यापक ने मुख्यमंत्री आवास में जब बच्चों की दिली इच्छा के बारे में बताया कि बच्चे मुख्यमंत्री आवास देखना चाहते हैं और मुख्यमंत्री से भी मिलने की उनकी आपार इच्छा है तो मुख्यमंत्री आवास ने बच्चों की इस इच्छा का सम्मान किया और लगभग पचास बच्चे उनकी अध्यापिकायें जब मुख्यमंत्री आवास पहुंची तो उनका वहां जो सत्कार एक समारोह में आने वाले अतिथियों की तरह किया गया उसे देखकर अध्यापिकायें और बच्चों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री खुद पन्द्रह मिनट तक बच्चों के बीच बच्चा बनकर बैठे और उनके साथ उन्होंने अपना बचपना भी साझा किया और उनके उज्जवल भविष्य को लेकर जब उन्हें आशीर्वाद दिया तो उसे देखकर वहां मौजूद अध्यापिकायें मुख्यमंत्री आवास के बाहर यह कहती हुई सुनाई दी कि काश ऐसा मुख्यमंत्री उन्हें एक लम्बे युग तक मिल जाये तो इस उत्तराखण्ड को स्वीजरलैंड बनाने से कोई नहीं रोक पायेगा।