दावों के ढोल की खुल गई ‘पोल’
कमजोर पैरवी और सलाखों से बाहर आते गुनाहगार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में यूकेएसएसएससी के द्वारा स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा पेपर लीक कांड में हुई भर्ती की जांच सरकार के धाकड धामी ने एसटीएफ के हवाले की थी और ऐलान किया था कि घोटालेबाजों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी। मुखिया के रूख को देखते हुए एसटीएफ ने इस घोटाले में एक के बाद एक काफी गिरफ्तारियां की और दम भरा कि वह गुनाहगारों के खिलाफ बडा एक्शन लेंगे लेकिन जिस तरह से घोटाले में शामिल सबसे बडे मास्टर माईंड हाकम सिंह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर बडे-बडे दिग्गजों के साथ वायरल हुई उसके बाद से इस मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने को लेकर सोशल मीडिया पर एक बडी बहस चली थी लेकिन सरकार ने दावा किया था कि अगर उन्हें मामले में सीबीआई जांच कराने की जरूरत दिखाई दी तो वह सीबीआई जांच कराये जाने से भी पीछे नहीं हटेगी। इस भर्ती घोटाले में राज्य की एसटीएफ को उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में ऐसे हीरो बनाया गया मानो उसने भर्ती घोटाले में गुनाहगार नहीं बल्कि कितने बडे दहशतगर्दों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया हो? पुलिस महकमें के कुछ अफसर दावा कर रहे थे कि यह मामला उनके लिए बडा है और इसमें पुख्ता सबूतों के आधार पर गुनाहगारों को सजा दिलाई जायेगी लेकिन मात्र कुछ समय के भीतर जिस तरह से भर्ती घोटाले में एक के बाद एक लगभग उन्नीस गुनाहगार सलाखों से बाहर आ चुके हैं उससे राज्य के अन्दर एक बहस छिड गई है कि एसटीएफ की कमजोर पैरवी के चलते ही गुनाहगार सलाखों से बाहर आ रहे हैं? सोशल मीडिया पर अब एक बार फिर भर्ती घोटाले में एसटीएफ को निशाने पर लिया जा रहा है जिससे उसकी जमकर फजीहत हो रही है और उसके ढोल का पोल सबके सामने खुलता हुआ नजर आ रहा है?
उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लेने वाले राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास जब 2021 में यूकेएसएसएससी के द्वारा कराई गई भर्ती में घोटाले की शिकायत आई तो उन्होंने आनन-फानन में इस मामले की जांच एसटीएफ के हवाले कर दी थी और दावा किया था कि घोटाले में चाहे कितने बडे भी गुनाहगार क्यों न हों उन्हें बक्शा नहीं जायेगा और उन पर सख्त से सख्त एक्शन लिया जायेगा। मुख्यमंत्री के इस आदेश से राज्यवासियों को एक आशा की किरण दिखाई दी थी कि नौकरी के सौदागरों पर एक बडा शिकंजा कसा जायेगा। हालांकि जब एसटीएफ ने हाकम सिंह को पकडने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी तो उसके बाद से ही आशंकाओं का दौर शुरू हो गया था कि क्या इस घोटाले में शामिल हर वो गुनाहगार बेनकाब हो पायेगा जिसने नौकरियांे के सौदागर हाकम सिंह का पर्दे के पीछे से साथ दिया था? उत्तराखण्ड के अन्दर इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर खूब शोर मचा था क्योंकि यह मामला सीधे राज्य के युवाओं के भविष्य से जुडा हुआ था। एसटीएफ ने जिस तेजी के साथ इस धोटाले में गिरफ्तारियों का दौर शुरू किया था उससे यह आभास हुआ था कि एसटीएफ सभी गुनाहगारों के खिलाफ इतने पुख्ता सबूत एकत्र करेगी कि उनका जल्द जेल से बाहर आना मुश्किल हो जायेगा? एसटीएफ सरकार की आंखों में हीरो बनी लेकिन जैसे-जैसे एक के बाद एक लगभग उन्नीस गुनाहगार कुछ समय के भीतर ही जेल के बाहर आ गये उससे अब सोशल मीडिया पर एसटीएफ की फजीहत हो रही है और उनका कहना है कि उन्हें पहले से ही शंका थी कि एसटीएफ सिर्फ गिरफ्तारियों तक ही सिमट कर रह जायेगी और गुनाहगारों के खिलाफ पुख्ता सबूतों का वह जखीरा अदालत में पेश ही नहीं कर पायेगी?
भर्ती घोटालों की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जॉच होःउविपा
कोटद्वार। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ने भर्ती घोटालों के आरोपियों को लगातार जमानत पर जमानत मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा पुरस्कृत किए गए एसटीएफ के कप्तान की योग्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और इस मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराने की मांग उठाई है।
उत्तराखण्ड विकास पार्टी के अध्यक्ष मुजीब नैथानी ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही भर्ती घोटालों में हाई प्रोफाइल लोगों के शामिल होने के कारण इस मामले की जॉच उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से कराए जाने की बात कही थी। मगर भाजपा के ही कुछ नेता इस मामले में हाई प्रोफाइल दागदार हैं इसलिए उन्हें बचाने के लिए सरकार ने एसटीएफ को यह जॉच सौंपी। एसटीएफ ने भी इस मामले में हाकम सिंह की गिरफ्तारी में जितनी ढिलाई बरती वो तारीफे काबिल रही। हाकम सिंह के साथ कुछ हाई प्रोफाइल लोगों की तस्वीरों ने इस बात को बल दे दिया था कि इस मामले में एसटीएफ चंद लोगों को खोज बीन कर मामला निपटा हुआ बता देगी और अब तथाकथित आरोपियों को प्रथम दृष्टया साक्ष्य संकलन न होने के कारण जो जमानत मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे एसटीएफ और आरोपियों की आपसी सांठ गांठ उजागर होती है।
मुजीब नैथानी ने कहा कि चंदन मनराल जैसे धनी मानी व्यक्ति से पुलिस ने भर्ती घोटाले में लिए गए पैसों के संबंध में कोई साक्ष्य संकलन नहीं किया, यह बताता है कि एसटीएफ की हदें क्या है। मुजीब नैथानी ने कहा कि असली गेम तो खुद भाजपा के अंदर खेला जा रहा है और कांग्रेस नहीं चाहती कि असलियत बाहर आए। हरिद्वार कोतवाली में रात गुजारने वालों ने भर्ती घोटालों को उजागर करने के लिए कितने धरने प्रदर्शन किए पूरे प्रदेश को पता है। उन्होंने कहा कि इन जमानतों से हमारे आरोपों को बल मिला है कि यह केस सॉल्व करके असली आरोपियों को गिरफ्तार करना एसटीएफ के बस की नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष के द्वारा लगाए गए आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से एसटीएफ ने आजतक पूछताछ नहीं की यह शर्म का विषय है।
उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों के संबंध में प्रथम दृष्टया ही कई प्रश्न अनुत्तरित हैं ऐसे में इनकी वृहद जॉच होनी जरूरी है साथ ही यह भी जरूरी है कि जॉचकर्ता किसी भी आईएएस, आईपीएस और मंत्रियों से भी इस संबंध में पूछताछ करने की हैसियत रख सके। इसीलिए इन समस्त भर्ती घोटालों की जॉच उच्च न्यायालय नैनीताल की निगरानी में सीबीआई से करवाई जानी चाहिए।
कमजोर पैरवी से मिल रही जमानत
यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 18 आरोपियों की जमानत होने पर गंगोत्री क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विजय पाल सजवाण ने सरकार पर कमजोर पैरवी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में सरकार ने लोक दिखाओ के तहत गिरफ्तारियां की और कमजोर पैरवी का ही हश्र है कि जमानतें हो रही हैं।