प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि जब किसी युवती के साथ हैवानियत हुई तो राज्य के मुख्यमंत्री ने खुद आगे आकर गुनाहगारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए संकल्प लिया हो। अंकिता हत्याकांड के बाद से मुख्यमंत्री खुद मामले की जांच पर नजर रखे हुये हैं और वह अंकिता के परिवार के पास जाकर उन्हें भरोसा दिलाने भी पहुंचे कि सरकार उनके साथ खडी है और जिस-जिस ने अंकिता के साथ गुनाह किया है उसे सरकार सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोडेगी। एसआईटी ने इस मामले में जिस गम्भीरता के साथ जांच पडताल को आगे बढा रखा है उससे यह दिखाई दे रहा है कि इस गुनाह में शामिल हर गुनाहगार बेपर्दा होगा। हालांकि कुछ लोग अंकिता हत्याकांड को हथियार बनाकर जिस तरह से राज्य के सीएम को अस्थिर करने के लिए उनके खिलाफ एक बडी साजिश के तहत खेल खेलने में जुटे हुये हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि कुछ ताकतें ऐसी हैं जो अंकिता हत्याकांड की आड में मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रचे हुये हैं? ऐसे चक्रव्यूह से उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया कैसे बाहर निकल पायेंगे यह एक सोचनीय विषय बना हुआ है? हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री राज्यवासियों से लेकर अंकिता के परिवार वालों को वचन दे रहे हैं कि इस गुनाह में कोई भी गुनाहगार बच नहीं पायेगा लेकिन इसके बावजूद भी इस मामले को लेकर कुछ ताकतें क्यों राज्य के अन्दर शोर मचा रही हैं यह सरकार के लिए चिंता व मनन करने जैसा है?
उत्तराखण्ड में पिछले कुछ समय से राज्य का सिनेरो देखा जाये तो उसे देखकर साफ झलक रहा है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कुछ ताकतें किस तरह से एक बडी साजिश के तहत उन्हें अस्थिर करने के मिशन में लगी हुई है? हैरानी वाली बात है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने यूकेएसएसएससी से हुई भर्तियों में गडबडी की जांच का जिम्मा एसटीएफ को सौंपा और एसटीएफ ने इस मामले में भाजपा जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत से लेकर काफी बडे-बडे गुनाहगारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया और तो और मुख्यमंत्री के सामने जब 2015 में हुये दरोगा भर्ती मामले में भ्रष्टाचार की बू आई तो उन्होंने इस मामले की जांच राज्य की विजिलेंस को सौंप दी जिससे यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ किस तरह से सख्त रूख अपनाकर भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों को एक-एक कर बेनकाब कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी की इस दिलेरी से भ्रष्टाचार से हुई भर्तियों का राज भले ही बेनकाब हो रहा हो और युवा पीढी को एक सकून मिल रहा हो कि उनके सपनों पर ग्रहण लगाने वाले जिस तरह से एक के बाद एक बेनकाब हो रहे हैं उसके चलते आने वाले समय में भर्तियों के अन्दर कोई भ्रष्टाचार नहीं हो पायेगा। मुख्यमंत्री के इस धाकड फैसले पर भी कुछ ताकतें उंगली उठाने में लगी हुई हैं और वह मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने के लिए सोशल मीडिया पर खुलकर आग उगल रहे हैं? गजब की बात तो यह है कि इन ताकतों में चंद लोग ऐसे हैं जिनका न तो सरकारी नौकरी में भर्ती होने को लेकर कोई लेना-देना है और न ही उनका मीडिया से कोई लेना-देना है इसके बावजूद एक एजेंडे के तहत मुख्यमंत्री पर निशाना साधकर उन्हें अस्थिर करने का जो चक्रव्यूह रचा जा रहा है उस चक्रव्यूह को रचने वाले कौन-कौन खिलाडी पर्दे के पीछे से हैं इसका पता भी सम्भवतः खुफिया तंत्र नहीं लगा पा रहा है? अब अंकिता हत्याकांड को लेकर राज्य के कुछ जनपदों में खूब शोर मचाया जा रहा है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अंकिता हत्याकांड को लेकर काफी गंभीर और चिंतित नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिस तरह से हत्याकंाड की जांच पर खुद पैनी निगाह बनाई हुई है और वह लगातार एसआईटी प्रभारी द्वारा की जा रही जांच की मॉनिटिरिंग कर रहे हैं उससे किसी को भी इस बात पर शंका नहीं होनी चाहिए कि गुनाहगारों को बचाने का सरकार की ओर से कोई खेल चल रहा है? मुख्यमंत्री इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का वायदा कर चुके हैं और दो दिन पूर्व वह अंकिता के परिवार वालों से मिलने उनके घर पर पहुंचे और उन्हें दिलासा दिलाया कि सरकार उनके साथ खडी है और इस हत्याकांड में एक भी गुनाहगार नहीं बचेगा लेकिन उसके बावजूद भी कुछ ताकतें मुख्यमंत्री को निशाने पर लेने का खेल किसके इशारे पर खेल रही हैं इसमें एक बडी साजिश की बू नजर आ रही है? सवाल खडे हो रहे हैं कि हत्याकांड की सुनवाई तो अदालत में ही चलनी है और सुनवाई के बाद ही गुनाहगारों के गुनाह की उन्हें सजा मिलेगी लेकिन यह शोर भी मचाया जा रहा है कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलता तब तक मुख्यमंत्री आवास पर धरना दिया जाये? अब सवाल यह है कि अगर मुख्यमंत्री आवास पर धरना देने से अदालत किसी गुनाहगार को आनन-फानन में सजा नहीं दे सकती इसलिए सरकार पर भरोसा तो करना ही पडेगा क्योंकि सरकार के मुखिया खुद अंकिता को न्याय दिलाना चाहते हैं।