नई भाजपा में बगावतियों पर चलता है डंडा!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का जबसे जन्म हुआ है तबसे भाजपा के शासनकाल में कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कुछ मंत्रियों ने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक बगावत का हथियार अपनाया तो पूर्व भाजपा हाईकमान ऐसी बगावतों को देखकर विचलित होता रहा और यही कारण था कि राज्य में कई बार पूर्व मुख्यमंत्रियों को गद्दी से हटाया गया हालांकि कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली हिटलरशाही और आरोपों से भरपूर होने के कारण उन्हें पद से हटाया गया लेकिन अब देश के अन्दर नई भाजपा का उदय हो रखा है और नई भाजपा में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह अपनी पार्टी के सभी मुख्यमंत्रियों की कार्यशैली पर पैनी निगाह रखते हैं और जब तक उन्हें इस बात का शत-प्रतिशत आभास नहीं होता कि उनका कोई मुख्यमंत्री राज्य की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा है तब उसके खिलाफ वह कोई बडा निर्णय लेने के लिए आगे आते हैं इतना ही नहीं उनके कार्यकाल में किसी भी मंत्री या विधायक में अपने मुख्यमंत्री को लेकर वो हौसला नहीं पनपता जिससे वह बगावत का झंडा उठा सकें क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म रहता है कि नई भाजपा में बगावतियों से मंथन नहीं बल्कि उन पर अनुशासन का डंडा चलाया जाता है? उत्तराखण्ड के अन्दर जिस तरह से मुख्यमंत्री पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं और पीएमओ राज्य के विकास पर अपनी पैनी निगाह बनाये हुये है उससे साफ नजर आ रहा है कि मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड में एक लम्बे युग तक अभेद होकर सत्ता चलायेंगे।
उत्तराखण्ड के अन्दर पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिन्हें भाजपा हाईकमान ने बडे से बडे फैसले लेने के लिए फ्रीहैंड कर रखा है। यही कारण है कि राज्य में अगर मुख्यमंत्री को कोई बडा फैसला लेना होता है तो वह दिल्ली नहीं जाते बल्कि उत्तराखण्ड की राजधानी में बैठकर ही फैसले पर अपनी अंतिम मोहर लगा देते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पुष्कर सिंह धामी पर अटूट विश्वास है इसलिए उन्होंने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में हो रहे निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा करने का टास्क मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को सौंप रखा है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी टीम लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्टों को पारदर्शिता के साथ पूरा कराने के मिशन में आगे बढ रही हैं। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री के खिलाफ भले ही बगावत करने का कोई साहस न करता हो लेकिन उनके विकास की राह में उन्हें परेशान करने का खेल जरूर खेला जा रहा है जिसकी गूंज सम्भवत: भाजपा हाईकमान को लग चुकी है?

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