प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में बाइस सालों से राज्य आंदोलनकारी और राज्यवासी सिर्फ एक सपना देख रहे थे कि जिस उद्देश्य से उत्तराखण्ड का जन्म हुआ था वह धरातल पर आखिर कब साकार दिखाई देगा। उत्तराखण्ड के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सत्ता चलाने के लिए हिटलरशाही का पैमाना बनाया और सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने का कुचक्र रचा गया जिससे राज्य की अधिकांश जनता के मन में एक ही अफसोस रहता था कि वह ऐसे राज्य में रह रहे हैं जहां लोकतंत्र नाम की कोई चीज ही नहीं है? देश-विदेश में अपने नाम का डंका बजा रहे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड के एक ऐसे युवा को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया जिसे भाजपा शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्रियों ने मंत्री तक नहीं बनाया था लेकिन जैेसे ही मोदी और अमित शाह की विश्व प्रसिद्ध जोडी ने पुष्कर ंिसह धामी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया और छह माह के भीतर उन्हें एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार लाने का कांटो भरा ताज वाला पहनाया तो उस कांटे भरे ताज को पुष्कर सिंह धामी ने फूल बना दिया और उसके बाद उन्होंने अपनी कुशल राजनीति से बाइस सालों से चले आ रहे सत्ता वापसी के मिथक को चूर-चूर कर दिया और राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार बना दी। मोदी, अमित शाह की पहली पसंद बने पुष्कर ंिसह धामी ने अपने दूसरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में मात्र छह माह के भीतर जिस तरह से धाकड राजनैतिक पारी में मैन ऑफ द मैच का खिताब आवाम की पिच पर हासिल किया है उससे राज्य की जनता साफ बोल रही है कि मोदी शाह की पसंद पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के पहले ‘सुपर सीएमÓ बन गये हैं जो उत्तराखण्ड को एक नई दिशा में ले जाकर आवाम के सपनों का उत्तराखण्ड बना रहे हैं।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जब उत्तराखण्ड की सत्ता युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सौंपी थी तो भाजपा के बडे-बडे राजनैतिक धुरंदर चारो खाने चित हो गये थे और राज्य के अन्दर यह ढोल पीटा जा रहा था कि पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं संभाल पायेंगे और उन्हें चुनौती दी जा रही थी कि वह छह माह में भाजपा की सरकार में सत्ता वापसी नहीं करा पायेंगे। भाजपा के साथ कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेताओं ने भी पुष्कर सिंह धामी को कमजोर मुख्यमंत्री मानकर सपना संजो लिया था कि 2०22 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आयेगी और वहां मुख्यमंत्री पद को लेकर कुछ राजनेताओं में भीतर खाने युद्ध भी शुरू हो गया था लेकिन जब चुनाव परिणाम सामने आये तो मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने उन्हें कमजोर समझने वाले राजनेताओं को अपनी कुशल राजनीति से दिन में ही तारे दिखा दिये थे। मात्र छह माह के भीतर भाजपा को सत्ता में वापस लाने वाले पुष्कर सिंह धामी का वजूद दिल्ली में बैठे भाजपा नेताओं के आगे काफी पावरफुल बन गया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो पुष्कर सिंह धामी की उत्तराखण्ड के विकास को लेकर दिखाई दी सोच के चलते उन्हें अपना सखा मान लिया और यही कारण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के बताये रास्ते पर चलते हुए उत्तराखण्ड को विकास की ऊचाईयों पर ले जाने के मिशन में दिन-रात आगे बढते जा रहे हैं। सबसे अह्म बात यह है कि पुष्कर सिंह धामी की अब तक राजनैतिक पारी आज तक के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों की अपेक्षा धाकड दिखाई दे रही है। सबसे अह्म बात यह है कि पुष्कर सिंह धामी बडे से बडे फैसले लेने में तिनकाभर भी देर नहीं करते इनमें चाहे उत्तराखण्ड में हुई भर्तियों की जांच का मामला हो या फिर बैकडोर से विधानसभा में हुई भर्तियों का प्रकरण हो उन्होंने आनन-फानन में सबकी जांच कराने के लिए जिस तरह से एक बडे राजनेता की तर्ज पर अपने कदम आगे बढाये उससे राज्य की जनता उनकी कायल हो चुकी है। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला जब उत्तराखण्ड की एक बेटी के साथ कुछ दरिंदों ने गुनाह किया तो उसके बाद मुख्यमंत्री ने रातो-रात गुनाहगार का रिजॉट बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया और मामले की जांच एसआईटी के हवाले कर उसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड की बेटी के साथ हुये अपराध के बाद उनके परिजनो को आर्थिक सहायता के रूप में मुख्यमंत्री कोष से 25 लाख रूपये की सहायता देने का ऐलान किया। मात्र छह माह के भीतर पुष्कर ंिसह धामी उत्तराखण्ड की जनता की नजरों में सुपर सीएम बन गये हैं लेकिन उनके इस रूप से भाजपा के कुछ नेताओं का बीपी बढा हुआ है?