मंत्रिमण्डल मंे फेरबदल को दिल्ली में ‘महामंथन’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड पर नजर रखने के लिए देश के प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्डवासियों को वचन दे रखा है और यही कारण है कि वह उत्तराखण्ड के चारो धामों को विश्व में बडी पहचान दिलाने के लिए वहां का नये सिरे से विकास करा रहे हैं जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को सौंप रखी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य के अन्दर पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं और राज्यवासी उन्हें उत्तराखण्ड का महानायक मान रहे हैं लेकिन उनके मंत्रिमण्डल में कुछ मंत्रियों पर जिस तरह से एक के बाद एक दाग लग रहे हैं उससे इन मंत्रियों को हटाये जाने की काफी समय से मांग भी तेज होती जा रही है। हैरानी वाली बात है कि कुछ मंत्रियों पर भले ही भ्रष्टाचार को लेकर दाग लग रहे हों लेकिन वह राज्य की जनता के सामने अपने आपको उत्तराखण्ड का भाग्य विधाता मानकर सत्ता चला रहे हैं? पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों को लेकर जब राज्य में भूचाल मचा तो मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष को सभी भर्तियों की जांच कराने के लिए पत्र लिखा और उसके बाद जांच हुई और बीस दिन में ही परिणाम सामने आ गया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार से नियुक्तियां हुई थी जिन्हें निरस्त कर दिया गया। अब राज्य में यह बहस छिड गई है कि जब कैबिनेट मंत्री व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल भ्रष्टाचार से भर्तियां हुई थी तो फिर प्रेमचंद अग्रवाल को पुष्कर सरकार के मंत्रिमण्डल से बाहर क्यों नहीं निकाला जा रहा? अब भाजपा हाईकमान ने दिल्ली में मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को बुलाया और चर्चा है कि उत्तराखण्ड में मंत्रिमण्डल में फेरबदल को लेकर एक बडा महामंथन चल रहा है और इस नये मंत्रिमण्डल को लेकर 24 से 48 घंटे के बीच कोई बडा ऐलान भाजपा हाईकमान द्वारा हो सकता है जिसको देखते हुए उत्तराखण्ड में चारो ओर सिर्फ एक ही शोर सुनने को मिल रहा है कि भाजपा हाईकमान सरकार में शामिल किन-किन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखायेंगे और किन पर भरोसा कर उन्हें पुष्कर सरकार में मंत्री के रूप में ताजपोशी करेंगे।
उल्लेखनीय है कि बीते रोज प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट और विधानसभा अध्यक्ष रितु खण्डूरी दिल्ली में हैं। चर्चा है कि भाजपा हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच उत्तराखण्ड में नये मंत्रिमण्डल को लेकर एक बडा महामंथन चल रहा है और उत्तराखण्ड में चल रहे घटनाक्रमों का भी भाजपा हाईकमान मुख्यमंत्री से सम्भवत: फीडबैक ले रहा है। भाजपा के दिग्गज नेता उत्तराखण्ड में अब किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार और घोटाले का शोर और सुनना नहीं चाहते क्योंकि भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों से राज्य की जनता में बेहद नाराजगी थी और उसी नाराजगी से भाजपा के दिग्गज नेता काफी आहत हुये थे। भाजपा हाईकमान ने राज्य की कमान युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी को सौंप रखी है जो शालीनता के साथ सरकार चला रहे हैं और उनके अब तक के कार्यकाल में न तो विपक्ष और न ही मीडिया उन पर कोई उंगली उठा पाई है क्योंकि पुष्कर सिंह धामी स्वच्छता के साथ सरकार चलाने में विश्वास रखे हुये हैं और उनका मानना है कि उनके कार्यकाल में अगर कोई भी भ्रष्टाचार या घोटाला करने का साहस दिखायेगा तो उसे किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। यह भी चर्चाएं हैं कि उत्तराखण्ड में बिछी राजनैतिक शतरंगी बिसात अब दिल्ली में चल रहे मंथन और मुख्य की रिपोर्ट के बाद कुछ वजीर और प्यादो को सियासी बिसात पर शह और फिर मात देने का सारा प्लान तैयार हो चुका है? उत्तराखण्ड में साफ सुथरी सरकार चला रहे मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को उनके ही कुछ मंत्री कटघरे में खडा करने मे ंलगे हुये हैं क्योंकि वह जिस तरह से कुछ खेल खेलकर आवाम के निशाने पर आये हैं उससे पुष्कर सिंह धामी के माथे पर भी चिंता की लकीरें पडी हैं क्योंकि वह राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त करने का वचन जनता को दे चुके हैं और यही कारण है कि उन्होंने दिल्ली में भाजपा हाईकमान को उत्तराखण्ड के मौजूदा परिपेक्ष में अपनी सारी रिपोर्ट सौंप दी है जिसके बाद से उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक में हलचल मची हुई है कि 24 से 48 घंटे के बीच पुष्कर सरकार के मंत्रिमण्डल में एक बडा बदलाव देखने को मिल सकता है जिसके चलते राज्यवासियों की नजरें भाजपा हाईकमान पर टिकी हुई है।

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