कुंठित मानसिक रोगियों को चुभ रहा पुष्कर का रौद्र अवतार

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में बाइस सालों बाद राज्य को एक ऐसा दिलेर मुख्यमंत्री मिला है जो आवाम के लिए तो फ्लावर है लेकिन अपराधियों, भ्रष्टाचारियों, घोटालेबाजों और दुराचारियों के लिए काल बने हुये हैं और जिस तरह से उन्होंने अंकिता हत्याकांड के बाद हत्यारे के पिता और भाई को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यानाथ की हत्यारे के रिजॉट पर देर रात ही बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त करा दिया और इस पूरे जघन्य अपराध का सारा सच राज्य की जनता के सामने लाने के लिए उन्होंने एसआईटी को जांच सौंपी तो उससे राज्य में कुंठित मानसिक रोगियों को पुष्कर का रौद्र रूप ऐसे चुभ रहा है मानो मुख्यमंत्री किसी कमजोर इंसान पर कोई जुल्म ढा रहे हों? पुष्कर सिंह धामी भले ही शांत स्वभाव वाले राजनेता हैं लेकिन जैसे ही उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता के साथ जघन्य अपराध हुआ तो वह शांत स्वभाव से आगे निकलकर रौद्र अवतार में आवाम के सामने आ गये और उन्होंने जिस तरह से धाकड फैसला लेते हुए इस जघन्य अपराध की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द से जल्द कराने के लिए अपने कदम आगे बढाये हैं उससे उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री बनने का सपना देखने वाले कुछ राजनेताओं को पुष्कर सिंह धामी का यह रौद्र रूप काफी चुभ रहा है क्योंकि ऐसे दिलेरी वाले फैसलों से मुख्यमंत्री उत्तराखण्डवासियों की नजर में नायक की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि बाइस सालों में बडे-बडे जघन्य अपराध गठित हुये और काफी मातृशक्ति का भी अपमान हुआ तथा अंकिता जैसे घटनाक्रम पूर्व में भी होते रहे लेकिन किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐसा हौसला और दिलेरी नहीं दिखाई कि वह अपराध करने वाले हैवान पर इतनी बडी कार्यवाही कर सकें कि वह उत्तराखण्ड में एक नजीर बन जाये? उत्तराखण्ड में बाइस सालों से कई पूर्व मुख्यमंत्री अपने आपको बेहतर राजनेता कहलवाने के लिए मीडिया का सहारा लेते रहे लेकिन उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा पुष्कर सिंह धामी को जबसे राज्य की कमान मिली है तबसे उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के पदचिन्हों पर चलने के लिए अपने कदम आगे बढा रखे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक ऐसे राजनेता के रूप में उभरकर सामने आये हैं जिनके लिए देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी बार-बार मंच से यह ऐलान करते रहे हैं कि पुष्कर सिंह धामी फ्लावर भी है और फायर भी। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी शांत स्वभाव वाले राजनेता हैं और अब तक के उनके कार्यकाल में कभी भी यह देखने को नहीं मिला कि उन्होंने द्वेष भावना के साथ किसी पर प्रहार किया हो। हालांकि विपक्ष से लेकर भाजपा के कुछ नेता और मीडिया के कुछ लोग एक रणनीति के तहत पुष्कर सिंह धामी को समय-समय पर निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रचते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री ने कभी भी ऐसे साजिशकर्ताओं पर पलटवार करने की नियत कोई एक्शन नहीं लिया जिससे यह साफ हो गया कि राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री में सोच को लेकर कितना बडा अंतर है कि यह मुख्यमंत्री अपने खिलाफ होने वाली साजिशों पर भी खामोश रहते हैं और राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्री ऐसे थे जो अपने कार्यकाल में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटाले की जरा सी गूंज मीडिया में सुनकर उनके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए आगे आ जाते थे और उन्हें अपनी सत्ता का खुलकर घमंड दिखाते थे। विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों को लेकर जिस तरह से राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक दिलेरी के साथ आगे आकर जिस तरह से बाइस सालों से विधानसभा में होती आई सभी भर्तियों की जांच कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था कि अगर युवा पीढी के साथ अन्याय हुआ है तो उन्हें न्याय मिल सके। पुष्कर सिंह धामी के इस पत्र का ही परिणाम निकला कि 258 भर्तियां गलत ढंग से हुई पाई गई जिसे निरस्त कर दिया गया। पुष्कर सिंह धामी का यह दिलेरी भरा पत्र आज उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री को महानायक बना गया। वहीं अंकिता हत्याकांड में जिस तरह से खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आगे आये और गुनाहगार दरिंदे के रिजॉट पर रात में ही बुलडोजर चलाकर उसे जमीदोज करने का साहस दिखाया उससे कुंठित मानसिक रोगियों को पुष्कर ंिसह धामी का रौद्र रूप चुभ रहा है क्योंकि राज्यवासियों को साफ दिखाई दे रहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री किसी भी जघन्य अपराध को लेकर उसके गुनाहगारों को किस तरह से सजा देने के लिए आगे आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को लेकर राज्य में अब यह बात भी उठने लगी है कि ”कांटो को समझने के लिए बुद्धि चाहिए और फूल को समझने के लिए हृदय चाहिएÓÓ। उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी को फूल माना जा रहा है और राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों को राज्य की जनता कांटे मान रही है और उनका मानना है कि राज्य में फूल की तरह दिखाई दे रहे पुष्कर सिंह धामी ने राज्य को खुशहाल बनाने की दिशा में जिस तरह से अपने कदम आगे बढाये हैं वह कुंठित मानसिकता रोगियों को हजम नहीं हो रहा है।

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