हाकम के आकाओं का राज रहेगा दफन?

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में स्नातक स्तरीय परीक्षा धंाधली की गूंज जब उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने गूंजी तो उन्होंने इस धांधली की जांच एसटीएफ के हवाले कर दी थी जिसके बाद एसटीएफ ने अपनी जांच पडताल शुरू की और उसने शुरूआती दौर में इस धाध्ंाली के कुछ छोटे मगरमच्छों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर वाहवाही लूटी लेकिन इस धांधली के सबसे बडा आका हाकम सिंह रावत को पकडने में एसटीएफ ने जिस तरह से शुरूआती दौर में कोई रूचि नहीं दिखाई वह एसटीएफ पर सवाल खडे कर गया और काफी बाद में हाकम सिंह रावत को जब दबोचा गया तो एसटीएफ की जांच से राज्यवासियों को भरोसा हट गया और वह इस धांधली की जांच सीबीआई से कराने के लिए धरना प्रदर्शन करने के लिए आगे आ गये। हाकम सिंह रावत की राजनेताओं और उनकी चंद अफसरों के साथ दिखी फोटो ने उत्तराखण्ड के अन्दर एक हलचल मचा दी थी। गजब की बात है कि जिस स्नातक स्तरीय परीक्षा को लेकर इतना भूचाल मचा हुआ था उसमें मात्र 41 भ्रष्टों को एसटीएफ ने भले ही सलाखों के पीछे पहुंचा दिया हो लेकिन अभी भी राज्यवासियों के मन में एक बडी आशंका है कि हाकम सिंह रावत के आकाओं का राज शायद राज में ही दफन हो जायेगा क्योंकि डीजीपी ने जिस तरह से दावा किया है कि एसटीएफ की जांच लगभग पूरी होने के कगार पर है तो उससे सवाल उठ रहा है कि क्या हाकम सिंह रावत उत्तराखण्ड के अन्दर इतना पॉवरफुल था कि उसके इस गोरखधंधे में ना तो कोई राजनेता शामिल था और न ही कोई अफसर? बाइस सालों से एक अदना सा हाकम सिंह रावत अधिकांश सरकारों को धोखा देकर अकेला नौकरियां बांटने का बादशाह बन सकता है इसमें शंका नजर आती है और सवाल खडे हो रहे हैं कि एक छोटी सी जांच जिसे पुलिस पूरा करने में आठ दस महीने लगा देती है वहीं भर्ती में हुई धंाधली की जांच एसटीएफ ने जिस जादुई अंदाज में पूरी करने का अब खाका तैयार करना शुरू किया है उस पर राज्यवासी यकीन नहीं कर रहे हैं और इसके पीछे उनकी एक ही सोच है कि हाकम सिंह रावत बिना कुछ राजनेताओं और कुछ अफसरों के बिना इतनी बडी धांधली नहीं कर सकता था?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के अन्दर एकमात्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऐसे दिखाई दिये जिन्होंने यूकेएसएसएससी द्वारा कराई गई स्नातक स्तरीय परीक्षा की जांच एसटीएफ से कराने का आदेश दिया था। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर साफ संदेश दिया था कि किसी भी घोटाले में चाहे कोई कितना बडा भी राजनेता या अफसर क्यों न हो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। मुख्यमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनके साथ आज तक जो अन्याय होता आया है वह अब नहीं होगा और पूर्व में जिस भर्ती में भी घोटाला हुआ है उसका सच सबके सामने आयेगा और हर गुनाहगार जेल की सलाखों के पीछे होगा। एसटीएफ ने इस मामले में शुरूआती दौर में जिस तरह से घोटाले के सबसे बडे मास्टर माइंड हाकम सिंह रावत को गिरफ्तार करने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये उससे उसकी निष्ठा पर सवाल खडे होते चले गये? हाकम सिंह रावत इतना बेखौफ था कि वह उत्तरकाशी से विदेश गया और उसके बाद वह वहां से सीधा अपने आवास पर आ रहा था तब जाकर उसे उत्तरकाशी पुलिस ने पकडा लेकिन उस समय भी एसटीएफ उसे पकडने के लिए खुद क्यों आगे नहीं बडी यह बार-बार राज्य के अन्दर सवाल खडा हो रहा है? राजनेता होने के कारण हाकम सिंह रावत की बडे-बडे राजनेताओं के साथ फोटो होना कोई बडी बात नहीं थी लेकिन भाजपा के एक नेता के साथ उसकी काफी फोटो और उनसे उनकी नजदीकी राज्य के अन्दर चर्चा का विषय बनती आ रही है? एसटीएफ के पास ऐसी कोई जादुई छडी नहीं है कि वह इस भर्ती में सभी बडे-बडे गुनाहगारों के दिल में छिपे राज को बाहर निकाल सके? हाकम सिंह को पुलिस रिमांड पर लेकर उससे सवाल जवाब करना यह एक जरूरी था जिसे एसटीएफ ने शायद पूरा भी किया लेकिन आज तक हुई सभी भर्तियों में राज्य के कौन-कौन राजनेता और कौन-कौन अफसर उसके सिंडिकेट को अपना संरक्षण देते रहे यह राज एसटीएफ हाकम सिंह के सीने से सम्भवत: नहीं निकाल पाई या फिर उसने उसे निकालने के लिए कोई पहल ही नहीं की? अब राज्य के अन्दर यह शोर मच रहा है कि हाकम सिंह रावत को पनाह देने वाले राजनेता और अफसरों का राज कभी भी राज्य की जनता के सामने नहीं आ पायेगा और यह राज एसटीएफ की जांच खत्म होते ही फाइलों में दफन होकर रह जायेगा? ऐसे में हाकम सिंह रावत को एसटीएफ क्या उसके साथ शामिल सभी गुनाहगारों को अदालत में सजा दिला पायेगी यह एक यक्ष प्रश्न उत्तराखण्ड की वादियों में गूंज रहा है?

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