मंत्री प्रेमचंद का झूठ हो गया ‘बेनकाब’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने यूकेएसएसएससी भर्ती में हुये घोटाले की जांच एसटीएफ को सौंपी तो उसके बाद से भर्तियों में हुये गुनाह एक-एक कर सामने आने लगे तो प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में विधानसभा में हुई बैकडोर से भर्तियों को लेकर शोर मचा तो उसके बाद मुख्यमंत्री ने विधानसभा में हुई भर्तियों की जांच के लिए विधानसभा अध्यक्ष को चि_ी लिख दी जिसके बाद जांच शुरू हुई तो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व सरकार में शामिल कैबिनेट मंत्री ने मीडिया के सामने हुंकार भरी थी कि विधानसभा अध्यक्ष को भर्ती करने की पॉवर है और उन्होंने नियमानुसार ही भर्तियां की थी और यहां तक ढोल पीट दिया था कि भर्तियों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। गजब की बात तो यह है कि एक ओर विधानसभा में हुई भर्तियों को लेकर राज्यवासियों के निशाने पर आये मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को मंत्री पद से हटाने के लिए आवाज उठनी शुरू हुई तो मंत्री जर्मनी की यात्रा पर निकल गये जिससे राज्य के अन्दर बहस शुरू हो गई कि आखिरकार सरकार ने मंत्री को विदेश जाने से क्यों नहीं रोका जब विधानसभा में उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों की जांच चल रही थी? विधानसभा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्र्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई सभी भर्तियों को जिस तरह से विधानसभा अध्यक्ष ने निरस्त कर दिया है उससे मंत्री प्रेमचंद का झूठ भी अब राज्यवासियों के सामने बेनकाब हो गया है क्योंकि उन्होंने दावा किया था कि जो भर्तियां उन्होंने की हैं वह नियमानुसार की हैं? विधानसभा में हुई भर्तियों को जिस तरह से विधानसभा अध्यक्ष ने निरस्त किया है उससे मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का राजनीतिक भविष्य क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बडी लडाई लड रहे हैं और उनके एक मंत्री का झूठ विधानसभा में हुई भर्तियों को लेकर बेनकाब हो चुका है तो क्या उन्हें मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा या फिर उन्हें इस झूठ पर क्षमादान मिल जायेगा?
उल्लेखनीय है कि पिछले काफी समय से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार के शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल आवाम के निशाने पर हैं और सरकार की जमीन को खुर्दबुर्द करने को लेकर जो आरोप लगे हैं उससे कहीं न कहीं सरकार के मुखिया भी आहत जरूर होंगे क्योंकि मुख्यमंत्री राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ ऑपरेशन चलाये हुये हैं। कुछ समय पूर्व जब पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के कार्यकाल में हुई विधानसभा में भर्तियों को लेकर राज्यभर में शोर मचा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में हुई सभी भर्तियों की जांच कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख दिया था। विधानसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर उन्हें एक माह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा था। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने यह जांच शुरू होने के बाद ऐलान किया था कि अगर भर्तियों में अनियमितता पाई गई तो उन्हें निरस्त किया जाये। प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने शासनकाल में हुई विधानसभा में भर्तियों को लेकर अपने आपको पाक-साफ बताया और उन्होंने मीडिया से जिस तरह हेकडी के साथ इन भर्तियों को लेकर उन्हे ही कटघरे में खडा करने का काम किया था उससे वह राज्यभर में आवाम के निशाने पर आ गये थे। आज आखिरकार यह साफ हो गया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और प्रेमचंद अगव्राल के कार्यकाल में विधानसभा में हुई भर्तियां गलत तरीके से की गई थी जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष रितु खण्डूरी ने निरस्त कर दिया। अब इन भर्तियों को लेकर जिस तरह से मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का झूठ राज्यवासियों के सामने बेनकाब हो गया है तो उससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई लड रहे हैं वह दोनो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का साहस दिखायेंगे? यह भर्तियां भी इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि राज्य के युवाओं के साथ दोनो पूर्व विधानसभा अध्यक्षों ने किस तरह से धोखा किया था? प्रेमचंद अग्रवाल का अब राजनीतिक भविष्य क्या होगा इसको लेकर प्रदेश में एक नई बहस चल गई है और अब सब राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस ऐतिहासिक फैसले पर टकटकी लगाये बैठे हैं जो इन भर्तियों के निरस्त होने के बाद सरकार के मुखिया को सम्भवत: कठोर फैसला लेना चाहिए?

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