प्रमुख संवाददाता
देहरादून। सरकार के मुखिया की नियत साफ है कि भ्रष्टाचारियों व घोटालेबाजों को बेनकाब कर उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाये कि राज्य में कोई भी भ्रष्टाचारी व घोटालेबाज युवा पीढी के भविष्य के साथ खिलवाड न कर पाये। इसी सोच के तहत मुख्यमंत्री ने राज्य में हुई काफी भर्तियों की जांच एसटीएफ और विजिलेंस के हवाले कर रखी है जिसमें अब तक सफेदपोश हाकम सिंह रावत से लेकर काफी बडे-बडे लोग जेल की सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। इन गुनाहगारों में से कुछ को पुलिस रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की गई लेकिन यह पूछताछ आवाम के गले नहीं उतर रही है क्योंकि एसटीएफ के पास गुनाहगारों के मन में छिपे राज को उगलवाने का कोई ऐसा यंत्र नहीं है जिसे वह प्रयोग कर वह गुनाहगारों को मजबूती के साथ सजा दिलाने में सफल हो सकें? सिर्फ जेल भेज देने से गुनाहगारों का गुनाह समाप्त नहीं हो जायेगा क्योंकि युवा पीढी के साथ जो गुनाह हाकम सिंह रावत और दर्जनों भ्रष्टाचारियों ने किया है वह सीधेतौर पर सरकार को अस्थिर करने जैसा ही नजर आता है ऐसे में बहस छिड गई है कि अगर बडे-बडे भ्रष्टाचारियों का पॉलियोग्राफ टेस्ट और नार्कोटेस्ट नहीं कराया गया तो एसटीएफ के लिए इन गुनाहगारों को अदालत में बडी सजा दिलाना एक टेडी खीर बन जायेगा? उत्तराखण्ड में एक ही सवाल सोशल मीडिया पर तैर रहा है कि आखिरकार जिस हाकम सिंह रावत ने राज्य में अधिकांश भर्तियों में युवा पीढी से धोखा कर दौलत के दम पर युवकों को पेपर लीक कर उन्हें सरकारी नौकरियों में फिट कराया है आखिर हाकम ंिसह का बोस है कौन? हाकम सिंह इतना पॉवरफुल किसके बल पर हुआ कि वह राज्य में एक के बाद एक अधिकांश भर्तियों में भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलता चला गया इसलिए एसटीएफ पर उंगली उठ रही है कि वह हाकम के उन हाकिमों के पास नहीं पहुंच पायेगी जो उसे आज तक अपनी शरण देकर उसे अपने लिए दौलत कमाने का मोहरा बनाकर रखे हुये थे?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनता को वचन दिया है कि भ्रष्टाचार, घोटाले करने वालों को जब तक वह एक-एक कर जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा देंगे तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। मुख्यमंत्री ने यूकेएसएसएससी में हुई भर्तियों में हुये घोटाले की जांच एसटीएफ और विजिलेंस को सौंप रखी है और इसी कडी में एसटीएफ ने उत्तरकाशी से जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत की लम्बे समय बाद जब गिरफ्तारी की थी तो उस पर उंगलियां उठी थी और कुछ राजनेताओं और एक पुलिस अफसर के साथ उनकी फोटो वायरल होने पर राज्य के अन्दर यह शोर मचने लगा था कि एसटीएफ इस मामले में पारदर्शिता के साथ जांच नहीं कर पायेगी इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले की जाये। हाकम सिंह रावत राज्य में नौकरियां बांटने का बादशाह कैसे बना इसको लेकर राज्य के अन्दर एक बडी बहस छिडी हुई है और यह सवाल खडे हो रहे हैं कि सिर्फ हाकम सिंह रावत को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर एसटीएफ उसे कडी दिलाने में कामयाब नहीं हो पायेगी? सिर्फ रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ कर जानकारियां एकत्र करना एसटीएफ के लिए भले ही एक बडा कदम कहा जा रहा हो लेकिन एसटीएफ के पास हाकम सिंह रावत और भर्ती घोटालों में शामिल गुनाहगारों के सीने में छिपे राज उगलवाने में सिर्फ पॉलियोग्राफ टेस्ट और नार्कोटेस्ट ही अभेद हथियार माने जाते हैं जो एसटीएफ के पास है नहीं? अब सवाल खडे हो रहे हैं कि हाकम सिंह रावत वर्षों से आखिर इतना पॉवरफुल किन-किन अफसरों और राजनेताओं के बल पर होता चला गया इसका सच एसटीएफ ला पायेगी ऐसा यकीन राज्य की जनता को नहीं हो रहा है? बहस छिडी हुई है कि आखिरकार राज्य में वर्षों से सरकार द्वारा कराई जा रही भर्तियों में जिस तरह से हाकम सिंह रावत और उसका सिंडिकेट सरकार को धोखा देकर युवा पीढी को बेरोजगारी के दलदल में धकेलता रहा तो इतने बडे भर्ती घोटालों की जांच सिर्फ एसटीएफ से कराना आवाम के गले नहीं उतर रहा है? विजिलेंस भी दरोगा भर्ती घोटाले की जांच कर रही है लेकिन बहस यही चल रही है कि विजिलेंस भी पुलिस का अंग है ऐसे में क्या इस बडे भर्ती घोटाले में विजिलेंस उन सभी घोटालेबाजों के चेहरे बेनकाब कर पायेगी जिन्होंने खाकी की भर्ती में भी भ्रष्टाचार का खुला तांडव किया था? हाकम सिंह रावत एक बडा मोहरा है लेकिन उसके बॉस कुछ राजनेता और कुछ अफसर हो सकते हैं जिन पर एसटीएफ अपनी निगाह सम्भवत: नहीं दौडा पायेगी क्योंकि भर्ती घोटाला इतना विशाल है कि उसमें बडे-बडे चेहरे भी शामिल हो सकते हैं जिन पर हाथ डालने की सम्भवत: एसटीएफ में कुवत नजर नहीं आ रही है? हाकम सिंह रावत जैसे सफेदपोश का गुनाह इतना मात्र नहीं है कि उसे मात्र कुछ माह के लिए जेल में रखकर एसटीएफ अपनी पीठ थपथपा ले? हाकम सिंह रावत और उसके साथ जुडे हर सिंडिकेट को बेनकाब करने का अगर मिशन राज्य सरकार सीबीआई के हवाले करे तो राज्य में बाइस सालों से चले आ रहे भ्रष्टाचार करने वाले हर गुनाहगार सलाखों के पीछे होंगे और इस भ्रष्टाचार से कमाई गई सारी सम्पत्तियां भी सरकार में निहित हो जायेंगी।