विकासनगर(संवाददाता)। जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि यूपीसीएल द्वारा लगभग 9०० करोड़ की बिजली खरीद पर विद्युत नियामक आयोग से सहमति न लेना अथवा खरीद से संबंधित प्रस्ताव नियामक आयोग के समक्ष पेश न करना यूपीसीएल द्वारा किए गए भारी भरकम खेल को दर्शाता है। यहां पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि यूपीसीएल द्वारा पावर एक्सचेंजो से मार्च से जून 2०22 तक 1०63.59 मिलियन यूनिट एवं एनवीवीएन के माध्यम से मई एवं जून 2०22 में कुल 135.75 मिलियन यूनिट विद्युत खरीदी गई यानी कुल 1199.34 विद्युत खरीदी गई।
नेगी ने कहा कि गर्मी का मौसम आने से पहले निगम को होमवर्क करना चाहिए था, जो उसने नहीं किया और जिसका नतीजा यह हुआ कि आकंठ कर्ज में डूबे प्रदेश को करोड़ों रुपए की बिजली महंगे दामों में खरीदनी पड़ी। उन्होंने कहा कि निगम को चाहिए था कि बिजली खरीद से पहले आयोग के समक्ष प्रस्ताव तो पेश किया होता, चाहे आयोग स्वीकृति देता या न देता।
उन्होंने कहा कि वह अलग बात होती, लेकिन प्रस्ताव रखने तक की जहमत नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि उक्त स्वीकृति न मिलने के कारण निगम का घाटा बढ़ेगा और यह घाटा निकट भविष्य में विद्युत उपभोक्ताओं से वसूला जाना तय है। नेगी ने कहा कि यूपीसीएल अपनी नाकामी छुपाने के लिए रातों-रात कुछ भी कर लेते हैं, लेकिन जनता की विद्युत समस्याओं पर संज्ञान लेने में महीनों, सालों लगा देते हैं। नेगी ने कहा कि यूपीसीएल की इस करतूत से प्रतीत होता है कि निगम का प्रबंधन फेल हो चुका है। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में- विजय राम शर्मा व सुशील भारद्वाज मौजूद थे।
