देहरादून(संवाददाता)। भारत देश आज जिस रूप में संगठित है, उसका सबसे बड़ा श्रेय भारत के लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल को जाता है। 15 अगस्त 1947 को जब भारत देश आजाद हुआ था, तब देश कई छोटी रियासतों में बंटा हुआ था, जोकि स्वतंत्र भारत के लिए एक लिए बहुत बड़ा सिरदर्द था। इस जटिल समस्या को सुलझाने का जिम्मा लौह पुरूष सरदार पटेल ने अपने कंधों पर लिया और अपनी विवेकशीलता व सूझबूझ से इन सभी रियासतों को एक-एक करके भारत में समायोजित कर लिया। सरदार पटेल के ऐसे कई कारनामें भारतीय इतिहास में दर्ज है, जो यह बताते है कि देश पर जब कोई विपदा आई तो उन्होंने डटकर उसका सामना किया। उनके इसी पराक्रम की वजह से ही उन्हें लौह पुरूष कहा गया? भारत देश में, अलग-अलग अंतराल में ऐसी विभूतियों ने अकसर जन्म लिया है जोकि अपने कार्यकाल में कुछ ऐसा कर गए कि इतिहास के पन्नों में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों से अंकित हो सका। कहते है कि जो व्यक्ति ऐसी विभूतियों को अपना आदर्श मानकर जनहित में कार्य करता है, उसको भी इन विभूतियों की श्रेणी में गिना जाता है। मौजूदा समय में इस बात का उदाहरण उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रूप में देखा जा सकता है?
सरकार का पिछला कार्यकाल हो या वर्तमान, हमेशा उनके सामने कई चुनौतियां और इन सभी चुनौतियों का उन्होंने एक लौह पुरूष के समान सामना किया और उनपर विजय प्राप्त की। पिछले कार्यकाल में जहां उनके सामने भाजपा को लगातार दूसरी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता हासिल कराने की चुनौती थी तो उन्होंने दिन रात एक करके इस चुनौती का सामना किया और इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार भाजपा को सत्ता पर आसीन किया था। वहीं सीएम धामी के सामने मौजूदा सरकार में राज्य को विकास के पथ पर ले जाने के साथ, सूबे में मज रहे भर्ती घोटाले के शोर को भी शांत कराने की जिम्मेदारी मिल चुकी है। फास्ट एक्शन लेने के मामले में पुष्कर सिंह धामी अभी राज्य के पूर्व सभी मुख्यमंत्रियों से ज्यादा एक्टिव नजर आ रहे है।
उत्तराखण्ड में वर्तमान समय में यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का शोर मचा हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ संदेश दे रखा है कि घोटालेबाज चाहे कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा। राज्य की एसटीएफ ने यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले में अभी तक ढाई दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ का यह एक्शन इस बात का प्रमाण देता है कि सरकार के मुखिया इस घोटाले को लेकर कितने गंभीर है। वहीं कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2०15 में उत्तराखण्ड में हुए दरोगा भर्ती घोटाले की जांच भी विजिलेंस के हवाले कर दी है। वहीं सीएम धामी के एक्शन में आने से उनके विरोधी और विपक्षी दलों को टेंशन होने लगी है। बता दें कि उत्तराखण्ड अधिनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परिक्षाओं में हुई अनियमित्ताओं को लेकर राज्य के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की तरफ से यह कहा गया कि बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की सीबीआई द्वारा जांच की जा रही है। उत्तराखंड में भी भर्ती मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में मामले की सीबीआई जांच हो, ताकि इस जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर अंगुली न उठे। खबर है कि कांग्रेस की इस बात को लेकर सूबे के मुुखिया ने बड़े ही अनोखे अंदाज में यह कहा दिया कि अब तक सीबीआइ को बेकार संस्था बताने वाली कांग्रेस का इस जांच एजेंसी के प्रति विश्वास कैसे जग गया। सीएम धामी मात्र जनप्रिय नेता ही नहीं एक कुशल राजनीतिज्ञ भी है और मौजूदा समय में कांग्रेस या किसी और राजनीतिक दल के सामने उत्तराखण्ड में इन विलक्षण बुद्धि के स्वामी वाले व्यक्तित्व का सामने करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। संभवत: इसलिए ही धामी के एक्शन से विरोधियों और विपक्षियों को टेंशन हो रही है?
