देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सत्ता संभालने के बाद से ही देवभूमि से भ्रष्टाचार को उखाड फेंकने का संकल्प लिये हुये हैं और मौजूदा समय में धामी ऑन फायर की भूमिका में हैं। धामी का हौसला इतना बुलंद है कि उन्होंने राज्य में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से हुई चंद भर्तियों की जांच एसटीएफ, विजिलेंस से कराने का ऐलान कर रखा है जिसके चलते भ्रष्टाचारी व घोटालेबाजों की नींद उडी हुई है। पेपर लीक मामले की जांच की निष्पक्षता पर मुख्यमंत्री ने अपनी पैनी नजर रखी हुई है और उसी का परिणाम है कि छोटे से लेकर बडे घोटालेबाज सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के खिलाफ किस कदर आक्रमक रूख अपना रहे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साफ अल्टीमेटम दिया है कि जिन भर्तियों के भी घोटाला हुआ है उन्हें निरस्त किया जायेगा और गुनाहगारों पर एनएसए तक लगाया जायेगा। देवभूमि से भ्रष्टाचार को उखाड फेंकने की जिद्द में मुख्यमंत्री ने 2०15 में दरोगा भर्ती में गडबडी की आशंका के सामने आने पर उसकी जांच विजिलेंस के हवाले कर साफ संदेश दे दिया कि उनके राज्य में हर भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज सलाखों के पीछे होगा।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य में भ्रष्टाचार को जड से उखाड फेंकने की सौगंध खाकर जिस तरह से आगे बढकर बडे-बडे फैसले ले रहे हैं उससे धामी ऑन फायर के रूप में दिखाई दे रहे हैं। 2०21 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कराई गई भर्ती पेपर लीक प्रकरण की जांच उन्होंने एसटीएफ के हवाले की और उन्होंने साफ अल्टीमेटम दिया था कि पेपर लीक प्रकरण में छोटे और बडे सभी गुनाहगारों को एक-एक कर सलाखों के पीछे पहुंचाया जाये और कोई भी गुनाहगार इस जांच से बच न पाये यही कारण है कि एसटीएफ ने पेपर लीक प्रकरण की कडियां जोडकर एक-एक गुनाहगार को सलाखों के पीछे पहुंचाने का मिशन शुरू कर रखा है। सबसे अह्म बात यह है कि पुष्कर सिंह धामी ने पेपर लीक प्रकरण की जांच पर अपनी पैनी निगाह बनाये हुये हैं और उसी के चलते अब एसटीएफ ने लखनऊ में स्थित आरआईएमएस कम्पनी के मालिक राजेश चौहान को सलाखों के पीछे पहुंचाया तो यह खुलासा हुआ कि केन्द्रपाल व राजेश चौहान के बीच पेपर लीक की डील दो करोड रूपये में हुई थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड की युवा पीढी को इंसाफ दिलाने के लिए जिस तरह से कुछ भर्तियों की जांच के आदेश दिये हैं उससे भ्रष्टाचारियों व घोटालेबाजों के पैरों तले जमीन खिसकी हुई है और एक के बाद एक हो रही गिरफ्तारियों से कुछ सफेदपोश व काफी अफसर भी डरे और सहमें हुये हैं कि कहीं पेपर लीक कांड की आंच उनके दामन तक न पहुंच जाये। कुल मिलाकर कहा जाये तो ऑन फायर नजर आ रहे पुष्कर सिंह धामी के हौसला यह बताने के लिए काफी है कि वह राज्य से भ्रष्टाचार को जड से उखाडने के लिए किस तरह से आगे बढते जा रहे हैं।
