रूद्रप्रयाग(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जबसे पुलिस अफसरों को संदेश दिया है कि थाने में आने वाली हर शिकायत को दर्ज किया जाये तो उसके बाद से ही पुलिस अलर्ट है और इसी के चलते रूद्रप्रयाग में जब शिकायत दर्ज हुई कि केदारनाथ में हैलीकॉप्टर से यात्रा करने के नाम पर दो लोगों ने अपने आपको एक कम्पनी का एजेंट बताकर उनसे काफी पैसा ठग लिया था जिसके बाद पुलिस कप्तान ने मामले की जांच कराई और आखिरकार उन दोनो ठगों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया जिन्होंने यात्रियों से हैलीकॉप्टर की टिकट के नाम पर ठगी की थी।
पुलिस कप्तान आयुष अग्रवाल ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि 17 मई 2०22 को सोलन हिमाचल प्रदेश निवासी परीक्षित शारदा ने गुप्तकाशी थाने में आकर सूचना दी थी कि उनके साथ किसी अन्जान व्यक्ति के द्वारा केदारनाथ यात्रा हेतु पवनहंस कम्पनी का हेलीकॉप्टर टिकट उपलब्ध कराने के नाम से 1,12०००/-रुपयों की धोखाधड़ी की है और बताया था कि जब वे यात्रा के लिए वहां पहुंचे तो उनको कोई टिकट प्राप्त नहीं हुए और न ही टिकट दिलाने वाले व्यक्ति से अब उनका सम्पर्क हो रहा है। पुलिस कप्तान ने बताया कि अज्ञात ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उसके बाद इस ऑनलाइन ठगी में प्रयुक्त संदिग्ध खातों में हुए लेन-देन के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक गुप्तकाशी व पुलिस उपाधीक्षक ऑपरेशन्स को ठगों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया। ठगी करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए थाना प्रभारी गुप्तकाशी एस०ओ०जी० की एक संयुक्त टीम गठित कर ठगों की तलाश में गैर प्रान्त बिहार भेजा गया था। सर्विलांस की मदद से ठगी प्रकरण में प्रयुक्त हुए अलग-अलग खाताधारकों के सम्बन्ध में जानकारी हासिल करने पर पुष्टि होने पर दो ठगों कौशल कुमार निवासी ग्राम नदवा जिला पटना व राहुल कुमार निवासी नदवा थाना बाड़, जिला पटना, बिहार से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस कप्तान ने बताया कि इन ठगों द्वारा पवनहंस हैलीकॉप्टर कम्पनी के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर इन्टरनेट पोर्टल पर सार्वजनिक कर दी जाती थीं, जिससे कि किसी भी व्यक्ति द्वारा हैलीकॉप्टर टिकटों के सम्बन्ध में गूगल पर सर्च करने पर इनकी वेबसाइट पर क्लिक करने पर इनके झांसे मे आ जाते थे, सबसे बड़ी बात ये कि इनके द्वारा सम्बन्धित क्षेत्र के बारे मे अधिकांश जानकारी सही अपलोड की रहती थी। किसी भी क्वेरी के लिए अपने मोबाईल नम्बर डाले रखते थे। पैसों के लेन-देन के लिए इनके द्वारा अन्य गरीब लोगों के खातों का सहारा लिया जाता था, उनके नाम से खाता खोलकर ओ०टी०पी० या अलर्ट हेतु अपना नम्बर डलवाया जाता था तथा ए०टी०एम० कार्ड अपने पास रखते थे। खाते मे आने वाली धनराशि की तुरन्त निकासी या दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस कार्य को इनके द्वारा अत्यधिक प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया जाता था।
