देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में पेपर लीक मामले में अगर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी चुप्पी साध लेते तो आज इस मामले में एक के बाद एक सलाखों के पीछे पहुंच रहे गुनाहगार कभी भी बेनकाब न हो पाते और वो हाकम जिसका त्रिवेन्द्र राज में सिक्का चलता था उसके दौलत कमाने की कहानी कभी भी बाहर न आ पाती? हाकम सिंह रावत त्रिवेन्द्र राज में इतना पॉवरफुल था कि जब हरिद्वार में एक भर्ती प्रकरण में उसका नाम पुलिस की फाइल में दर्ज हुआ तो त्रिवेन्द्र के दयापात्र के चलते वह बच गया था और वह एफआईआर बाद में उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दी थी लेकिन त्रिवेन्द्र सरकार ने इस मामले में अपील नहीं की और मामला खत्म हो गया? अब जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के चलते पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने उसे पकडने में काफी दिन लगाये उससे आशंका पनप रही है कि जिस हाकम सिंह रावत ने मात्र कुछ वर्षों में अपनी दौलत का किला खडा कर रखा है उसने अपनी दौलत का राज बेपर्दा रखने के लिए कहीं अपनी जमीनों के राज लापता तो नहीं करा दिये जिससे वह एसटीएफ और ईडी की नजरों से अपने आपको बचाने में सफल हो जाये? त्रिवेन्द्र राज में हाकम सिंह कितना पॉवरफुल था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपनी मां का स्वास्थ्य खराब होने पर जिलाधिकारी उत्तरकाशी से अपनी मां को हैलीकाप्टर से देहरादून तक पहुंचाने के लिए आवेदन किया था और ऐसी चर्चा है कि आपदा प्रबंधन एवं पुर्नवास विभाग ने हाकम सिंह रावत की मां को मोरी से देहरादून तक लाने के लिए हैलीकाप्टर उपलब्ध कराया था? हाकम सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर भी अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी के पत्र को पोस्ट करते हुए लिखा था कि जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड का आभार व्यक्त करता हंू कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह आपदा प्रबन्धन राहत कोष के तहत पीडित को सहायता की जाये तथा उचित उपचार किया जाये। इस पत्र और हाकम की पोस्ट से साफ झलक रहा है कि वह कितना पॉवरफुल था? अब सवाल यह खडा हो रहा है कि अगर त्रिवेन्द्र शासनकाल में अकूत दौलत के मालिक हाकम सिंह रावत की मां का इलाज आपदा प्रबन्धन राहत कोष के तहत कराया गया तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि त्रिवेन्द्र शासनकाल में किस तरह से सरकारी धन का दुरूपयोग हुआ था?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में भ्रष्टाचार व घोटालेबाजों को बेनकाब करने का संकल्प लिया हुआ है और इसी संकल्प को पूरा करते हुए उन्होंने वर्ष 2०21 में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कराई गई भर्ती में पेपर लीक की शिकायत मिलने पर इस मामले की जांच एसटीएफ के हवाले कर दी थी। इस घोटाले में उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत का नाम शुरूआती दौर में ही सामने आ रहा था लेकिन एसटीएफ ने उस पर शुरूआती दौर में ही शिकंजा कसने के बजाए कुछ और गुनाहगारों को दबोचकर सलाखों के पीछे पहुंचाया तथा हाकम सिंह रावत को पकडने में जिस तरह से एसटीएफ ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई उससे उसकी निष्ठा पर शुरूआती दौर में ही सवालिया निशान लग गये थे? हैरानी वाली बात यह रही कि हाकम सिंह रावत का सोशल मीडिया पर राजनेताओं और अफसरों के साथ जो मेलमिलाप दिखाई दिया उससे राज्य के अन्दर बहस छिडने लगी कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाये क्योंकि हाकम सिंह रावत के सीने में इतने राज दफन है कि उसे एसटीएफ अपने छोटे संसाधन से बाहर निकालने में सफल नहीं हो पायेगी? अपनी गिरफ्तारी का दोष कांग्रेस पर मंडने वाले हाकम सिंह रावत कैसे मात्र कुछ वर्षों में दौलत का किला खडा कर गया यह हैरान करने जैसा ही दिखाई दे रहा है। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ हाकम सिंह रावत की काफी फोटो यह बताने के लिए काफी हैं कि उसकी पूर्व मुख्यमंत्री से कितनी नजदीकी थी? गजब बात तो यह है कि जब त्रिवेन्द्र शासन काल में अधीनस्थ चयन सेवा आयोग में एक भर्ती प्रकरण में हाकम सिंह रावत का नाम सामने आया तो पूर्व मुख्यमंत्री ने उस पर शिकंजा कसने के लिए क्यों अपने कदम आगे नहीं बढाये? कितनी हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड में जहां पहाडों में आम आदमी को दर्जनों बार एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती वहीं तिलवाडी के पूर्व ग्राम प्रधान रहे हाकम सिंह रावत ने जब जिलाधिकारी उत्तरकाशी को नौ अगस्त 2०18 को पत्र लिखकर अवगत कराया कि उसकी मां का स्वास्थ्य विगत दो दिन से खराब होने के कारण उन्हें उपचार हेतु देहरादून तक पहुंचाये जाने के लिए हैलीकाप्टर उपलब्ध कराया जाये जिस पर उस समय के अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी ने अपर सचिव आपदा प्रबन्धन एवं पुर्नवास विभाग उत्तराखण्ड शासन को पत्र लिखकर अवगत कराया कि हाकम सिंह रावत की माता को उपचार हेतु देहरादून पहुंचाने के लिए हैलीकाप्टर उपलब्ध कराये जाने हेतु सम्बन्धितों को निर्देशित करने का कष्ट करें। इसके साथ ही पत्र में यह भी अंकित किया गया कि हैलीकाप्टर हेतु चिन्हित स्थान के लिए कार्डिनेट निम्न प्रकार से हैं और यह भी लिखा था कि वर्तमान समय में मौसम सामान्य है और हल्के बादल हैं तथा ग्राम लिवाडी मन्दिर प्रांगण स्थल बताया गया था। वहीं दस अगस्त 2०18 को ही हाकम सिंह रावत ने फेसबुक पर पोस्ट डाली थी जिसमें अपर जिलाधिकारी का पत्र भी पोस्ट किया गया था। हाकम सिंह ने लिखा था कि माता का स्वास्थ्य खराब होने के कारण काफी दुखी और परेशान हंू पूरी कोशिश कर रहा हंू कि उत्तरकाशी जिले के सीमांत विकासखण्ड मोरी के जखोल लिवाडी गांव में हैलीकाप्टर सेवा से मां को देहरादून लाया जाये व उपचार किया जाये। जिलाधिकारी उत्तरकाशी व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड का आभार व्यक्त करता हंू कि पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह आपदा प्रबन्धन राहत कोष के तहत पीडित को सहायता दी जाये तथा उचित उपचार किया जाये। हाकम सिंह ने धीरेन्द्र पंवार एसडीएम पुरोला समेत कुछ का धन्यवाद करते हुए आभार व्यक्त किया था कि बहुत-बहुत शुक्रिया, स्नेह और आशीर्वाद मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दौलतमंद हाकम सिंह रावत ने अगर त्रिवेन्द्र राज में अपनी मां का इलाज और हैलीकॉप्टर आपदा पं्रबन्धन एवं पुर्नवास से करवाया व मंगाया तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह त्रिवेन्द्र राज में कितना पॉवरफुल था?
