देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में आगे बढ रहे हैं और उसी के चलते अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज व दवाईयां मिले इसके लिए उन्होंने प्रभारी सचिव एवं मिशन निदेशक डा० आर राजेश कुमार को एक बडे विजन के तहत मैदान में उतारा है। आज डा० आर राजेश कुमार प्रेमनगर के राजकीय संयुक्त चिकित्सालय में औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे और वहां उन्होंने मरीजों को दी जाने वाली दवाईयों को परखा।
उत्तराखण्ड में आज तक सरकारी अस्पतालों में बाहर से दवाईयां मंगाने को लेकर हमेशा पूर्व मुख्यमंत्रियों व स्वास्थ्य मंत्री के सामने आवाज उठती रही लेकिन कभी भी किसी पूर्व मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों में उन डाक्टरों पर कार्यवाही करने के लिए कोई कदम आगे नहीं बढाया जो गरीब इंसानों को बाहर से महंगी से महंगी दवाईयां मंगाने के लिए आगे आते थे। उत्तराखण्ड में दर्जनों बार देखने को मिला कि कुछ पूर्व मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्रियों ने अस्पतालों का दौरा किया और वहां जब मरीजों ने इलाज अच्छा न होने और बाहर से दवाईयां मंगाने की शिकायत की तो यह नेता सिर्फ वहां मीडिया की सुर्खियां बटोरकर खामोशी से चले जाते थे और यही कारण था कि कुछ सरकारी अस्पतालों में उत्तराखण्ड के कुछ जिलों से आने वाले गरीब मरीजों के सामने महंगी दवाईयों के लाने से कोई नहीं रोक पाता था। अब जबसे उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की कमान अपने हाथों में ली है तो उन्होंने राज्यभर के अफसरों को साफ संदेश दिया है कि गरीबों के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाये और सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज मिले और उन्हें मुफ्त दवाईयां उपलब्ध कराई जायें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अस्पतालों में बाहर से दवाईयां न आ पायें इसके लिए मरीजों को भी साफ संदेश दे रखा है कि उन्हें अस्पताल से ही दवाईयां मिलेंगी। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी के पूर्व डीएम डा० आर राजेश को देहरादून का प्रभारी सचिव एवं मिशन निदेशक बनाया है जिससे कि मरीजों को बेहतर से बेहतर इलाज और नि:शुल्क दवाईयां मिल सकें। निदेशक का पद संभालने के बाद डा० आर राजेश कुमार ने सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को बेहतर इलाज और नि:शुल्क दवाईयां दिये जाने को लेकर अपना रूख साफ किया हुआ है। आज प्रभारी सचिव एवं मिशन निदेशक डा० आर राजेश कुमार अपनी टीम के साथ प्रेमनगर के सरकारी अस्पताल में पहुंचे जहां उन्होंने इलाज करा रहे मरीजों के साथ खुलकर बातचीत की और उनमें उस समय बडा गुस्सा देखने को मिला जब उन्होंने एक गरीब महिला को बच्चे को गोद लिये हुये देखा तो उसके पास रखी एक शीशी को उठाया और उस पर जब लिखा रेट देखा तो वह गुस्से में आ गये और उन्होंने वहां के प्रशासन से कहा कि एक तो यह गरीब महिला है और न जाने कैसे वह अपना इलाज करा रही है और उस पर उससे बाहर से दवाई क्यों मंगाई गई। निदेशक अस्पताल की एमेरजेंसी वार्ड में गंदगी स्ट्रैचर टूटे देखकर हैरान हो गये कि यह अस्पताल है या कबाड़ खाना। निदेशक डा० राजेश कुमार ने अस्पताल की गैलरी देखी तो वहां अंधेरा देखकर हैरानगी जताई कि अस्पताल को क्या बना रखा है। सबसे ज्यादा हैरान निदेशक अस्पताल में बनाये गये मात्र आठ आयुषमान कार्ड को देखकर हुये उन्होंने अस्पताल के सीएमएस से कहा कि जिस प्रेमनगर व आस-पास हजारों की संख्या में लोग रहते हैं वहां सिर्फ आठ व्यक्तियों ने आयुषमान कार्ड बना रखे हैं जबकि यह भारत सरकार की एक बडी योजना है जिसके तहत सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज देने की दिशा में आगे है लेकिन प्रेमनगर में मात्र आठ आयुषमान कार्ड होना सिस्टम पर सवाल खडे कर रहा है। उन्होंने सीएमएस से आयुषमान कार्ड की संख्या बढाने के निर्देश दिये और दवाईयों को भी बाहर से मंगाने पर बडी नाराजगी दिखाई।
