देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस संकल्प के साथ राज्य को आदर्श राज्य बनाने की दिशा में अपने कदम आगे बढाये हैं उससे राज्य के अन्दर यह बहस शुरू होने लगी है कि धामी राज में कोई भ्रष्टाचार करके दिखाये? धामी राज में हर भ्रष्टाचारी के खिलाफ बडी कार्यवाही अमल में लाई जायेगी तो वहीं एक ही सीट पर डटे अफसरों को भी सरकार आईना दिखायेगी कि उसके राज में वह सबकुछ नहीं चलेगा जो आज तक चलता आ रहा है?
उल्लेखनीय है कि इक्कीस सालों से राज्य की जनता भ्रष्टाचार से अपने आपको मुक्त होते नहीं देख रही थी और उसी के चलते उसके मन में एक बडी पीडा थी कि अगर राज्य को केन्द्र शासित राज्य बना दिया होता तो आज प्रदेशवासियों को भ्रष्टाचार के चंगुल में नहीं फंसना पडता। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को भी इक्कीस सालों में कुछ सरकारों ने अपनी हिटलरशाही दिखाई लेकिन जबसे राज्य की कमान पुष्कर सिंह धामी ने संभाली है तबसे राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार का खेल खेलते आ रहे कुछ अफसरों की नींद उड गई है कि अब उनके लिए भ्रष्टाचार करना आसान बात नहीं होगी। पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने अपनी स्वच्छ सरकार का जिस तरह से रिपोर्ट कार्ड रखा है उसी का परिणाम है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पुष्कर सिंह धामी को उनके विजन को धरातल पर उतारने के लिए उनके साथ खडे हुये दिखाई दे रहे हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर अभी तक पुष्कर सिंह धामी ने जो भी तबादले किये उन पर कोई उंगली तक नहीं उठा पाया और पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जब सरकार राज्य में खेलों के अन्दर एक बडी योजना के तहत उत्तराखण्ड को देश-विदेश में एक नई पहचान दिलाने के मिशन में आगे बढी हुई है। खेल सचिव अभिनव कुमार ने जिस विजन के तहत राज्य के खिलाडियों को देश में एक नई पहचान दिलाने के लिए जिस तरह से खेलों को लेकर एक बडी रणनीति कुछ राज्यों के साथ मिलकर बनानी शुरू की है उससे राज्य हर दिशा में आगे बढता हुआ नजर आने लगा है। पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस बडे पैमाने पर चाबुक चलाना शुरू किया है उससे साफ नजर आ रहा है कि कोई भी भ्रष्टाचार अब पुष्कर राज में भ्रष्टाचार करने का दुसाहस नहीं कर पायेगा।
