देहरादून(संवाददाता)। राजनीति में संकेतो के भाषा बेहद गूढ़ और दूरदर्शी होती है। साथ ही इशारों की मारक क्षमता बेहद घातक होती है।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों दिल्ली प्रवास पर है। बीते रोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात की जारी फोटोग्राफ ने पुष्कर विरोधियों की नींद उड़ा दी है। चंपावत उपचुनाव में रिकॉर्ड मत प्रतिशत के अंतर से विजय प्राप्त करने के बाद पुष्कर धामी की प्रधानमंत्री से यह पहली मुलाकात रही। मुलाकात के समय प्रधानमंत्री के चेहरे के भाव एवं उनकी बॉडी लैंग्वेज अनेक कूटनीतिक संकेत दे गयी। राजनीतिक पंडित इन संकेतों को पुष्कर सिंह धामी के राजनीतिक भविष्य से जोड़ कर देख रहे है। पंडितों के कहना है कि यह संकेत पुष्कर धामी पर प्रधानमंत्री के गहरे विश्वास का भी इशारा देतें है। जिसकी पुष्टि 21 मार्च 2०22 के उस निर्णय से भी होती है जिसमे हार के बावजूद पार्टी हाई कमान ने दोबारा उत्तराखंड की कमान पुष्कर धामी को सौंपी दी थी।
नरेंद्र मोदी का उक्त निर्णय भाजपा ही नही देश के अन्य राजनीतिक दलों को भी सकते में डाल गया था। स्वभाविक है कि सूबे की कमान सौंपने से पहले धामी की काबलियत की कसौटी हुई होगी। जिसमें धामी सफल भी रहे होंगे। ऐसे में पुष्कर धामी के साथ गर्मजोशी से मुलाकात कर प्रधानमंत्री पार्टी के पुराने छत्रपों को भी इशारों इशारों में स्पस्ट संकेत दे दिये है। बीते दिनों चारधाम यात्रा को लेकर राज्य में पुष्कर धामी के नेतृत्व को कटघरे में लाने का प्रयास किया जा रहा था। केंद्र ने जब बद्रीनाथ एवं केदारनाथ में व्यवस्था हेतु आईटीबीपी एवं एनडीआरएफ को उतारा तो पुष्कर विरोधियों की बांछें खिल गयी। कहा जाने लगा कि मुख्यमंत्री यात्रा व्यवस्था को नियंत्रित करने में असफल साबित हो रहे है इस लिए केंद्र ने उक्त निर्णय लिया है। लेकिन अतिउत्साह में वह यह भूल कि अगर केंद्र राज्य की घटनाओं पर नजर रखे हुए है तो वह उस नजर से स्यंम कैसे बच सकते है। हमेशा से नेतृत्व उत्तराखंड की पहली मूलभूत समस्या रही है। बीते चार विधानसभाओं में अस्थितरता का जो खेल हुआ उसने राज्य के विकास की गति को नकारात्मक प्रभवित किया है। दूसरा बड़ा कारण यह भी रहा कि राज्य का कोई भी नेता जनता एवं राष्ट्रीय नेतृत्व के मन मे विस्वास पैदा करने में असफल रहा है यहां पुष्कर धामी कुछ सफल होते दिख रहे है। प्रधानमंत्री के विकास कार्यक्रमो को आगे बढ़ाने के साथ साथ राज्य की बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी पुष्कर धामी के कंधों पर है। उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति केंद्र से छुपी नही है। प्रधानमंत्री से मुलाकात में मुख्यमंत्री ने जिन जिन बिंदुओं पर चर्चा की है वह राज्य के समग्र विकास की दिशा में बेहद कारगर साबित हो सकते है।
प्रधानमंत्री से हुई अब तक कि समस्त मुलाकातों से राज्य में पुष्कर धामी के राजनीतिक कद में तेजी से बढ़ोतरी की है।साथ ही राज्यवासियों के मन मे एक सकारात्मक छाप भी छोड़ी है। गुरुवार 23 जून की मुलाकात मात्र पार्टी ही नही अपितु नॉकरशाही के लिए भी एक स्पष्ट संकेत है जो कि शुरूआत से ही राजनीतिक खेमो में बटी हुई नजर आती रही है। मुख्यमंत्री युवा है और प्रधानमंत्री की रणनीति में युवा बेहद अहम भूमिका में है यह उनके मंत्रिमंडल से भी पता चलता है। पुष्कर धामी उत्तराखंड के भविष्य के सशक्त प्रहरी साबित ही है।
