सीएम को अपनों से भी रहना होगा एलर्ट

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देहरादून(संवाददाता)। फिल्मी पर्दे पर 1954 में आई हिन्दी फिल्म आर-पार में एक गीत फिलमाया गया था कि ”बाबू जी धीरे चलना प्यार में जरा संभलना बडे धोखे हैं इस राह मेंÓÓ। वहीं उत्तराखण्ड की मौजूदा राजनीति में जिस तरह से उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा के उपचुनाव में उनके ही कुछ अपनों ने भीतरघात का एक बडा खेल खेलते हुए उन्हें चुनाव हरवाया लेकिन पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान द्वारा दुबारा मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें जिस तरह से चम्पावत में उपचुनाव लडवाया गया जहां उनकी एतिहासिक जीत आज उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में भले ही डंका बज रहा हो लेकिन धामी की इस जीत के बाद उत्तराखण्ड के गलियारों में यह गीत भी गुनगुनाया जा रहा है कि ”बाबू जी जरा संभलना, बडे धोखे हैं इस राह मेंÓÓ। कांग्रेस की चुनौती और चंद अपनों से सीएम पुष्कर सिंह धामी को एलर्ट रहना होगा क्योंकि उत्तराखण्ड में भाजपा के चंद ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं जिनकी कुर्सी उनके अपनों ने ही एक बडा खेल खेलते हुए छीन ली थी?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत के उपचुनाव में चुनावी रणभूमि में जमकर छक्के-चौक्कों की बरसात कर कांग्रेस को पस्त कर दिया जिससे सवाल उठने शुरू हो गये हैं कि क्या हाशिये पर चली गई कांग्रेस भविष्य में उत्तराखण्ड के अन्दर होने वाले 2०23 में निकाय और पंचायत चुनाव के साथ 2०24 के लोकसभा चुनाव में कोई करिश्मा कर पायेगी जिसके उम्मीदवार की चम्पावत में जमानत तक जब्त हो गई? कांग्रेस भले ही अपनी हार का ठिकरा सरकार और सिस्टम पर फोडने के लिए आगे आई हो लेकिन चम्पावत में उसका वजूद शून्य ही था इसमें कोई शक की बात नहीं? अब सवाल उठता है कि पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत की धरती पर जो धुंआधार बैटिंग की उसके बाद वह राज्य हित में कौन-कौन से बडे फैसले जनता के दिलों को जितने के लिए लेंगे जिस पर सबकी नजरें लगी हुई हैं क्योंकि सरकार की छवि तभी समूचे उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में अच्छी बनेगी जब राज्य के मुख्यमंत्री उत्तराखण्डवासियों के दिलों में बसने के लिए ऐसे फैसले लेंगे जिससे हर इंसान उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पर गर्व कर सके। चम्पावत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 93 प्रतिशत वोट लेकर कांग्रेस को राजनीतिक पिच पर पस्त कर दिया हो और चम्पावत मे अपनी एतिहासिक जीत दर्ज की हो लेकिन बीजेपी में भी ‘कुछ नेताÓ ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीत से जरूर सदमें में है? सीएम के सामने कदम-कदम पर जो चुनौती आयेगी वो अपने ही दिल के कुछ लोग पैदा करेंगे और उन्हें फेल साबित करने की फिर साजिशें भी होंगी इसमें कोई शंका नजर नहीं आती? उत्तराखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी जब सत्ता पर काबिज थे तो कुछ अपनों के ही बुने जाल में वह फंस गये और उनके हाथों से सत्ता फिसल गई थी इतना ही नहीं भाजपा के अन्दर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेन्द्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत जब मुख्यमंत्री पद से हटे तो यही सवाल उभरा था कि यह सब राजनेता अंदरूनी जंग के कारण हटे और इनको चुनौती अपने दल के अन्दर से ही मिली थी? चूंकि पुष्कर सिंह धामी हार की बाजी पलटकर अब सिकंदर बनकर उभरे हैं ऐसे में उनके आने वाले छह माह बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। मुख्यमंत्री की छवि व प्रदेश की छवि उनके द्वारा लिये जाने वाले फैसलों पर टिकी हुई है। इन शुरूआती छह माह में सीएम धामी बेहतर फैसले लेते हैं तो इससे पार्टी की छवि तो उज्जवल होगी ही साथ ही कांग्रेस व पार्टी के अन्दर विरोधी गुट भी कमजोर होगा?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए माफियाराज और दलालों के गिरोह पर बडा प्रहार करने की भी एक बडी चुनौती है और उन्हें अपने दूसरे कार्यकाल में दलालों के नटवर्क को चिन्हित कर उनसे दूरी बनाकर चलना होगा क्योंकि इन्हीं दलालों की सत्ता के गलियारों में सक्रियता के कारण कुछ मुख्यमंत्रियों की समय से पहले ही विदाई हो गई? चूंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवा हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उन पर बहुत भरोसा है ऐसे में मुख्यमंत्री को अपने सचिवालय में ऐसे अफसरों की तैनाती करनी होगी जिनके साथ भविष्य में कोई विवाद न जुडा हो। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जिस तरह से चुनाव हारने के बाद भी नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान ने दुबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी थी उससे भाजपा के ही कुछ नेता सदमें में हैं और चंद राजनेताओं के साथ मीडिया का एक ऐसा ग्रुप भी पर्दे के पीछे से जुडा हुआ है जो पुष्कर सिंह धामी को अपने गुप्त निशाने पर लेने से पीछे नहीं हटेगा अगर उनके चंद आका उन्हें कोई भी मिशन सौंपेंगे? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरूआती दौर में ही भ्रष्टाचार पर बडा प्रहार करने का हुकम जारी कर रखा है और उन्होंने माफिया तंत्र को भी सीधी चुनौती दी है कि उनके राज में माफियाओं पर बडा प्रहार किया जायेगा ऐसे में अब उत्तराखण्ड की घातक होती जा रही राजनीति को देखते हुए यही गीत समझ में आ रहा है कि ”बाबू जी जरा संभलना….बडे धोखे हैं इस राह मेंÓÓ।

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