प्रमुख संवाददाता
चम्पावत। उत्तराखण्ड को पुष्कर धामी जैसा मुख्यमंत्री मिला तो समूचे राज्य को एक बल मिल रहा है कि इच्छा शक्ति से सत्ता चलाने वाले पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने तक चैन से नहीं बैठेंगे। उपचुनाव में मात्र दो दिन का समय रह गया है लेकिन चम्पावत की जनता एक ही संदेश दे रही है कि राज्य का मुख्य सेवक उनके इलाके का भाग्य विधाता है और इक्कीस सालों से चम्पावत में जो विकास का इंजन लोकल ट्रेन की तरह दौड रहा था वह इंजन अब बुलट ट्रेन की तरह चम्पावत में दौडेगा और जल्द ही एक नया चम्पावत उन्हें देखने को मिलेगा। उपचुनाव सिर्फ यही मायने रखता है कि पुष्कर सिंह धामी को चम्पावत में कितनी बडी जीत हासिल होगी क्योंकि पुष्कर सिहं धामी ने जिस तरह से बार-बार आवाम को यही संदेश दिया कि चम्पावत का भाग्य उदय करने के लिए 31 मई को हर घर से मतदाता पोलिंग बूथ पर पहुंचकर कमल का बटन दबाये और जब तीन जून को ईवीएम को खोला जाये तो उसमें सिर्फ कमल की लडियां ही लडियां नजर आयें। मुख्य सेवक के रूप में धाकड काम कर रहे पुष्कर सिंह धामी से चम्पावत की जनता बेहद खुश और आश्वस्त है कि वह ऐसे नेता हैं जो वायदा वो आवाम से करते हैं उसे पूरा करने में वह तिनकाभर भी देर नहीं लगाते और यही कारण है कि 31 मई को 151 पोलिंग बूथों पर कमल ही कमल खिलेगा ऐसी आशा समूचे राज्य को लगी हुई है।
उत्तराखण्ड के अन्दर किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि छह माह के लिए जिस युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी थी वह अपने चमत्कारी अंदाज से राज्यवासियों का दिल जीतकर राज्य में इक्कीस साल से सत्ता वापसी को लेकर चले आ रहे मिथक को वह तोड देंगे। पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही साफ संदेश दिया कि वह मुख्य सेवक के रूप में राज्यवासियों की सेवा करेंगे और वह राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री बनने के दौरान न तो आवाम को अपने मुख्यमंत्री होने का अंहकार दिखाया और न ही किसी गरीब इंसान को अपने मुख्यमंत्री दरबार में प्रवेश करने से रोका। पुष्कर सिंह धामी की सरलता और सौम्यता ने ही राज्यवासियों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मुरीद बना दिया और उन्होंने चुनाव के दौरान राज्यवासियों से वायदा किया उसे पूरा करने के लिए वह आगे बढते चले गये। मुख्य सेवक ने मात्र दस माह के भीतर ही अपने आपको राजनीति का इतना बडा महानायक आवाम की नजरों में बना दिया कि राज्य के कई जिलों से यही आवाज सुनने को मिल रही है कि जिस सरलता के साथ पुष्कर सिंह धामी सत्ता चला रहे हैं उसे देखते हुए तो कांग्रेस उत्तराखण्ड में बीस साल तक भी सरकार नहीं बना पायेगी? उत्तराखण्ड के अन्दर यह बहस भी चल रही है कि खटीमा का कितना बडा दुर्भाग्य है कि उसने उत्तराखण्ड को एक आदर्श राज्य बनाने की सोच रखने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चुनाव में हरवा दिया? चम्पावत में उपचुनाव होना है और इस उपचुनाव का परिणाम राज्य की जनता को पहले दिन से ही पता है कि पुष्कर सिंह धामी चम्पावत में एकतरफा चुनाव जितेंगे लेकिन इसके बावजूद भी कांग्रेस के कुछ बडबोले नेता दम भरते रहे कि पुष्कर सिंह धामी को खटीमा की तरह चम्पावत में भी हराया जायेगा। ऐसे नेताओं को चम्पावत की जनता खुलकर आईना दिखा रही है और उसका साफ मानना है कि समूचा चम्पावत पोलिंग बूथों पर मतदान करने के लिए घर से निकलेगा और उसने संकल्प ले रखा है कि पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड के इतिहास में हुई सभी जीतों का रिकार्ड तोडकर उन्हें चम्पावत में एतिहासिक जीत का ताज पहनाया जायेगा। वहां का आवाम सिर्फ एक ही संदेश दे रहा है कि पुष्कर सिंह धामी चम्पावत का भाग्य विधाता है।
