सरकार को यात्रा काल में बदनाम करने का खेल?

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक दयावान की भूमिका में राज्य को आगे बढाने के मिशन में लगे हुये हैं और जिस तरह से उन्होंने अपनी सरलता और मधुरता से हर इंसान का दिल जितने का काम किया है उससे पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड ही नहीं देश-विदेश में राजनेता के रूप में एक बडे महानायक बन चुके है। पुष्कर सिंह धामी एक धाकड मुख्यमंत्री बनकर चारधाम यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने की दिशा में रात-दिन एक किये हुये हैं और उनके संकल्प पर विश्वास करते हुए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जिस तरह से उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा में उमड आये हैं यह पुष्कर सिंह धामी की ही एक बडी देन मानी जा रही है। हैरानी वाली बात है कि इतनी बडी यात्रा को खुद मुख्यमंत्री सफल बनाने की दिशा में अपनी किचन टीम के साथ पल-पल नजर रखे हुये हैं लेकिन कुछ बेशर्म मीडिया ऐसी है जिसे केदारनाथ में विकट परिस्थितियों में ढाबा चलाने वालों की बीस रूपये की चाय और तीस रूपये की रोटी ऐसे खल रही है मानो केदारनाथ में व्यापारी किस तरह से श्रद्धालु के साथ लूट-खसोट कर रहा हो? उत्तराखण्ड के अन्दर ऐसी बेशर्म मीडिया को लोग अपने निशाने पर ले रहे हैं और यह कह रहे हैं कि सिनेमा हॉल में पॉपकॉन का डिब्बा 18० रूपये में तो किसी को महंगा नजर नहीं आता लेकिन केदारनाथ की ऊंची चोटी पर खाना परोसने वालों की तीस रूपये की रोटी मीडिया को क्यों खल रही है यह हैरान करने वाली बात है? गजब की बात है कि कुछ श्रद्धालुओं की हृदय गति रूकने से मौत हुई लेकिन चंद मीडिया उसके लिए भी सरकार को ही कटघरे में खडा कर रही है जबकि मुख्यमंत्री श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी हर सुविधा का रात-दिन ध्यान रख रहा है उस मुख्यमंत्री को बेशर्म मीडिया आखिर किसके इशारों पर बदनाम कर रही है यह समझ से परे है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में एक खबर प्रकाशित हुई है जिसमें यह कहा गया है कि चार धाम यात्रा में तीस रूपये की रोटी मिल रही है जो कि बहुत महंगी है। यानी चार धाम यात्रा में लूट मची है। ऐसी मीडिया को लोग आईना दिखा रहे हैं कि ऐसी मीडिया शायद शॉपिंग मॉल और सिनेमाघरों में नहीं गए जहां चंद तोला पॉपकॉर्न 18० रूपये में मिलता है एक पानी की बोतल भी पचास रूपये में मिलती है , और उन रेस्टोरेंट में जिन रेस्टोरेंट में बैठकर या मुफ्त में कॉफी या चाय तोड़ते हैं एक चाय सत्तर रूपये और एक सौ बीस रूपये की मिलती है। अब ऐसे पत्रकारों को भला यह कहां पता चलता है कि जिस रेस्टोरेंट में वह दलाल के हाथों मुफ्त की चाय तोड़ रहे हैं वह सत्तर से लेकर एक सौ बीस रूपये तक की है? आज कमर्शियल गैस सिलेंडर का भाव चौबीस सौ रुपये तक जा पहुंचा है मतलब करीब सवा सौ रुपये प्रति किलो के आसपास। ऊपर से चार धाम यात्रा में जो पैदल मार्ग हैं उस पर उनका खच्चर या कुली से ढुलान के अलग पैसे लगते हैं। तो एक सिलेंडर कोई दस बीस रुपये में तो नहीं ढोयेगा। करीब दो सौ से ढाई सौ प्रति सिलेंडर खर्च ऊपर से आता है। ऊपर से वहां का तापमान सामान्य से कम होने की वजह से एक रोटी बनाने में लगने वाली गैस डेढ़ गुना खर्च होती है। तो अगर पूरी लागत को मिला दिया जाए तो एक रोटी चालीस रूपये से कम की नहीं पड़ती। मगर मीडिया के कुछ लोग जिन्हें वाणिज्यिक समझ कम है या कहें कि भोले बाबा के दर्शनों को आने वाले लोगों को देख पाने की खुशी में चालीस रुपये की रोटी तीस रुपये में दे रहे हैं और पेट में उसके दर्द हो रहा है जिसने आज तक कभी चाय भी अपने पैसों की नहीं पी है।
अजीब विडंबना है कि तीन साल से हाशिए पर चल रहे पर्यटन को जब सहारा और दिशा देने की जरूरत है, तब कुछ पत्रकार उत्तराखण्ड के पर्यटन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखण्ड विकास पार्टी ऐसी कोशिशों का विरोध करती है और भाजपा सरकार से मांग करती है कि तमाम परिस्थितियों के मद्देनजर एक रोटी की कीमत पचास रुपये रखी जानी चाहिए। पन्द्रह बीस लाख से लेकर एक करोड़ की एसयूवी में आने वाले लोग एक रेस्टोरेंट में बैठ दस पन्द्रह हजार का खाना खा जाने वाले लोग इस समय चार धाम यात्रा पर आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार चारधाम यात्रा में ऐसी कौन सी लूट खसोट मच रही है जिसके चलते मीडिया के कुछ लोग पुष्कर सरकार को देश भर में बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

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