उत्तराखण्ड में सफेद जहर का साया!

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य को आदर्श बनाने की दिशा में रात-दिन एक किये हुये हैं लेकिन सरकारी सिस्टम उनके सपनों पर एक बडा ग्रहण लगाता हुआ दिखाई दे रहा है? उत्तराखण्ड की अधिकांश सीमाओं के अन्दर जिस तरह से सिंथेटिक दूध और पनीर की बडे पैमाने पर सप्लाई हो रही है उससे यह सफेद जहर आवाम के लिए घातक होता जा रहा है और यह सवाल भी सिस्टम पर खडे होने शुरू हो गये हें कि खाद्यय आपूर्ति विभाग सिर्फ दिखावे के लिए कार्यवाही करने के लिए कभी-कभी आगे आता है लेकिन सफेद जहर बेचने वालों पर सरकारी सिस्टम गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने के लिए क्यों आगे नहीं आता यह उसकी मंशा पर बडे सवाल खडे कर रहा है? हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड के अन्दर जितनी भी भयकंर बीमारियां हो रही हैं उसके पीछे मिलावटी खाद्यय पदार्थों व कास्मेटिक चीजों का इस्तेमाल होना बताया जा रहा है ऐसे में अब राज्य के प्रबुद्ध लोग मीडिया के सहारे सीएम से अपील कर रहे हैं कि सीएम साहब उत्तराखण्ड को बचा लो क्योंकि जब उत्तराखण्ड बचेगा तभी तो वह आदर्श राज्य बनेगा?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बडे विजन के तहत प्रदेश को खुशहाल और विकास की राह पर ले जाने के लिए अपनी किचन टीम के साथ आगे बढते हुये नजर आ रहे हैं लेकिन कुछ जिलों का प्रशासन मुख्यमंत्री के सपनों पर ग्रहण लगा रहा है? गजब बात यह है कि उत्तराखण्ड के अधिकांश जिलों में दूध का उत्पादन कम और मांग अधिक होने के चलते सिंथेटिक दूध का कारोबार सिस्टम के घृतराष्ट्र बनने के चलते खूब फल-फूल रहा है? शायद यही वजह है कि बाजार में कभी दूध की कमी दिखाई ही नहीं देती। उत्तराखण्ड के बाहरी इलाकों से राज्य की अधिकांश सीमाओं से सिंथेटिक दूध, पनीर व मावा आ रहा है और स्वास्थ्य महकमा हमेशा खामोशी के साथ बैठा हुआ दिखाई दे रहा है और यदा-कदा ही बाहर से उत्तराखण्ड की सीमा के अन्दर आने वाले सिंथेटिक पनीर व दूध को नष्ट कर विभाग के लोग अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं जबकि यह सफेद जहर उत्तराखण्ड वासियों के जीवन के साथ एक बडा खिलवाड माना जा रहा है?
राजधानी के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने अपील की कि सीएम साहब को संदेश दिया जाये कि उत्तराखण्ड की सभी सीमाओं पर मुस्तकिल सपैलिंग व टेस्टिंग की कार्यवाही हो और नकली व मिलावटखोरो के विरूद्व मुकदमें दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाये। अगर सरकार इस मिलावटखोरी और नकली दूध मिठाई को रोकने में कामयाब हो जाती है तो यह सरकार की सबसे बडी उपलब्धि होगी। अब देखने वाली बात है कि उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री क्या सफेद जहर बेचने वालों पर बडा शिकंजा कसने के लिए सिस्टम को अल्टीमेटम देंगे?

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