भाजपा की दावा: उपचुनाव में धामी रचेंगे बडा इतिहास

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के अन्दर भले ही कांग्रेस का वजूद धडाम होता जा रहा हो लेकिन उसके बावजूद भी कांग्रेस के कुछ नेता दम भर रहे हैं कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चम्पावत में वह खटीमा में हुये चुनाव की तरह हरायेंगे। कांग्रेस के इस दावे पर भाजपा के कुछ नेताओं ने दहाड लगाई है कि कांग्रेस अपना घर तो सुरक्षित रख नहीं पा रही और वह मुख्यमंत्री को चुनाव हराने का सपना देख रही है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को पैगाम दिया है कि चम्पावत में होने वाले उपचुनाव में उत्तराखण्ड के लख्ते जिगर बन चुके पुष्कर सिंह धामी जीत का एक बडा इतिहास रचेंगे। भाजपा ने जहां चम्पावत की रणभूमि में जंग लडने का पूरा प्लान तैयार कर उस पर काम करना शुरू कर रखा है वहीं खुली आंखों से सपना देखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चम्पावत में चुनाव हराने वाले कांग्रेस नेता अभी तक अपने प्रत्याशी का चयन भी नहीं कर पाये हैं कि कौन पुष्कर सिंह धामी के सामने चुनाव लडने का साहस दिखायेगा। चम्पावत की अधिकांश जनता तो यहां तक कहने से नहीं चूक रही कि कांग्रेस को तो चम्पावत उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने किसी प्रत्याशी को खडा ही नहीं करना चाहिए और मुख्यमंत्री को निर्विरोध विधायक बना देना चाहिए जिससे पांच साल उत्तराखण्ड एक बडे विकास की ओर दौड सके?
उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा व कांग्रेस आमने-सामने दिखाई देते थे और जहां कांग्रेस के अधिकांश नेता राज्य में कांग्रेस की सरकार आने का दम भरते थे वहीं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव से पूर्व ही एक बडे विश्वास के साथ राज्य की जनता को संदेश देते रहे कि उत्तराखण्ड की जनता बाइस साल से चले आ रहे सभी मिथक तोडकर एक बार फिर राज्य के अन्दर कमल खिलायेगी। पुष्कर सिंह धामी का यह विश्वास चुनाव परिणाम आने के बाद सच साबित हुआ और भाजपा 47 सीटें जीतकर एक बार फिर राज्य के अन्दर सरकार बनाने में कामयाब हो गई। हालांकि भाजपा को सत्ता में लाने वाले राजनीति के महानायक बन चुके पुष्कर सिंह धामी को कुछ अपनों ने ही भीतरघात कर उन्हें चुनावी संग्राम में यह सोचकर हरवा दिया कि उनके हारने के बाद राज्य में मुख्यमंत्री की कमान उनके हाथों से फिसल जायेगी? हालांकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर भाजपा हाईकमान जेपी नड्डा ने ऐसे नेताओं के सपने तार-तार कर दिये थे और एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपकर उन्हें राज्य के विकास के पहिये को आगे बढाने का विजन सौंप दिया था। पुष्कर ंिसह धामी के लिए चम्पावत के पूर्व विधायक कैलाश गहतोडी ने अपनी विधानसभा सीट त्याग दी और पुष्कर ंिसह धामी को चुनावी रणभूमि में उतारकर वह चम्पावत में होने वाले उपचुनाव में पुष्कर सिंह धामी के सारथी बनकर आवाम के बीच जा रहे हैं। चम्पावत में चप्पे-चप्पे पर जहां पुष्कर धामी-पुष्कर धामी का शोर मचा हुआ है वहीं कांग्रेस के चंद नेता यह कहने से नहीं चूक रहे कि खटीमा की तरह चम्पावत में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हार का सामना करना पडेगा। कांग्रेस के चंद नेताओं के इस बयान पर भाजपा के कुछ नेता यहां तक दहाड लगा रहे हैं कि जो कांग्रेस अपने कुनबे को सुरक्षित नहीं रख पा रही है और राज्य की जनता ने एक बार फिर कांग्रेस को पांच साल का वनवास दे दिया है तो भी उसके कुछ नेता अपने बडबोले बयान देकर अपने आपको मीडिया की सुर्खियों में रखने की कोशिश कर रहे हैं जबकि चम्पावत में होने वाले उपचुनाव में उत्तराखण्ड के लख्ते जिगर बन चुके पुष्कर सिंह धामी आज तक के हुये उपचुनाव में सबसे बडी जीत हासिल कर कांग्रेस को आईना दिखायेंगे? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कांग्रेसी नेताओं के वार पर खामोश हैं और वह राज्य के अन्दर जिस तरह से विकास को अपना धर्म मानकर आगे बढते जा रहे हैं उससे उत्तराखण्ड में लम्बे समय तक कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो पायेगी यह एक बडा सोचनीय विषय बन चुका है?

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