श्रम विभाग में हुये घोटाले की सीबीआई से कराई जाये जांच

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार पर प्रहार के लिए खुला ऐलान किया और साफ कहा कि राज्य में चाहे कोई भी कितना बडा क्यों न हो अगर उसने कोई भ्रष्टाचार या घोटाला किया है तो उसके खिलाफ जांच कराकर उस पर सख्त कार्यवाही की जायेगी। वहीं भाजपा में कैबिनेट मंत्री की कुर्सी पर लगभग साढे चार साल तक राज करने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के श्रम विभाग में हुये घोटाले की सीबीआई जांच को लेकर जहां लैंसडॉऊन के विधायक महंत दलीप रावत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था वहीं अब जनसंघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का भी कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री जो कि भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं उन्हें श्रम विभाग में हुये करोडो रूपये घोटाले की जांच आईआईटी से न कराकर सीबीआई से कराने के लिए आगे आना चाहिए जिससे उत्तराखण्ड की जनता को साफ पता चल सके कि श्रम विभाग में मंत्री की नाक के नीेचे कितना बडा घोटाला चलता रहा। अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि हरक सिंह रावत के परिवार की शंकरपुर में एक सौ सात बीघा भूमि की भी सीबीआई जांच कराई जाये क्योंकि बार-बार यह आरोप लगता रहा कि यह जमीन फर्जी पॉवर ऑफ एटोर्नी के जरिए हासिल की गई है। हरक सिंह रावत के खिलाफ जिस तरह से भाजपा के बाद अब जनसंघर्ष मोर्चा ने भी सीबीआई जांच कराने की मांग बुलंद की है उससे भविष्य में हरक सिंह रावत की मुश्किलें बढना तय माना जा रहा है?
उत्तराखण्ड में वर्षों तक अपने इकबाल से सभी राजनीतिक दलों को चौकाने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने जबसे भाजपा का दामन छोडकर कांग्र्रेस का साथ पकडा तबसे वह राज्यवासियों के निशाने पर आ रखे हैं? भाजपा शासनकाल में श्रम विभाग के मंत्री रहे हरक सिंह रावत के विभाग में हुये कथित करोडो रूपये के घोटाले को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रधुनाथ नेगी आवाज बुलंद करते रहे और वह लम्बे अर्से से हरक सिंह रावत के विभाग में हुये घोटाले की जांच कराने की दहाड लगाते दिखाई देते रहे लेकिन सरकार में शामिल होने के कारण हरक सिंह रावत के खिलाफ भाजपा शासनकाल में कोई जांच नहीं हो पाई। अब विधानसभा चुनाव के बाद लैंसडाऊन से भाजपा विधायक महंत दलीप रावत ने कुछ समय पूर्व राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर श्रम विभाग में हुयेे घोटाले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई थी।वहीं अब सरकार श्रम विभाग में साइकिल खरीद घोटाले की जांच एसआईटी से कराने का ऐलान किया है लेकिन जनसंघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रधुनाथ सिंह नेगी का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो उन्हें श्रम विभाग में सिर्फ साइकिल खरीद घोटाले की ही नहीं बल्कि मशीन, टूल किट्स, वैल्डिंग मशीन आदि तमाम घोटालों की जांच सीबीआई से करानी चाहिए क्योंकि यह घोटाला अस्सी से सौ करोड के बीच का माना जा रहा है और इतने बडे घोटाले की जांच एसआईटी से कराना नाकाफी है इसलिए इस मामले की जांच मुख्यमंत्री को सीबीआई से करानी चाहिए और अगर हरक सिंह रावत इसमें पाक-साफ हुये तो वह बच जायेंगे अगर उनका घोटाले में हाथ सामने आया तो उन्हें जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए। रधुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि हरक सिंह रावत पर वर्षों से सहसपुर, शंकरपुर में एक सौ सात बीघा भूमि की फर्जी पॉवर अटोर्नी कराने का आरोप लगता आ रहा है और यह भी आरोप लगता रहा है कि फर्जी पॉवर अटोर्नी हरक सिंह रावत के परिजन व करीबियों को की गई इसलिए इस मामले का सच सामने लाने के लिए मुख्यमंत्री को इस जमीन की भी सीबीआई जांच करानी चाहिए जिससे राज्य के अन्दर वर्षों से इस जमीन को लेकर चला आ रहा विवाद भी खत्म हो सके।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी बहू के साथ कांग्रेस में शामिल हुये हरक सिंह रावत की भाजपा में रहते हुए उनके मंत्रालयों में हुये कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच भाजपा सरकार द्वारा बिठा दी गई है? टाइगर सफारी के नाम पर कालागढ़ टाइगर रिजर्व में बडे पैमाने पर हुये अवैध निर्माण व पेडों के पातन की जांच अभी चल ही रही थी कि मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग में करोडो के साइकिल घोटाले और उत्तराखण्ड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में नियम विरूद्व हुई नियुक्तियों और दूसरे घोटालों की जांच भी बिठा दी है?
उत्तराखण्ड की राजनीति में कभी सबसे अधिक चर्चाओं में रहने वाले हरक सिंह रावत का अचानक इस कदर गुमनाम हो जाना उनके राजनीतिक भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा रहा है और अब जिस तरह से भाजपा के विधायक के बाद जनसंघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने हरक सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है उस पर सबकी नजरें अब मुख्यमंत्री के अगले कदम पर जा टिकी हैं कि क्या वह राज्य में उठ रही हरक के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को हरी झंडी देंगे या फिर एसआईटी से ही इसकी जांच कराई जायेगी।

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