विधायकों का साथ मिलने का कौन पीट रहा ढोल?
भाजपा मंे हाईकमान ही तय करता अपनी पसंद
जीत के असली हीरो तो पुष्कर ही हैं ‘जनाब’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूर्व में जब उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार दस्तक दी थी तो कांग्रेस से भाजपा मंे आये एक दो मंत्रियों ने बैठक में अमित शाह को यह कहने का दुसाहस कर दिया था कि वह पूर्व मुख्यमंत्री की कार्यशैली से नाराज हैं जिस पर अमित शाह ने इन पूर्व मंत्रियों को साफ संदेश दिया था कि अगर उनके अन्दर विधानसभा चुनाव जीतने की कुवत है तो वह भाजपा छोडकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मंे चुनाव जीतकर दिखा दें। अमित शाह के दरबार में अगर किसी भी राज्य के विधायक यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि वह एकसाथ हैं और उनकी पसंद का मुख्यमंत्री बनाया जाये तो ऐसे बगावती तेवर दिखाने वाले विधायकों पर हमेशा शाह का डंडा चलता रहा है। उत्तराखण्ड मंे पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर चुनाव जीतने वाले विधायकों में से चंद विधायक दिल्ली में भाजपा के कुछ नेताओं के सामने अपने आपको राज्य का सबसे पॉवरफुल राजनेता बताकर खुद मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब देख रहे हैं और चर्चा है कि जब आज अमित शाह के घर पर उत्तराखण्ड भाजपा के दिग्गज नेताओं की बैठक हुई तो एक विधायक का पीए मीडिया को यह बताने की कोशिश में जुट गया कि उनके नेता जी के साथ बहुत विधायक हैं? अमित शाह के दरबार में अगर कोई भी यह साबित करने की कोशिश करता है कि उसके साथ कुछ विधायक हैं और वह मुख्यमंत्री के काबिल हैं तो अमित शाह की नाराजगी ऐसे नेताओं पर खुलकर होती है यही कारण है कि भाजपा में भाजपा हाईकमान और अमित शाह के फैसलों का बडे से बडा राजनेता भी विरोध करने का दुसाहस नहीं कर पाता? भाजपा में पार्टी का हाईकमान ही हमेशा अपनी पसंद के राजनेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन करता है क्योंकि इसके पीछे देश के प्रधानमंत्री की छवि बडे मायने रखती है और यही कारण है कि भाजपा हाईकमान ने मात्र छह माह के लिए स्वच्छ छवि के पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें सत्ता में वापसी का मिशन सौंपा था।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के अन्दर अनुशासन सबसे बडा माना जाता है लेकिन देखने में आ रहा है कि जब भी राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार बनी तो पार्टी के आधा दर्जन से अधिक विधायक उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक मुख्यमंत्री बनने की दौड मंे जुटे रहे और वह पर्दे के पीछे से कुछ मीडियाकर्मियों को अपनी ढाल बनाकर उनसे अपना भौकाल बनवाने का खेल खेलते आ रहे हैं। उत्तराखण्ड में भाजपा हाईकमान की पसंद का ही हमेशा मुख्यमंत्री बनते रहे हैं और पार्टी में अगर किसी ने भी खुद मुख्यमंत्री बनने के लिए बगावत का रास्ता चुनने का दुसाहस किया तो भाजपा हाईकमान व केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें आईना दिखा दिया कि कोई भी विधायक पार्टी ये बडा नहीं है और किसी ने भी पार्टी हाईकमान के फैसले के खिलाफ अपनी राह चुनी तो उसे भाजपा हाईकमान सबक सिखाने से भी पीछे नहीं हटता। उत्तराखण्ड में युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी ने मात्र छह माह के भीतर बीस साल से चले आ रहे सभी मिथक को तोडते हुए राज्य में एक बार फिर भाजपा का परचम लहरा दिया लेकिन खुद मुख्यमंत्री बनने की लालसा में लगे कुछ भाजपा नेताओं ने राज्य की कुछ अफसरशाही के साथ मिलकर उत्तराखण्ड के अन्दर धाकड राजनीतिक पारी खेलने वाले पुष्कर सिंह धामी चुनाव हरवा दिया और आधा दर्जन विधायक खुद मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में आगे बढ़ने लगे। भाजपा हाईकमान को इस बात का इल्म है कि उत्तराखण्ड के अन्दर सत्ता में वापसी का रियल हीरो कौन है? पुष्कर सिंह धामी सौम्य और नम्रता के साथ खटीमा की जनता का अभिवादन कर रहे हैं कि उनका जो भी आदेश था वह उनके सर-माथे है लेकिन उन्होंने भाजपा को जो जीत के पायदान पर लाकर खडा किया उसको लेकर भाजपा के अधिकांश सांसद व विधायक भी पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री पद पर एक बार फिर देखना चाह रहे हैं। गजब की बात तो यह है कि इसके बावजूद भी एक-दो विधायक ऐसे हैं जो खुद को मुख्यमंत्री बनाये जाने के लिए पर्दे के पीछे से कुछ विधायकों के साथ लॉबिंग करने का खेल खेल रहे हैं लेकिन उन्हें इस बात का इल्म नहीं है कि अमित शाह के दरबार में अपने आपको पॉवरफुल नेता समझने वाला कोई भी विधायक गृहमंत्री के फैसले का विरोध नहीं कर सकता क्योंकि ऐसा करने वाले को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में भाजपा हाईकमान व अमित शाह तिनकाभर भी देर नहीं लगाते?
