प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में जब भी भाजपा की सरकार बनी तो उसके बाद कुछ सांसद से लेकर पार्टी के बडे-बडे राजनेता विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री की दौड़ में इतनी तेजी के साथ आगे दौडने लगते हैं जैसे उन्होंने उत्तराखण्ड के अन्दर भाजपा को सत्ता सुख देने का बडा रोल अदा किया हो। उत्तराखण्ड में पांच साल में से साढे चार साल तक सत्ता चलाने वाले दो पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल से राज्यवासी इतने नाराज थे कि वह भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने का पूरा मन बना चुके थे लेकिन आवाम का दिल पढने के बाद भाजपा हाईकमान ने युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को राज्य की कमान सौंपी और उन्हें प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की सत्ता लाने का टास्क दिया। पुष्कर सिंह धामी ने इस टास्क में पास होने के लिए रात-दिन एक कर दिया और विधानसभा चुनाव में उन विधायकों को भी जीत दिला दी जिनसे उनके इलाके की जनता बेहद नाराज थी। इतना ही नहीं पुष्कर सिंह धामी ने बीस साल से चले आ रहे सरकार वापसी के मिथक को भी अपनी सफल राजनीति से चूर-चूर कर दिया और खुद कुछ अपनों के ही भीतरघात के बोये बीज के चलते उन्हें अपने हार की फसल काटनी पड गई। पुष्कर सिंह धामी की हार का गम राज्यवासियों के मन में इस कदर उतर गया कि वह यह कहने से भी नहीं चूक रहे कि जिस पुष्कर सिंह धामी ने मात्र छह माह के भीतर उत्तराखण्ड में भाजपा की सरकार बना दी उन्हें ही राज्य के मुख्यमंत्री का ताज पहनाना चाहिए क्योंकि यह जीत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी की भी है। अब सबकी नजरें भाजपा हाईकमान पर हैं कि वह उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी पर एक बार फिर एक बडा विश्वास जताते हुए उन्हें एक बार फिर सत्ता की कमान सौंपेंगे जिन्हें राज्यवासियों ने एक बार फिर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाये जाने का सपना देख रखा है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी का भाजपा के अन्दर इतना बडा वजूद हो गया है कि जिसकी कल्पना भाजपा के बडे-बडे राजनेताओं ने भी नहीं की थी। उत्तराखण्ड में सत्ता चला चुके भाजपा के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री की कार्यशैली को लेकर उन्हें राज्य की जनता दिल में नहीं बिठा पाई लेकिन मात्र छह माह के भीतर सत्ता चलाने वाले खटीमा के पूर्व विधायक पुष्कर ंिसह धामी व कार्यवाहक मुख्यमंत्री ने सत्ता चलाने का जो पैमाना बनाया था उसने राज्यवासियों का दिल जीतकर रख दिया। पुष्कर सिंह धामी ने सबसे पहले अपना सरकारी द्वार सबके लिए खोला और अपने कार्यालय में दलालों की एंट्री पर सख्ती के साथ प्रतिबंध लगाया गया और उनके साथ चंद अफसरों की ईमानदार टीम के चलते राज्य के अन्दर जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी पारदर्शिता व स्वच्छता के साथ सरकार चलाते रहे वह किसी से छिपा नहीं है। मात्र छह माह के भीतर पुष्कर ंिसह धामी का गढवाल व कुमांऊ में बढता ग्राफ कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को हमेशा सताता रहा और यही कारण रहा कि हरीश रावत पुष्कर सिंह धामी को खनन प्रेमी मुख्यमंत्री कहकर उन्हें कटघरे में खडा करते रहे लेकिन वह राज्यवासियों के सामने ऐसा कोई प्रमाण नहीं दे पाये जिससे कि यह लगता कि पुष्कर सिंह धामी वास्तव में खनन प्रेमी मुख्यमंत्री हैं। पुष्कर सिंह धामी पर हरीश रावत का बार-बार आरोपों की झडी लगाना आवाम के मन में हरीश रावत को लेकर एक बडी नफरत पैदा करने लगा। हरीश रावत बडे-बडे दावे कर रहे थे कि उत्तराखण्ड की जनता ने भाजपा को राज्य से बेदखल कर दिया है और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी और वह राज्य के मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश को बडे विजन पर आगे ले जायेंगे। हरीश रावत ने जिस तरह से कुमांऊ के खटीमा से आने वाले कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर बिना किसी प्रमाण के आरोप लगाये उससे लालकुंआ की जनता ने उन्हें अपने इलाके में स्वीकार करने से इंकार कर दिया और उन्हें जिस बडी हार का सामना करना पडा वह यह बताने के लिए काफी है कि हरीश रावत का पुष्कर सिंह धामी पर आरोपों की झडी लगाना लालकुंआ की जनता को भी रास नहीं आ रहा था और उन्होंने हरीश रावत को अपने इलाके में नकार दिया? उत्तराखण्ड में भाजपा को सत्ता दिलाने वाले पुष्कर सिंह धामी भले ही भीतरघात के चलते चुनाव हार गये लेकिन जिनके चेहरे पर चुनाव लडा गया और उन्होंने राज्य के अन्दर भाजपा की सरकार बना दी उसको देखते हुए राज्य की जनता के मन में बस एक ही उम्मीद बंधी हुई है कि कांटो भरा ताज पहनकर मात्र छह माह के भीतर भाजपा को सत्ता दिलाने वाले पुष्कर ंिसह धामी को भाजपा हाईकमान एक बार फिर उन्हें मुख्यमंत्री का ताज पहनाये?
