डीजीपी हैं पहाड़ विरोधी

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संवाददाता
देहरादून। विधायक के रूप में चुनकर आये देश के चर्चित पत्रकार ने सबसे पहले युवाओं के हकों के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी है। खानपुर विधायक उमेश कुमार ने कहा कि वर्तमान डीजीपी पहाड़ विरोधी और युवा विरोधी हैं और उन्हें सरकार जल्द से जल्द डीजीपी पद से हटाये और उन्हें न हटाये जाने तक वह सरकार से सवाल करते रहेंगे कि आखिरकार पहाड़ विरोधी डीजीपी को तैनात क्यों किया हुआ है? डीजीपी को पहाड़ विरोधी और युवा विरोधी बताने पर उमेश कुमार ने इसके पीछे उन्होंने कई कारण गिनाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आउटसोर्सिंग कम्पनियों के माध्यम से युवाओं का शोषण हो रहा है। गरीब मध्यम वर्गिय परिवारों के बच्चों को आउटसोर्सिंग कम्पनियां ठगने और लूटने का काम कर रही हैं।
विधायक उमेश कुमार ने कहा कि पूर्व में जब इस सम्बंध में उन्होंने डीजीपी अशोक कुमार को इन आउटसोर्सिंग कम्पनियों के खिलाफ तमाम सबूत दिए उसके बाबजूद उन्होंने आउटसोर्सिंग कम्पनियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जो साफ दर्शाता है कि इन भृष्ट कम्पनियों को संरक्षण दिया गया। आपको बता दें कि उमेश कुमार हमेशा ही युवाओं की आवाज उठाते रहे हैं। महिला एवं बाल कल्याण विभाग में आउटसोर्सिंग का काम करने वाली कम्पनी ए स्कवायर जिंसके द्वारा प्रदेश के युवाओं से नौकरी के नाम पर खुलेआम घूस मांगी जा रही थी जिसका स्टिंग भी उमेश कुमार ने जारी किया था साथ ही युवाओं से नौकरी के नाम पर अवैध वसूली के सारे दस्तावेज भी सार्वजनिक किए थे। इस मामले पर उन्होंने डीजीपी अशोक कुमार को सारे सबूत उपलब्ध करवाए थे लेकिन उस वक्त आउटसोर्सिंग कम्पनी के जिस युवा ने इन सुबूतों को इकठ्ठा करने में मदद की थी उसे ही नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। अब विधायक चुनकर आने के बाद उमेश कुमार युवाओं के शोषण के खिलाफ मुखर हो गए हैं और उन्होंने निशाने पर डीजीपी अशोक कुमार को इस वजह से लिया है क्योंकि डीजीपी को युवाओं के शोषण के तमाम सबूत देने के बाद भी डीजीपी ने आंखे बंद कर ली थी। उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में खानपुर विधानसभा सीट से विधायक बने उमेश कुमार लम्बे समय से बेरोजगार युवाओं के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं और इस संघर्ष के दौरान पूर्व सरकार में उन्हें डराने की भी साजिश रची गई थी और उन पर एक बार फिर फर्जी मुकदमा यह कहकर पुलिस के एक अधिकारी ने दर्ज कराने की साजिश रची थी कि उमेश कुमार युवाओं को सरकार के खिलाफ भडका रहे हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ ंिसह रावत ने पुलिस अधिकारी की इस दलील को एक सिरे से खारिज कर यह चेतावनी दी थी कि उनके शासनकाल मे ंकिसी पर भी फर्जी मुकदमा दर्ज नहीं किया जायेगा।
उत्तराखण्ड के अन्दर बार-बार सवाल खडे हुये कि आखिरकार जो उमेश कुमार बेरोजगार युवाओं की लडाई सडक पर निर्भिक होकर लडाई लड रहे हैं उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए आखिरकार पुलिस के एक अधिकारी ने किसकी शह पर साजिश रची थी? उत्तराखण्ड में दिलों पर राज करने वाले पत्रकार से विधायक बने उमेश कुमार का साफ कहना है कि राज्य की युवा पीढी के साथ जो भी अफसर धोखा और साजिश करने की कोशिश करेगा उसके खिलाफ वह सडक से लेकर विधानसभा तक में विरोध करेंगे और पहाड विरोधी किसी भी अफसर को बक्शा नहीं जायेगा।

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