जगन्नाथ प्रभु की विधिवत पूजा अर्चना

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कोमल ग्रोवर
देहरादून। श्री राम मंदिर दीप्लोक कॉलोनी में आचार्य शक्तिपुत्र पंडित सुभाष चंद्र शतपति के पावन सानिध्य में देव पूर्णिमा के पावन पर्व पर जगन्नाथ प्रभु की विधिवत पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर समस्त कार्यक्रम कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए सूक्ष्म व सादगी के साथ सीमित ब्राह्मणों व श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
इस अवसर आचार्य ने बताया कि 1०8 कलशों से स्नान किया गया। आचार्य ने अवगत करवाया कि आज प्रात: में मंदिर में विराजमान श्रीश्री जगन्नाथ प्रभु की पूजा अर्चना की गई और उनकी आरती की गई इसके पश्चात पहुंडी विज करवा कर उन्हें मंदिर हॉल में ही विराजमान सिहासन में विराजमान किया गया।
उन्होंने कहा कि इसके पश्चात समस्त तीर्थों के एकत्र जल के 1०8 मिट्टी के कलशो जिसमें चंदन, कपूर ,केसर ,शहद तुलसी दूध आदि मिलाकर जिसे अमृत जल कहते हैं उनसे प्रभु को स्नान ध्यान करवाया गया और जगन्नाथ प्रभु को 35 कलशों, के जल से, बलभद्र को 33 कलशों के जल से ,मां सुभद्रा को 22 कलशों के जल से, और सुदर्शन को 18 कलशों के जल से स्नान करवाकर उनकी पूजा-अर्चना की गई।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर गणपति स्वरूप में दर्शन दिये और भक्तों के आग्रह पर स्नान के पश्चात जब प्रभु के दर्शन होते हैं तो वह गणपति के स्वरूप में अपने दर्शन देते हैं और कहा कि अगले 14 दिन शयन कक्ष में विश्राम करेंगें और आचार्य ने अवगत करवाया की वैसे समस्त कार्यक्रम भक्तों की उपस्थिति में संपन्न होता है लेकिन क्रोना काल के कारण समस्त कार्य चार ब्राह्मणों द्वारा संपन्न करवाया गया।
उन्होंने यह भी अवगत करवाया की ऐसी मान्यता है कि स्नान के पश्चात प्रभु का स्वास्थ्य स्वस्थ हो जाता है और वह अपने कक्ष में आराम के लिए चले जाते हैं और कक्ष के द्वार अगले 14 दिनों के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं।
उन्होंने कहा कि जहां उनका उपचार होता है और जब 14 दिन के पश्चात वह भक्तों को अपने दर्शन देते हैं तो उन्हें नव यौवन दर्शन कहते हैं और इस अवसर पर शयन कक्ष में जाने से पूर्व सायंकाल में उनकी महाआरती हुई और इस अवसर पर शक्तिपुत्र पंडित सुभाष चंद्र शतपति, संजय गर्ग सहित सीमित के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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