करोडों के राजस्व पर ग्रहण और जांच को नहीं मिली हरी झंडी
सहायक अभियंता के पत्र से प्राधिकरण में ‘महासंग्राम’
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। कितनी हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो राज्य के मुखिया उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार करने वालों से आवाम को आजादी दिलाने के लिए बडा मोर्चा खोले हुये हैं और पांच साल के अन्दर उन्होंने जो जिस धाकड़ अंदाज में भ्रष्टाचारियों, रिश्वतखोरों और घोटालेबाजों पर नकेल लगाई है उससे उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री का राजनीतिक इकबाल बुलंद हुआ है। वहीं सरकार के मुखिया को चुनौती देते हुए टिहरी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के एक सहायक अभियंता दिग्विजय नाथ तिवारी के कृत्यों को उजागर करते हुए महकमे के ही एक सहायक अभियंता ने शासन के सचिव आवास, टिहरी डीएम और प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्राधिकरण को नक्शों की फाइलों में करोडो का नुकसान पहुंचाने की जो दास्तां बयां की है उससे एक बडा भूचाल मचा हुआ है और सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या कोई सहायक अभियंता इतना पॉवरफुल हो गया कि वह मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचारमुक्त उत्तराखण्ड के विजन को ही चुनौती देने के लिए कैसे आगे बढ़ गया जिसके चलते सरकार को करोडो के राजस्व की हानि हुई है। प्राधिकरण के सहायक अभियंता ने अपने ही महकमे में प्रतिनियुक्ति पर आये एक सहायक अभियंता के कुछ काले चिट्ठों को पत्र में उजागर किया है उसके बाद तिवारी के खिलाफ कोई भी जांच कर एक्शन लेने में शासन क्यों सहमा हुआ है यह हैरान कर रहा है। सवाल तैर रहे हैं कि करोडो के राजस्व में ग्रहण लगाने वाले सहायक अभियंता के खिलाफ जांच बिठाने में आखिर सरकार और शासन क्यों चुप्पी साधे हुये हैं जबकि महकमे के ही एक सहायक अभियंता ने अपने नाम से इस खेल को बेनकाब करने के लिए शासन-प्रशासन और अपने उपाध्यक्ष को सीधे पत्र लिखा है।