2027 के चुनाव से पहले स्टिंग का बम फोड़ने का बन रहा चक्रव्यूह

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कुख्यात स्टिंगबाज दो गुर्गों को सिखा रहा खुफिया कैमरे के गुर
नेताओं-अफसरों पर लग सकती है कैमरे की रडार
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने के साथ ही सत्ता के गलियारों में राजनीतिक बिसात बिछने लगी है, लेकिन इसी चुनावी हलचल के बीच राजधानी देहरादून से एक ऐसी सनसनीखेज कहानी सामने आ रही है, जिसने पर्दे के पीछे चल रहे कथित ‘स्टिंग के खेल’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड में पूर्व में स्टिंग करने को लेकर कुख्यात रहा एक स्टिंग मास्टर अब अकेले कैमरा लेकर शिकार की तलाश में निकलने के बजाय अपना पूरा गैंग तैयार करने में जुटा बताया जा रहा है। इस खेल की भनक उस समय लगी जब यह स्टिंग मास्टर देहरादून के गांधी पार्क के समीप स्थित एक कॉफी हाउस में अपने दो गुर्गों के साथ पहुंचा और बेफिक्र होकर उन्हें स्टिंग की ऐसी बारीकियां समझाने लगा, जिन्हें सुनकर साफ संकेत मिले कि मामला महज कैमरा चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी बड़े ऑपरेशन से पहले बाकायदा लोगों को तैयार करने की पटकथा लिखी जा रही है।
कॉफी हाउस में बैठे इस स्टिंग मास्टर को शायद जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस टेबल पर वह अपने दो गुर्गों को आने वाले खेल के गुर समझा रहा है, वहां उसकी बातचीत ऐसे कानों तक भी पहुंच रही है जो उसके पूरे नेटवर्क की कहानी बाहर ला सकते हैं। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान दोनों गुर्गों को सबसे पहले अपना रहन-सहन और स्टाइल बदलने की नसीहत दी गई। किस तरह कपड़े पहनने हैं, किस अंदाज में सामने वाले से मिलना है, किस तरह उसके करीब पहुंचना है और कैसे उसका विश्वास जीतना है इन तमाम बारीकियों के बाद बात सीधे स्टिंग में इस्तेमाल होने वाले खुफिया उपकरणों तक पहुंच गई। पेन, बटन, छल्ले और कैमरे सहित स्टिंग के तमाम सिस्टम का इस्तेमाल किस तरह करना है, सामने बैठे व्यक्ति को भनक लगे बिना उसकी बातचीत कैसे रिकॉर्ड करनी है और कैमरे को किस तरह इस्तेमाल करना है, इसकी जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। कॉफी हाउस की यह बातचीत इसलिए और ज्यादा विस्फोटक मानी जा रही है क्योंकि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं और ऐसे समय में एक कुख्यात स्टिंग मास्टर द्वारा अपने गुर्गों को इस तरह तैयार किए जाने से आशंका गहरा गई है कि आने वाले दिनों में प्रदेश के कुछ राजनेता और अफसर उसके कैमरे के निशाने पर हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि स्टिंग मास्टर पूर्व में भी अपने स्टिंग को लेकर कुख्यात रहा है, लेकिन इस बार कहानी इसलिए अलग दिखाई दे रही है क्योंकि कैमरे के पीछे केवल एक आदमी नहीं बल्कि बाकायदा एक नेटवर्क तैयार किए जाने की तस्वीर उभर रही है। यदि गुर्गों को रहन-सहन बदलकर अलग-अलग चेहरों के करीब पहुंचाया जाता है तो यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से किसी बड़े चेहरे को कैमरे में कैद करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
सबसे गंभीर सवाल स्टिंग के बाद शुरू होने वाले कथित खेल को लेकर है। आशंका है कि किसी राजनेता या अधिकारी की गोपनीय बातचीत कैमरे में कैद करने के बाद उसे चुनाव से पहले बड़े ‘धमाके’ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और उसी रिकॉर्डिंग को दबाव का हथियार बनाकर वसूली का रास्ता भी तैयार किया जा सकता है। यदि ऐसा है तो यह सिर्फ स्टिंग करने की तैयारी नहीं बल्कि पहले शिकार के करीब पहुंचने, उसका भरोसा जीतने, कैमरे में कैद करने और उसके बाद रिकॉर्डिंग को हथियार बनाने की पूरी पटकथा हो सकती है। चुनावी माहौल में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे अथवा अफसर का विवादित वीडियो सामने आने भर से सत्ता के गलियारों में भूचाल आ सकता है और यही वजह है कि गांधी पार्क के पास कॉफी हाउस में हुई यह कथित बातचीत बेहद गंभीर मानी जा रही है। अब सबसे बड़ा रहस्य उन चेहरों को लेकर है जिन्हें इस कथित स्टिंग नेटवर्क ने अपने रडार पर लिया है। क्या टारगेट पहले ही तय किए जा चुके हैं, क्या गुर्गों को अलग-अलग नेताओं और अधिकारियों तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी दी जा रही है और क्या 2027 के चुनाव से पहले एक के बाद एक स्टिंग सामने लाकर उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा धमाका करने की जमीन तैयार हो रही है इन सवालों के जवाब फिलहाल पर्दे के पीछे हैं। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे खेल की डोर सिर्फ वही कुख्यात स्टिंग मास्टर खींच रहा है या उसके पीछे कोई और ताकत भी खड़ी है, क्योंकि गैंग तैयार करने से लेकर खुफिया उपकरण जुटाने, लोगों को प्रशिक्षित करने और बड़े राजनेताओं अथवा अधिकारियों तक पहुंच बनाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क की जरूरत होती है।
उत्तराखंड की राजनीति में स्टिंग पहले भी बड़े तूफान खड़े कर चुके हैं, लेकिन 2027 से पहले यदि इस बार बाकायदा गुर्गों की फौज तैयार कर नेताओं और अफसरों के आसपास कैमरों का जाल बिछाने की तैयारी हो रही है तो आने वाले महीने बेहद चौंकाने वाले हो सकते हैं। गांधी पार्क के पास कॉफी हाउस में सामने आई कथित बातचीत ने फिलहाल इतना जरूर साफ कर दिया है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है। कैमरे छोटे हो सकते हैं, लेकिन जिन चेहरों की तरफ इन्हें घुमाने की तैयारी बताई जा रही है, वे बड़े हो सकते हैं और अगर इस कथित खेल के पीछे स्टिंग के सहारे वसूली की पटकथा भी छिपी है तो 2027 की राजनीतिक लड़ाई शुरू होने से पहले उत्तराखंड में कैमरे की एक ऐसी जंग छिड़ सकती है, जिसकी पहली तस्वीर सामने आते ही सत्ता से लेकर नौकरशाही तक हड़कंप मच सकता है।

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