विस्फोटक पत्र से मचेगा भूचाल!
सहायक अभियंता के खेल का काला चिट्ठा शासन पहुंचा
करोड़़ो की राजस्व हानि की हैरान करने वाली दास्तां
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के कुछ महकमों में बडे से लेकर छोटे अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते आ रहे हैं। उत्तराखण्ड के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा देखने को मिला है जब जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण टिहरी के सहायक अभियंता ने प्रतिनियुक्ति पर पीडब्लूडी से आये एक सहायक अभियंता के खिलाफ सचिव आवास, टिहरी जिला अधिकारी और अपने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को उसके द्वारा भ्रष्टाचार का खेल किये जाने का जो राज बेनकाब किया है उससे अब यह सवाल खडे हो गये हैं कि क्या जिस भ्रष्टाचार से सरकार को करोडो रूपये का चूना लगा है उस पर शासन कोई बडी जांच बिठाने के लिए आगे आयेगा या फिर इस मामले पर भी शासन चुप्पी साधकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा? सबसे अहम सवाल यह है कि जब प्राधिकरण के सहायक अभियंता ने ही प्रतिनियुक्ति पर आये सहायक अभियंता के भ्रष्टाचार का खेल बेनकाब करने के लिए अपने नाम से शिकायत दी है तो समझा जा सकता है कि किस तरह से प्राधिकरण के अन्दर कुछ बडा खेल हुआ है? शासन जो अकसर समारोह में अपने अफसरों और कर्मचारियों को ईमानदारी से काम करने की शपथ दिलाता है वह इस भ्रष्टाचार को लेकर शासन स्तर से बडी जांच के आदेश कब देगा इस पर अब सबकी नजरें लग गई हैं।
जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण टिहरी के सहायक अभियंता पंकज पाठक ने अपने उपाध्यक्ष को एक विस्फोट वाला पत्र भेजा है और इसकी कॉपी सचिव आवास व टिहरी के जिलाधिकारी को भी भेजा है। पत्र में कहा गया है कि विगत 25 जुलाई को मंत्री की बैठक के बाद 27 को उनके द्वारा दिग्विजय नाथ तिवारी के कृत्यों के विरूद्व एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें उनके द्वारा स्पष्ट जानकारी दी गई कि तिवारी द्वारा बैठक में उन्हें व अवर अभियंता के विरूद्व झूठी जानकारी दी गई जिस कारण उन्हें बैठक में जान से मारने की धमकी तक दी गई थी। पत्र में लिखा है कि तिवारी द्वारा किये गये कार्यों के कारण प्राधिकरण को हुई लाखो, करोडो की वित्तीय हानि की जानकारी दी गई। पत्र में कहा गया कि तिवारी के कार्यशैली के विरूद्व प्राधिकरण के समस्त अवर अभियंताओं द्वारा शिकायती पत्र भी उपाध्यक्ष को प्रेषित किया गया है। पंकज पाठक ने पत्र में खुलासा किया कि विभागीय समस्त सहायक, अवर अभियंताओं द्वारा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत तिवारी के विरूद्व तथ्यात्मक शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई।
पत्र में तिवारी द्वारा किये गये गलत नक्शें एवं प्राधिकरण को हुई वित्तीय हानि का सिलसिलेवार वर्णन करते हुए कहा गया है कि तिवारी द्वारा एक फाइल कृषि भू उपयोग बताते हुए रिजेक्ट कराई गई परंतु कुछ समय पश्चात यही फाइल को मास्टर प्लान से बाहर दर्शाते हुए पास कर दी गई जबकि फाइल में प्रदर्शित स्थल मास्टर प्लान में आता है एवं उसका भू उपयोग पार्क एवं खुले स्थल के अर्न्तगत है। पत्र में कहा गया कि फाइल जिसमें तिवारी द्वारा जो तथ्य छुपाते हुए स्वीकृति दी गई उसके अनुसार मास्टर प्लान से उसे बाहर लिखा गया लेकिन मैप में चम्बा का मास्टर प्लान दिखाया गया है। उक्त स्थल नगर निकाय क्षेत्र से बाहर तथा स्थल का भूखंड क्षेत्रफल दो हजार वर्ग मीटर से अधिक है जिसमंे भवन उपविधि के अनुसार भू उच्चीकरण शुल्क लिया जाना अनिवार्य था। आज के भू उच्चीकरणों की दर के अनुसार यह राशि एक करोड़ 46 लाख आंगणित होती है जो कि प्राधिकरण को स्पष्ट वित्तीय हानि है। पत्र में कहा गया कि कमल कांत मलिक की एक ले आउट की पत्रावली है जिसमें तिवारी द्वारा भवन भवन उपविधि के पृष्ठ संख्या सतर पर अंकित प्रस्तर संख्या के अनुसार अवस्थापना कार्यों के सापेक्ष लगभग 72 लाख रूपये की बैंक गारंटी ली जानी अनिवार्य थी परंतु किसी बैंक गारंटी के ही मानचित्र रिलिज कर दिया गया। पत्र में कहा गया है कि जबसे तिवारी की नियुक्ति नरेन्द्र नगर तहसील क्षेत्र मंे अनाधिकृत निर्माणों को रोकने के लिए की गई है तबसे उक्त क्षेत्र में एक भी सीलिंग की कार्यवाही नहीं की गई है एवं पूर्व में की गई सीलिंग बिल्डिंगों में सील के बावजूद कार्य कराया जा रहा है।
पंकज पाठक ने पत्र में साफ कहा है कि उक्त प्रकरणों के अलावा अन्य प्रकरण जांच का विषय हैं परंतु उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के पश्चात भी तिवारी की प्रतिनियुक्ति समाप्त नहीं कराई गई एवं उन पर कोई कार्यवाही भी नहीं की गई जिससे स्पष्ट है कि उनको बचाने का हर स्तर पर हर संभव प्रयास किया जा रहा है। पत्र में कहा गया कि इससे यह भी परिलिक्षित होता है कि तिवारी को प्रतिनियुक्ति पर ऐसे सभी गलत कार्यों को कराये जाने के लिए ही रखा गया है। इससे प्राधिकरण की छवि पर गलत असर पडेगा ही साथ ही आने वाले अभियंताओं को भी गलत परिपार्टी का सामना करना पडेगा। पत्र में कहा गया कि तिवारी अपनी प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी करके अपने मूल विभाग में वापस चले जायेंगे लेकिन भविष्य में आने वाले अभियंताओं से भी ऐसी अपेक्षायें की जायेंगी। तिवारी द्वारा बाहरी लोगों के साथ मिलकर उन पर दबाव बनाये जाने के कई तरह से षडयंत्र किये जा रहे हैं इसलिए इन समस्त प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कराते हुए सम्बधित के विरूद्व अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाये।