निठारीकांड में उन्नीस साल काटी जेल
रिहाई के बाद गंगा के आंचल में चुनी मौत
हरिद्वार। करीब दो दशक तक निठारी कांड और उससे जुड़ी कानूनी लड़ाई के कारण देशभर में चर्चित रहे सुरेंद्र कोली की जिंदगी का अंत हरिद्वार में हुआ। लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहने और बाद में अदालत से बरी होकर बाहर आने के बाद कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। कुछ दिन पहले ही उसने चाय का खोखा किराये पर लेकर जिंदगी को नए सिरे से आगे बढ़ाने की कोशिश शुरू की थी, लेकिन शुक्रवार सुबह उसी खोखे में उसका शव फंदे से लटका मिला।
घटना सप्तऋषि चौकी क्षेत्र के सप्त सरोवर रोड की है। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे चौकी सप्तऋषि को सूचना मिली कि लालमाता मंदिर के सामने स्थित चाय के खोखे में एक व्यक्ति ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टिनशेड से बने चाय के खोखे के भीतर एक व्यक्ति फंदे से लटका मिला। उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने आसपास के लोगों से जानकारी जुटाने के बाद मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली (50), निवासी ग्राम मंगरूखाल, भिकियासैंण, अल्मोड़ा के रूप में की। नाम सामने आते ही मामला चर्चा में आ गया। पुलिस के मुताबिक कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में निवास कर रहा था और कुछ दिन पहले ही उसने चाय का खोखा किराये पर लिया था। सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी में सामने आए बहुचर्चित आपराधिक मामलों से जुड़ने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। निठारी में मानव अवशेष मिलने के बाद शुरू हुई जांच ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामला इतना गंभीर और चर्चित हुआ कि इसकी जांच सीबीआई तक पहुंची। कोली के खिलाफ अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान वह करीब 19 साल जेल में रहा। निचली अदालतों में कई मामलों में कोली को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया था। एक अन्य मामले में दोषसिद्धि के कारण उसकी रिहाई नहीं हो सकी थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में भी दोषसिद्धि को निरस्त कर दिया, जिसके बाद उसके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ।
करीब 19 साल तक जेल में रहने के बाद कोली की जिंदगी ने नया मोड़ लिया। जिस व्यक्ति का नाम लगभग दो दशक तक निठारी प्रकरण और अदालतों में चली सुनवाई के कारण सुर्खियों में रहा, वह रिहाई के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहा था। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। हाल ही में सप्त सरोवर रोड पर उसने एक छोटा चाय का खोखा किराये पर लिया। बताया गया है कि उसने यहां चाय बेचने का काम शुरू किया था लेकिन नई शुरुआत ज्यादा समय नहीं चल सकी। शुक्रवार सुबह उसी टिनशेड के खोखे में कोली का शव फंदे से लटका मिला। सप्तऋषि चौकी पुलिस को जैसे ही घटना की सूचना मिली, टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक के संबंध में जानकारी जुटाई। पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में होने के बाद उसके परिजनों को भी घटना की सूचना दी गई। पुलिस फिलहाल घटना के पीछे की परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में पारिवारिक क्लेश को आत्महत्या की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस ने इसे अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की जा रही है।
निठारी प्रकरण सामने आने के बाद सुरेंद्र कोली का नाम वर्षों तक अदालतों और राष्ट्रीय मीडिया में बना रहा। जेल में लंबा समय बिताने के बाद अदालत से राहत मिली और वह बाहर आया। इसके बाद हरिद्वार में चाय का खोखा लेकर जीवन आगे बढ़ाने की कोशिश की। विडंबना यह रही कि जिस छोटे से खोखे से उसने रोजमर्रा की जिंदगी की नई शुरुआत की, वही उसकी जिंदगी का आखिरी ठिकाना बन गया। शुक्रवार को खोखे का दरवाजा खुला तो अंदर सामने आई तस्वीर ने आसपास के लोगों को चौंका दिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां बनी थीं। फिलहाल किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि परिजनों को सूचना देने के साथ आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। करीब दो दशक तक निठारी कांड, जेल और अदालतों की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बीच चर्चा में रहे सुरेंद्र कोली की जिंदगी आखिरकार हरिद्वार के एक छोटे से चाय के खोखे में थम गई।