रिश्वतखोरों की फौज

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पच्चीस सालों से नहीं डर रहे रिश्वतखोर
सरकार का शिकंजा फिर भी बेखौफ दिखते घूसखोर
सवालः आखिर भ्रष्टाचार के बडे़ मगरमच्छ कब होंगे कैद?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने पांच साल से राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरों के खिलाफ एक बडी जंग का ऐलान कर रखा है और यही कारण है कि गढवाल और कुमांऊ में विजिलेंस सरकारी महकमों में उन रिश्वतखोरों को सलाखों के पीछे पहुंचा रही है जिनके बारे में कोई व्यक्ति हिम्मत दिखाकर रिश्वतखोर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आता है। शिकायत के बाद रिश्वतखोरों का पकडा जाना कोई मायने शायद नहीं रखता क्योंकि असल में तो जिन रिश्वतखोरों के बारे में कोई शिकायत करने का साहस नहीं दिखाता और उन्हें विजिलेंस अपनी रणनीति के तहत शिकंजे में कैद कर ले तो उससे रिश्वतखोरों में एक बडा भूचाल मच सकता है लेकिन विजिलेंस सिर्फ उसी पर शिकंजा सकती है जिसके बारे में कोई उसके पास शिकायत लेकर आता है। आज एक बार फिर विजिलेंस ने दो रिश्वतखोरों को दबोच लिया इनमें एक रिश्वतखोर ने कृषि यंत्र को खरीदने से मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढाने के एवज में जब रिश्वत मांगी तो दूसरे रिश्वतखोर ने फूलों की खेती के लिए सरकारी अनुदान राशि सरकार से प्राप्त होने की राशि आगे बढाने के लिए पेंतीस हजार की रिश्वत मांगी जिन्हें विजिलेंस ने दबोच लिया तो वहीं सहायक कृषि अधिकारी को दस हजार रूपये की रिश्वत के साथ गिरफ्तार कर लिया। वहीं सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार बडे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोर करने वालों पर आखिर कब शिकंजा कसा जायेगा जिसके चलते आवाम को यह सकून हो कि अब भ्रष्टाचार के अब बडे मगरमच्छ भी सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले पांच वर्षों से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का ऐलान कर रखा है। सरकारी दफ्तरों में बैठे वे भ्रष्टाचार के शैतान आखिर कब गिरफ्त में आएंगे, जिनके खिलाफ शिकायत करने की हिम्मत ही कोई नहीं जुटा पाता? विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि शिकायतकर्ता के भाई को कृषि यंत्र खरीदने के लिए मिलने वाली सब्सिडी की फाइल आगे बढाने की एवज में हरिओम यादव निवासी थाल पौडी जो सहायक कृषि अधिकारी विकासखण्ड खानपुर जिला हरिद्वार में तैनात है उसने दस हजार रूपये की रिश्वत मांगी थी जिसे आज रंगे हाथों पकड लिया गया। वहीं विजिलेंस को शिकायत मिली कि एक व्यक्ति जो युवा मंगल कल्याण दल चलाता है उसमें फूलों की खेती के लिए सरकारी अनुदान राशि सरकार से प्राप्त होती है और उसकी फाइल आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी नारसन ने जैसे ही पेंतीस हजार रूपये की रिश्वत ली तो विजिलेंस ने उसे भी रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। हैरानी वाली बात है कि सरकार भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चला रही है लेकिन रिश्वतखोरों के मन में सरकार और सिस्टम का कोई भय नहीं है। एक दिन में दो रिश्वतखोरों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि कुछ महकमों के अन्दर किस कदर रिश्वतखोरी का काला धंधा चल रहा है।
आज दस हजार रुपये की रिश्वत लेते कर्मचारी पकड़ा गया है। कल कोई दूसरा पकड़ा जाएगा। कार्रवाई चलती रहेगी। लेकिन क्या इससे वह डर पैदा होगा जिसकी जरूरत सरकारी सिस्टम में है? भ्रष्टाचार के खिलाफ असली सफलता उस दिन मानी जाएगी जब सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सिर्फ शिकायत का नहीं, बल्कि अपनी गिरफ्तारी का डर महसूस करे। जब जनता को यह भरोसा हो कि उसकी शिकायत दबेगी नहीं। जब सरकारी कुर्सी कमाई का जरिया नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक बने। मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान किया है। अब जरूरत है कि इस जंग का अगला निशाना केवल वे लोग न हों जो शिकायत के बाद रंगे हाथ पकड़े जाते हैं, बल्कि वे चेहरे भी सामने आएं जो वर्षों से सरकारी सिस्टम की आड़ में भ्रष्टाचार का साम्राज्य चला रहे हैं। क्योंकि असली लड़ाई दस हजार, बीस हजार या पचास हजार रुपये की रिश्वत से नहीं है। असली लड़ाई उस सोच से है जिसने सरकारी नौकरी को सेवा नहीं, सौदेबाजी का अड्डा बना दिया है और जब तक इस सोच के बड़े चेहरों पर शिकंजा नहीं कसता, तब तक सवाल खड़ा रहेगा। आखिर भ्रष्टाचार के ये शैतान कब गिरफ्त में आएंगे?

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