हरक के निशाने पर निशंक का ‘लेखक गांव‘

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ईडी को सलाहः एक दिन गणेश जोशी के घर भी मार दो छापा
न धंधा, न नौकरी फिर भी खरबो की सम्पत्ति और ईडी खामोश
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। कांग्रेस के कद्दावर नेता हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली के बाद सरकार पर काफी आक्रामक नजर आ रहे हैं और वह मीडिया में खुलकर ईडी को हुंकारने में लगे हुये हैं कि ईडी भाजपा के किसी नेता के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि क्या ईडी को किसी भाजपा नेता की आय से अधिक सम्पत्ति नजर नहीं आ रही है, उन्होंने ईडी को सलाह दिन कि किसी दिन वह गणेश जोशी के घर पर छापा मार दें और कहा कि एक दिन निशंक के यहां भी चले जाओ और देखो कि निशंक ने कितना बडा लेखक गांव कैसे बना दिया। हरक ने हुंकार लगाई कि भाजपा नेताओं की सम्पत्ति और उनके आय के स्रोत ईडी को नहीं दिखाई दे रहे और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी उनके पीछे पडी रही जिनके परिवार ने अपनी इलाहाबाद की सारी सम्पत्ति देश को दे दी हो उस परिवार के तो ईडी पीछे है। हरक सिंह रावत ने दहाड़ लगाई कि ईडी को यहां कुछ नजर नहीं आ रहा कि जिनके पास न कोई धंधा है और न कोई नौकरी है उनके पास खरबो रूपये की सम्पत्ति कहां से आ गई।
कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत एक बार फिर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली के बाद हरक ने सीधे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए भाजपा नेताओं को लेकर तीखा हमला बोला है। हाल में सामने आए उनके बयान में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का नाम लेकर ईडी से जांच की मांग की गई है। उनके इन बयानों की वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं।
हरक सिंह रावत ने सवाल उठाया कि क्या ईडी को भाजपा के किसी नेता के पास आय से अधिक संपत्ति दिखाई नहीं देती? उन्होंने बेहद तल्ख अंदाज में कहा कि ईडी किसी दिन गणेश जोशी के यहां भी छापा मारकर देखे और उनकी संपत्ति तथा आय के स्रोतों की पड़ताल करे। हरक यहीं नहीं रुके। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का नाम लेते हुए भी संपत्ति को लेकर सवाल उठाए और जांच एजेंसियों से उनकी संपत्तियों के स्रोत देखने की बात कही। ये आरोप हरक सिंह रावत के राजनीतिक बयान हैंय इन्हें किसी जांच एजेंसी द्वारा सिद्ध निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। हरक ने राहुल गांधी और गांधी परिवार के खिलाफ हुई ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि जिस परिवार ने अपनी संपत्ति देश को समर्पित की, उस परिवार के नेताओं के पीछे जांच एजेंसियां लगी रहीं, लेकिन भाजपा नेताओं की संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर वैसी सक्रियता आखिर क्यों नजर नहीं आती?
सबसे तीखा सवाल हरक सिंह रावत ने नेताओं की कथित बेहिसाब संपत्ति को लेकर उठाया। उन्होंने कहा कि जब किसी नेता का कोई बड़ा व्यवसाय या नौकरी नहीं है तो इतनी विशाल संपत्ति आखिर आई कहां से? हरक के तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में ‘नेताओं की संपत्ति बनाम आय के स्रोत’ का मुद्दा बड़ा सियासी हथियार बन सकता है। हरक सिंह रावत का यह हमला इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम है क्योंकि उन्होंने सामान्य आरोप लगाने के बजाय भाजपा के दो बड़े चेहरों का नाम लेकर सीधे ईडी को चुनौती दी है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि भाजपा और संबंधित नेता इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और क्या हरक अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या ठोस तथ्य भी सार्वजनिक करते हैं। फिलहाल हरक की हुंकार ने प्रदेश की सियासत में नया सवाल जरूर उछाल दिया हैकृक्या जांच एजेंसियों की कसौटी सत्ता और विपक्ष के लिए एक समान है?

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