भोले के दरबार पहुंचा भगवा सैलाब
जलाभिषेक के साथ कांवड़ यात्रा का समापन
भगवा रंग में रंगी राहें, शिवालयों में आस्था का सैलाब
हरिद्वार/देहरादून। पैरों में छाले, कंधों पर कांवड़ और जुबां पर बम-बम भोले के उद्घोष लगाते लाखों कावडिये आस्था की मंजिल तक पहुंचे और महादेव का गंगाजल से अभिषेक किया। करोड़ों कावंडियों की कठिन तपस्या का आईना हर इंसान देखकर यह बोल पडा कि कई दिनों की कठिन राह के बाद कांवडिये भोले के द्वार पहुंचे और जलाभिषेक कर अपनी यात्रा को पूरा किया। भगवा रंग में रंगी राहें, शिवालयों में आस्था का सैलाब और कांवड यात्रा का भव्य समापन होने से सरकार और सिस्टम गदगद नजर आया। भोले की भक्ति में थकान भी हारी और भोले भक्तों ने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ अपनी शांतिपूर्ण कांवड यात्रा को भी एक संकल्प के साथ पूरा कर भोेले बाबा में अपनी आस्था दिखाई।
कंधों पर सजी कांवड़, पैरों में कई दिनों की थकान और जुबां पर “बोल बम३ हर-हर महादेव” का जयघोष। मंगलवार को सावन शिवरात्रि पर जैसे ही शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक किया, कई दिनों से चली आ रही कांवड़ यात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई। 30 जुलाई से शुरू हुई इस आस्था की यात्रा में हरिद्वार एक बार फिर शिवभक्ति के सबसे बड़े केंद्र के रूप में नजर आया। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे कांवड़ियों ने हरकी पैड़ी और अन्य गंगा घाटों से पवित्र गंगाजल भरा और सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर अपने-अपने शिवालयों की ओर प्रस्थान किया। किसी के पैरों में छाले पड़े, किसी ने नंगे पैर यात्रा पूरी की तो कोई विशाल और आकर्षक कांवड़ लेकर भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचा। रास्ते की थकान और मौसम की मुश्किलों के बावजूद शिवभक्तों के कदम नहीं रुके। जहां से कांवड़ियों का जत्था गुजरा, वहां “बोल बम” और “बम-बम भोले” के जयकारों से वातावरण शिवमय होता चला गया। यात्रा के अंतिम चरण में डाक कांवड़ का दबाव बढ़ने के साथ हरिद्वार और प्रमुख कांवड़ मार्गों पर भारी भीड़ रही। पुलिस-प्रशासन के लिए भी यह दौर किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था। सुरक्षा, यातायात डायवर्जन, भीड़ नियंत्रण और कांवड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पुलिसकर्मी दिन-रात सड़कों पर मोर्चा संभाले रहे।
सावन शिवरात्रि पर सुबह से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतारें दिखाई दीं। गंगाजल लेकर मंजिल तक पहुंचे शिवभक्तों के चेहरों पर यात्रा पूरी करने की थकान से कहीं अधिक भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक की खुशी नजर आई। कई दिनों से भगवा रंग में रंगी सड़कों पर अब धीरे-धीरे कांवड़ियों की भीड़ कम होने लगेगी और यातायात व्यवस्था सामान्य होने की ओर लौटेगी। लेकिन हरिद्वार से लेकर शिवालयों तक गूंजा “हर-हर महादेव” अगले सावन तक इस विशाल आस्था यात्रा की याद दिलाता रहेगा। सैकड़ों किलोमीटर की राह, पैरों के छाले और तमाम मुश्किलें भी शिवभक्तों की आस्था को नहीं डिगा सकींकृगंगाजल की एक बूंद भोलेनाथ को अर्पित हुई और कांवड़ियों की कठिन यात्रा आस्था के उत्सव में बदल गई।