मुख्यमंत्री ने अफसरों को दिया टारगेट

0
5

हर नल में नियमित आये शुद्ध पानी
जल जीवन मिशन में ‘आंकडों का खेल’ नहीं, धरातल पर चाहिए पानी
पेयजल योजनाओं पर धामी की रहेगी पैनी नजर
देहरादून(संवाददाता)। जल जीवन मिशन की समीक्षा में मुख्यमंत्री सख्त नजर आये और उन्होंने 1,015 अधूरी योजनाओं को समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिये और साफ कहा कि देरी पर अफसरों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री ने अफसरों को दो टूक शब्दों में कहा कि जल जीवन मिशन में आंकडों का खेल नहीं, धरातल पर पानी चाहिए और हर नल से नियमित शुद्ध पानी का उन्होंने अफसरों को टारगेट देकर अपने इरादों को साफ कर दिया।
उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत घरों तक नल पहुंचाने के साथ अब उनमें नियमित और गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाने पर सरकार का फोकस है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मिशन की सफलता केवल नल कनेक्शन के आंकड़ों से नहीं आंकी जाएगी, बल्कि हर घर तक नियमित, पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल पहुंचना सुनिश्चित करना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में निर्माणाधीन और लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर योजनाओं में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान कराने को कहा। साथ ही जनपदवार लक्ष्य और समयसीमा निर्धारित कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। अनावश्यक देरी सामने आने पर संबंधित कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत कुल 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1,015 योजनाएं अभी प्रगति पर हैं। राज्य की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत बताई गई। वहीं 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने पूर्ण घोषित की जा चुकी योजनाओं के स्थलीय सत्यापन पर भी जोर दिया। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 14,979 गांवों में से अभी 9,796 गांवों में हर नल से जल का सत्यापन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने शेष क्षेत्रों में भी सत्यापन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवीकरण, वर्षा जल संचयन तथा स्रोतों के पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने प्रत्येक जिले में जलापूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित करने के साथ पेयजल योजनाओं के नियमित संचालन और रख-रखाव की स्थायी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार का लक्ष्य केवल पाइपलाइन बिछाना और नल लगाना नहीं, बल्कि उस नल से लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है। इसके लिए योजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति की नियमित समीक्षा करने के साथ धरातल पर उनकी वास्तविक स्थिति भी परखी जाएगी। बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव पेयजल रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव रोहित मीणा, झरना कमठान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

LEAVE A REPLY