जीवन चलने का नाम…

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धामी ने पहाड़ों को भी कर दिया गुलजार
देश के नक्शे पर विकास को लेकर चमक रहे पहाड़ी जनपद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने हिन्दी सिनेमा पर्दे पर 1972 में आई फिल्म के सुपरहिट गीत ‘जीवन चलने का नाम को अपने मन में धारण करके राज्य में सत्ता चलाने का जो हुनर दिखा रखा है उसके चलते आज राज्य के पहाड़ी जनपद भी विकास के चलते खूब गुलजार हो रहे हैं और देश के नक्शे पर यह पहाड़ी जनपद विकास को लेकर जिस तरह से चमक रहे हैं उससे अब वो पहाड़ी जनपद भी वहां की जनता को खूब रास आ रहे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने शोर फिल्म के उस गीत को सच कर दिखाया है जिसके बोल हैं कि… जीवन चलने का नाम, चलते रहो सुबह-ओ-शाम, के रस्ता कट जाएगा मितरा, के बादल छट जाएगा मितरा, के दुःख से झुकना ना मितरा, के एक पल रुकना ना मितरा, जीवन चलने का नाम…।
हिंदी सिनेमा के इस कालजयी गीत की पंक्तियां आज उत्तराखंड की राजनीति में एक कार्यशैली की याद दिलाती हैं। समर्थकों के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन को केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे लगातार मैदान तक ले जाने का प्रयास किया है। यही वजह है कि वे प्रदेश के दूरस्थ गांवों से लेकर सीमांत इलाकों और शहरों तक लगातार सक्रिय दिखाई देते हैं। उत्तराखंड ने लंबे समय तक विकास की घोषणाएं तो बहुत सुनीं, लेकिन पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, पलायन, बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियां और धीमी परियोजनाएं अक्सर सवालों के केंद्र में रहीं। ऐसे राज्य में किसी भी मुख्यमंत्री की असली पहचान उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसकी निरंतर मौजूदगी और योजनाओं के क्रियान्वयन से बनती है।
समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी ने प्रशासन को गति देने, निवेश आकर्षित करने, सड़क और कनेक्टिविटी सुधारने, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, कानून-व्यवस्था पर जोर देने और विभिन्न योजनाओं की नियमित समीक्षा जैसे कदमों पर विशेष ध्यान दिया है। उनके अनुसार शासन की सक्रियता का उद्देश्य यही रहा कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ लोगों तक पहुंचे। हालांकि किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल दावों से नहीं, बल्कि उनके परिणामों से होता है। लोकतंत्र में उपलब्धियों की सराहना के साथ-साथ कमियों पर सवाल उठना भी उतना ही आवश्यक है। यही संतुलन शासन को अधिक जवाबदेह बनाता है।
आज उत्तराखंड ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास की रफ्तार बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसे सभी क्षेत्रों तक समान रूप से पहुंचाना। यदि प्रशासनिक सक्रियता, पारदर्शिता और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन इसी तरह जारी रहता है, तो राज्य अपने विकास के अगले चरण की ओर अधिक मजबूती से बढ़ सकता है। किसी भी नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके निरंतर प्रयासों से होती है। समर्थकों की नजर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का मूल संदेश भी यही है। रुकना नहीं, चलते रहना।

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