बराबरी के इंसाफ का भरोसा

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दून को मिला सख्त और संवेदनशील कप्तान
डोबाल का संदेश कानून के सामने हर व्यक्ति बराबर
देहरादून(संवाददाता)। राजधानी की कानून-व्यवस्था में एक नया भरोसा और संतुलन तब से देखने को मिल रहा है, जब से नये पुलिस कप्तान ने पदभार संभाला है। अपना कार्यभार ग्रहण करते ही उन्होंने साफ शब्दों में यह संदेश दिया कि कानून के सामने हर व्यक्ति बराबर है, और उनके इंसाफ का तराजू किसी के लिए झुकेगा नहीं। पुलिस कप्तान आम जनमानस के लिए जहां हमेशा फलावर रूप में नजर आ रहे हैं तो वहीं अपराधियों, माफियाओं, धंधेबाजों के लिए वह फायर नजर आ रहे हैं। पुलिस कप्तान के लिए न तो कोई छोटा है और न ही कोई बडा जिसके चलते आम जनमानस को यह इल्म हो चुका है कि मुख्यमंत्री ने जिस कप्तान को राजधानी पुलिस की बागडोर सौंपी है वह राजधानीवासियों के हमेशा रक्षक बनकर उनके साथ खडे रहेंगे। आवाम यह कहने से भी नहीं चूक रही कि जनपद का पुलिस कप्तान अपराधियों के लिए सख्त और आम इंसान के लिए भावुक और संवेदनशील हैं जिनके राज में उन्हें अपराधियों का कोई भय नहीं है।
यही स्पष्ट सोच आज दूनवासियों के बीच विश्वास का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में चल रही सख्त कार्रवाई, अपराधियों पर लगातार शिकंजा और आम जनता की शिकायतों पर त्वरित संज्ञान इन सभी ने यह साबित किया है कि कप्तान का विजन केवल कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई दे रहा है। पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल की कार्यशैली की सबसे खास बात यह है कि जहां एक ओर वे अपराध और अव्यवस्था के खिलाफ पूरी सख्ती से पेश आते हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने में संवेदनशीलता भी दिखाते हैं। यही कारण है कि पुलिस और जनता के बीच की दूरी अब कम होती नजर आ रही है। पुलिस कप्तान ने अपराधियों को खुला और सख्त संदेश दे रखा है कि अगर जनपद के अन्दर उन्होंने कोई अपराध किया तो उन्हें यह पछतावा होगा कि उन्होंने अपराध करने का गुनाह क्यों किया। डोबाल के नेतृत्व में पुलिस ने साफ कर दिया है कि कानून तोड़ने वालों के लिए दून में कोई जगह नहीं है। लगातार चलाए जा रहे अभियान, चैकिंग, और ऑपरेशन के जरिए अपराधियों में डर और आम जनता में भरोसा पैदा हुआ है। आज दूनवासी खुलकर यह कहने लगे हैं कि उन्हें एक ऐसा पुलिस कप्तान मिला है, जो न सिर्फ कानून लागू करता है, बल्कि न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध भी है। यह भरोसा ही किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। प्रमेन्द्र डोबाल की साफ नीयत, सख्त निर्णय क्षमता और समान न्याय की नीति ने देहरादून में पुलिस व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। यही वजह है कि आज उनकी छवि एक ऐसे कप्तान की बन चुकी है, जिस पर शहर आंख मूंदकर भरोसा कर रहा है।
विकासनगर में जब चंद दिन पूर्व एक महिला अपनी दो मासूम बच्चियों को लेकर शक्ति नहर में आत्महत्या के लिए कूद गई थी तो वहां से गुजर रहे ट्रैक्टर पर सवार दो युवकों ने अपने प्राण की चिंता किये बगैर नहर के गहरे पानी से एक बडा युद्ध किया और उन्होंने दोनो बच्चियों को अपनी जान जोखिम में डालते हुए जब बचाया तो जनपद के पुलिस कप्तान ने इन दोनो जाबांज युवकों को अपने कार्यालय में सम्मानित करवाया और यह संदेश दिया कि युवकों ने जिस दिलेरी के साथ बच्चियों को बचाया वह यह बताने के लिए काफी है कि उन्होंने इंसानियत का धर्म निभाकर दो जीवन बचाये हैं। पुलिस कप्तान ने जिस भावना से दोनो जाबांज युवकों को सम्मानित करवाया उससे साफ नजर आ गया कि पुलिस के अन्दर भी इंसानियत का रूप आज भी गुलजार है।

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