पिता की विरासत को आगे बढ़ाती रितु

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सादगी और सख्ती में दिखती है भुवन चंद्र खंडूरी की झलक
अफसर की पत्नी सियासत में दिखा रही धमक
देहरादून। उत्तराखण्ड में एक दशक तक सियासत में अपने कड़़कपन और ईमानदारी से अपनी धमक दिखाने वाले स्वर्गीय खण्डूरी भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गये लेकिन अपने पिता की विरासत को लम्बे समय से आगे बढा रही रितुु भी उनके नक्शे कदम पर चलती हुई दिखाई दे रही हैं। सबसे अहम बात यह है कि रितुु अपने अफसर पति के साथ ही हमेशा रही और उन्हें राजनीति का कोई ज्ञान नहीं था लेकिन अपने पिता की विरासत को आगे बढाने के लिए उन्होंने सियासत को चुना और उन्होंने अपने विधानसभा कार्यकाल में कडक रूख के साथ सदन चलाने में हमेशा अपने को आगे रखा और उसी के चलते उन्हें राज्य के अन्दर एक कडक शासक के रूप में भी देखा जाने लगा। अपने पिता की तरह सियासत में सादगी और सख्ती दिखाने का जो आईना विधानसभा अध्यक्ष ने चार साल से राज्यवासियों को दिखा रखा है उससे वह अपनी एक नई पहचान बनाती जा रही हैं।
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों एक नाम लगातार मजबूती से उभर रहा है रितुु खंडूरी भूषण विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनका संतुलित, सख्त और मर्यादित संचालन न सिर्फ उनकी कार्यशैली को अलग पहचान दे रहा है, बल्कि लोगों को उनके पिता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की याद भी दिला रहा है। रितु खंडूरी में साफतौर पर अपने पिता के वही गुण दिखाई देते हैं। सादगी, अनुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति अडिग प्रतिबद्धता। भुवन चंद्र खंडूरी को उत्तराखंड की राजनीति में ईमानदार और कठोर प्रशासक के रूप में जाना जाता रहा है, और अब उनकी यही छवि उनकी बेटी में भी झलक रही है।
विधानसभा में कार्यवाही के दौरान रितु खंडूरी का सख्त लेकिन संतुलित रवैया साफ संकेत देता है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं करतीं। नियमों का पालन हो, सदन की गरिमा बनी रहे या फिर जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता हर मोर्चे पर उनकी कार्यशैली में एक स्पष्टता और दृढ़ता नजर आती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रितु खंडूरी ने अपने पिता की विरासत को केवल नाम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने आचरण और निर्णयों में भी उतारा है। यही वजह है कि वह धीरे-धीरे उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरे के रूप में स्थापित होती जा रही हैं। आज जब राजनीति में विश्वास और पारदर्शिता जैसे मूल्यों की कमी महसूस की जाती है, ऐसे समय में रितु खंडूरी का यह अंदाज न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि राजनीति में विरासत सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी होती है और उसे निभाने का जज्बा रितु खंडूरी में साफ दिखाई देता है।

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