बेनामी सम्पत्तियां सील हुई तो डरेंगेे भ्रष्टाचारी

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भ्रष्ट नेताओं और अफसरों का साम्राज्य करना होगा ध्वस्त?
लोकायुक्त के डंडे से ही भयभीत होंगे भ्रष्टाचारी शैतान
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार फिर तेजी से आवाज बुलंद होने लगी है जब तक राज्य में लोकायुक्त का गठन नहीं हो जाता तब तक भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों का साम्राज्य कोई भी नेस्तनाबूत नहीं कर पायेगा? विजिलेंस के पास वो पॉवर नहीं है जिससे कि वह भ्रष्टों की सम्पत्तियों को खंगालने के लिए खुद आगे निकलकर उन पर बडा एक्शन करने के लिए साहस दिखा पाये? अब राज्य के अन्दर एक बार फिर यह आवाज बुलंद होने लगी है कि भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों का राज राज्य बनने के बाद से ही रहस्य बना हुआ है इसलिए जिस दिन राज्य के अन्दर सशक्त लोकायुक्त का गठन हो गया तो यह तय है कि भ्रष्ट अफसरों और नेताओं की बेनामी सम्पत्तियों का चीरहरण हो जायेगा।
उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने राज्य के अन्दर सशक्त लोकायुक्त का गठन कर भ्रष्टाचारी नेताओं और अफसरों को दो टूक संदेश दे दिया था कि अगर उन्होंने राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार करने का दुसाहस किया तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन होना तय है। सवाल उठ रहा है कि जब राज्य के अन्दर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के तहत सरकार चलाने का संकल्प लिया हुआ है तो फिर वो कौन राजनेता और अफसर हैं जो राज्य के मुखिया को सशक्त लोकायुक्त बनाने से रोकने का कोई न कोई प्रपंच रच रहे हैं? चार साल से बेदाग होकर सरकार चला रहे मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी से भाजपा की बडी लीडरशिप खुश है तो वहीं राज्य की जनता भी मान चुकी है कि मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में भ्रष्टाचारियों पर तेजी से प्रहार शुरू कर रखा है लेकिन अब राज्य के अन्दर सशक्त लोकायुक्त की जरूरत है क्योंकि आज भी काफी राजनेता और अफसर भ्रष्टाचार का शातिराना खेल खेलकर अकूत दौलत कमाने के एजेंडे पर आगे बढे हुये हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बडी पहल कर रखी है और उन्होंने जिस तरह से राज्य में भ्रष्टाचार और घोटाले करने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेना शुरू किया हुआ है उससे भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों की नींद उड गई है और यही कारण है कि वह सीएम के एक्शन से अपने आपको बचाने की जुगत में हाथ-पैर मारते हुए पर्दे के पीछे दिखाई दे रहे हैं? आवाम का मानना है कि भ्रष्ट अफसरों और भ्रष्ट राजनेताओं ने राज्य बनने के बाद से ही एक दशक तक राज्य में बडे-बडे भ्रष्टाचार कर अपने रिश्तेदारों और परिवारों के नाम पर बेनामी सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा कर रखा है उस साम्राज्य का किला ध्वस्त करने के लिए कब विजिलेंस अपना तीसरा नेत्र खोलकर उन पर शिकंजा कसने के लिए आगे आयेगी यह आज भी राज्य के अन्दर एक सवाल खडा हो रखा है? उत्तराखण्ड के अन्दर बहस चल रही है कि हुजूर भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों को सील करने के लिए उन्हें बडा एक्शन करने के लिए आगे आना चाहिए जिससे कि देशभर में संदेश जाये कि उत्तराखण्ड के अन्दर चाहे कोई कितना भी बडा राजनेता या अफसर हो और वह भ्रष्टाचार करके बेनामी सम्पत्तियां बनाने में कामयाब हुआ तो उस पर भी सरकार के मुखिया का जबरदस्त एक्शन होगा तो उससे राज्य की जनता भी गदगद होगी और भ्रष्ट तंत्र को भी यह इल्म हो जायेगा कि राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार से दौलत कमाकर बेनामी सम्पत्तियां बनाना सबसे बडा अपराध है?
उत्तराखण्ड में अब विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने लगा है और राज्य की जनता भ्रष्टाचारियों को लेकर काफी नाराज दिखाई देती है क्योंकि चार साल से जिस तरह सरकारी महकमों में तैनात अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए सलाखों के पीछे पहुंचे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि राज्य में भ्रष्टाचारियों के मन में अभी भी वो खौफ देखने को नहीं मिल पा रहा है जो उनमें होना चाहिए इसलिए अब राज्य के अन्दर एक बार फिर सशक्त लोकायुक्त के गठन की आवाज बुलंद होने लगी है जिसके चलते भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों को यह भय सताने लगा है कि राज्य के अन्दर सशक्त लोकायुक्त का गठन हो गया तो उससे उनकी सम्पत्तियों के वो राज बेनकाब हो जायेंगे जो राज्य बनने के बाद से अब तक एक रहस्य बने हुये हैं।

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