अवैध खनन माफियाओं का सिंडिकेट

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सरकार का कब तक लूटेंगे काला सोना?
नेताओं, अफसरों और माफियाओं का सिंडिकेट सरकार को दे रहा धोखा
जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से नदियों का चीर रहे सीना
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद से आज तक अवैध खनन का खेल कभी बंद हुआ हो ऐसा देखने को नहीं मिला है क्योंकि इस खेल में काफी राजनेता, सफेदपोश, अफसरों और माफियाओं ने गोपनीय सिंडिकेट बना रखा है और उसी के चलते अवैध खनन करने के वह किंग बन चुके हैं और इस खेल में दिग्गजों का बना सिंडिकेट इतना पॉवरफुल है कि उसका नेटवर्क भेदने के लिए सिस्टम आगे ही नहीं आना चाहता? हैरानी वाली बात तो यह है कि जहां सुप्रीम कोर्ट ने नदियों में जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से खनन पर रोक लगा रखी है तो वहीं राज्य के कुछ जनपदों में खुलेआम खनन माफियाओं का सिंडिकेट नदियों का सीना चीरने के लिए रात के अंधेरे से सुबह के उजाले तक जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से अवैध खनन करने का खुला तांडव कर रहे हैं। आश्चर्यचकित बात यह है कि जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से रातभर अवैध खनन कराने की कौन-कौन विभाग सुपारी लेकर दौलत कमा रहा है अगर यह सारा राज मुख्यमंत्री के सामने खुल जाये तो वो सारा सिंडिकेट और दौलत की उगाई करने वाले महकमे सब एक-एक करके बेनकाब हो जायेंगे?
उत्तराखण्ड में गजब हो रहा है जब कोई एक व्यक्ति कहीं भी एक छोटी सी चीज भी उठाता है तो उसके खिलाफ चोरी का मुकदमा कायम होता है लेकिन राज्य के अन्दर कुछ जिलों में पॉवरफुल दिखाई देने वाला सिंडिकेट रात-दिन अवैध खनन करने का खुलकर तांडव कर रहा है। सबसे अहम बात यह है कि खनन माफियाओं का सिंडिकेट नदियों का खुलेआम सीना चीरकर सरकार का काला सोना चोरी करने का दुसाहस करता आ रहा है लेकिन इनके खिलाफ चोरी के मुकदमे दर्ज न होने से उनके हौसले आये दिन बुलंद रहते हैं। सवाल यह है कि जब सरकार का खनन चोरी हो रहा है तो उसे अवैध खनन का नाम देकर सिर्फ उनसे जुर्माना वसूलना सिस्टम को कटघरे में खडा करता आ रहा है और सवाल उठ रहा है कि चोरी छोटा करें या बडा चोरी, चोरी होती है और जिस दिन अवैध खनन को लेकर सरकार खनन माफियाओं पर खनन चोरी करने के मामले दर्ज करने के लिए आगे आयेगी उसके बाद राज्य के अन्दर अवैध खनन का काला खेल बंद हो जायेगा इसमें भी कोई शंका नहीं है।
उत्तराखण्ड में हर सरकार के कार्यकाल में खनन माफियाओं के सिंडिकेट का खूब हल्ला मचता है और यह सवाल उठता है कि आखिरकार माफियाओं का सिंडिकेट इतना पॉवरफुल कैसे रहता है कि वह सरकार की चेतावनी को भी हवा में उडाने से पीछे नहीं हटते? मुख्यमंत्री की लाख कोशिश के बावजूद भी उत्तराखण्ड के कुछ जिलांे में अवैध खनन का काला कारोबार रूकने का नाम नहीं ले रहा है जिससे सिस्टम भी कटघरे में खडा हुआ नजर आ रहा है? गजब की बात तो यह है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह जहां राज्य की नदियांे से सरकार का काला सोना चोरी कर रहे हैं वहीं वह इस काले सोने को बाजार में इतना महंगा बेच रहे हैं जिससे आवाम के सामने मकान बनाने के लिए एक बडा मंथन और चिंतन करना पड रहा है? अब उत्तराखण्ड के अन्दर आवाज उठ रही है कि अवैध खनन पर सरकार प्रहार करे क्योंकि उसे अपनी ही नदियों में हो रहे खनन से कोई राजस्व नहीं मिल रहा है तो वह अपनी नदियों के खनन को सस्ते दामों पर बेचे जिससे खनन माफियाओं को एक बडा झटका लग सके कि सरकार ने खनन को सस्ते दामांे में करके उन पर कहीं न कहीं नकेल लगाने का काम शुरू कर दिया है?
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड का जन्म होने के बाद से ही किसी भी सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री के कार्यकाल में राज्य के कई जिलों में अवैध खनन का खेल बंद करने का कोई साहस नहीं दिखा पाया था और यही कारण था कि हर सरकार के कार्यकाल में खनन माफियाओं का सिंडिकेट कुछ जनपदांे मंे इतना पॉवरफुल दिखाई देता रहा है कि वह सरकार की चेतावनी को भी हवा में उडाने से पीछे नहीं रहता। उत्तराखण्ड में हमेशा अवैध खनन को लेकर सरकारों को आवाम अपने निशाने पर लेती रही लेकिन किसी भी सरकार ने ऐसा साहस नहीं दिखाया कि वह अपने राजस्व की चोरी को रोकने के लिए कोई बडा एक्शन प्लान तैयार कर सके? उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री ने अवैध खनन पर नकेल लगाने का खुला अल्टीमेटम दे रखा है लेकिन यह भी सच है कि कुछ महकमे सरकार के मुखिया को अंधकार में रखकर कुछ जिलों में अवैध खनन कराकर खूब दौलत कमाने के एजेंडे पर आगे बढ़े हुये हैं। आश्चर्यचकित बात यह है कि जब जेसीबी और पोकलैंड मशीन से सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन कराने पर रोक लगा रखी है तो फिर वो कौन-कौन महकमे हैं जो खनन माफियाओं के सिंडिकेट के मायाजाल में फंसकर उन्हें रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक जेसीबी और पोकलैंड से अवैध खनन करने की खुली छूट दे रहे हैं।

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