पुष्कर की दीवानी जनता

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देहरादून। ‘‘… तून क्या कर डाला, मर गई मैं मिट गई मैं, हो जी…, हां जी… हो गई मैं तेरी दीवानी, दीवानी …..’’। मशहूर गीतकार व गायक कैलाश खेर के एक गीत इन पंक्तियों में प्रेम की जिस दीवानगी की झलक दिखती है यदि उसका सटीक उदाहरण किसी को देखना हो तो वह उत्तराखण्ड की जनता के उस रूप को देख सकता है, जिसमें वह अपने मुख्यमंत्री के प्रति अपनी दीवानगी प्रकट करने से जरा भी संकोच नहीं करती। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सूबे के किसी भी जनपद में चले जाएं, वहीं की जनता उन्हें जो अपना स्नेह दिखाती है, वह किसी से छिपा नहीं है। सीएम धामी के छोटे से छोटे कार्यक्रम में भी जिस प्रकार के जनता स्वेच्छा से प्रतिभाग करने के लिए आतुर रहती है वह यह बताने के लिए काफी है कि वह किस कदर पुष्कर की दीवानी हो रखी है। उत्तराखण्ड के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसी मुखिया को जनता इस दीवानगी से प्रेम कर रही हो। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अभी तक के कार्यकाल में जो जनकल्याण के कार्य किए हैं, उन्हें भी जनता ने खूब सराहा है। यहीं कारण है कि राजनीति के जानकार अभी से यह मानने लगें कि वर्ष 2027 में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सर पर जबसे धुरंधर मुख्यमंत्री होने का ताज सजा है तबसे उन्होंने राज्य की जनता से और बडा वादा किया है कि अब उनकी जिम्मेदारी धाकड बनने के बाद डबल हो गई है जिसके चलते उन्होंने राज्य को विकास के पथ पर तेजी के साथ आगे ले जाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा रखे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर आवाम के मन में मुख्यमंत्री की दीवानगी किस कदर छाई हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते रोज जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करने और डाट काली मन्दिर से गढी कैंट महिन्द्रा ग्राउंड तक रोड-शो करने के लिए आगे आये तो हजारों का सैलाब सडक से लेकर जनसभा में उमडा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंच से एक बार फिर ऐलान किया कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री लोकप्रिय और कर्मठ हैं उससे राज्यवासियों के अन्दर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और इस बात का इल्म हो गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ही उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने का जज्बा रखते हैं और डबल इंजन सरकार में उनका राजनीतिक इकबाल इतना बुलंद हो चुका है कि राज्य की जनता धामी से उम्मीदों की आस मे नये सपने देखने लगी है।
उत्तराखण्ड मे मुख्यमंत्री ने सरकार चलाने के लिए पारदर्शी संस्कृति को अपनाये हुये हैं और उनकी यह पारदर्शी संस्कृति राज्यवासियों को खूब रास आ रही है। मुख्यमंत्री ने आवाम के मन मे उम्मीदों की वो आस पैदा कर दी है जिसमे वह सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री से आस लगाये हुये है कि वह उनके हर दुख दर्द को दूर करने के लिए उनके साथ खडे रहेंगे। आज के इस दौर मे युवा मुख्यमंत्री ने आपदा की इस घडी मे पीडितों के साथ खडे होकर उन्हें विश्वास दिलाया है कि सरकार उनके साथ खडी है और उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पडेगा। गढवाल व कुमांऊ मे जब भी आवाम की समस्याओं को सुनने के लिए मुख्यमंत्री उन्हें अपने यहां बुलाते हैं तो आवाम भी धामी मे उम्मीदों की आस मे बंधकर उन्हें अपने मन की व्यस्था सुनाने के लिए आगे आ जाता है। मुख्यमंत्री ने आवाम को साफ संदेश दिया कि सुशासन और पारदर्शी कार्य संस्कृति के माध्यम से जन समस्याओं के समाधान के लिए उनकी सरकार सत्त क्रियाशील है। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर आवाम को यह विश्वास हो चला कि वही उनके रक्षक हैं।
उत्तराखण्ड का आवाम अब यह अहसास कर चुका है कि वह अपनी व्यथा जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखेंगे तो उनकी व्यथा सुनकर उसका हल निकालने के लिए वह तत्काल अफसरांे को आदेश दे देंगे। आवाम के लिए मुख्यमंत्री उम्मीदों की वो किरण बन चुके हैं जिसके प्रकाश मे रहने के लिए राज्य के लोग हमेशा अगली पक्ति मे खडे हुये दिखाई दे रहे हैं। युवा मुख्यमंत्री और राज्य की जनता के दिलो की धडकन बन चुके हैं और बच्चे से लेकर बडे-बूढे भी मुख्यमंत्री की एक झलक पाकर उनके करीब आने की चाह मे हमेशा आगे बढते दिखाई दे रहे हैं और आवाम की इस उम्मीद को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बडे पंख लगा दिये हैं और आवाम के लिए मुख्यमंत्री इतनी सादगी दिखा रहे हैं कि अगर कोई भी उनके पास जाकर उनके साथ सैल्फी लेने का मन बनाता है तो उसकी उम्मीद को मुख्यमंत्री पंख लगा देते हैं।

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