सुर्खियों में रहने की कला जानते हैं हरदा

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गजबः अर्जित अवकाश फिर भी सोशल मीडिया पर दिखा रहे धमक
कांग्रेसी दिग्गजों ने हरदा को कर रखा नजरअंदाज!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड कांग्रेस में कद्दावर नेता के रूप में अपनी एक बडी पहचान बना चुके पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दो बार विधानसभा चुनाव हुआ और दोनो बार आवाम ने कांग्रेस की लीडरशिप को एक सिरे से नकारते हुए भाजपा पर भरोसा दिखाकर उन्हें सत्ता की कमान सौंपी थी। हरदा अकसर सोशल मीडिया पर अपनों को भी निशाने पर लेने के लिए इशारों-इशारों में शब्दबाण चलाने के लिए आगे रहते हैं जिसके चलते कांग्रेस के अन्दर हरदा को लेकर हमेशा एक बेचैनी रहती है कि वह आखिरकार किसके पाले में अपने आप को रखकर सियासी पारी खेलते हैं? हरदा एक जमाने से मीडिया में छाने की कला जानते हैं और यही कारण है कि वह अकसर अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर कोई न कोई ऐसा तीर चला देते हैं जिससे उनके अपने भी कहीं न कहीं घायल हो जाते हैं? गजब की बात यह है कि पार्टी से रूठे हरदा पन्द्रह दिन के अर्जित अवकाश पर हैं लेकिन उसके बावजूद भी वह सोशल मीडिया पर अपनी धमक दिखा रहे हैं और यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से वह मीडिया के केन्द्र बिन्दु में बने हुये हैं।
उत्तराखण्ड की राजनीति में अपनी बडी धमक रखने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को राजनीति का चाणक्य माना जाता है। राजनीति से अचानक पन्द्रह दिन के अर्जित अवकाश पर गए हरीश रावत इन दिनों चर्चाओं में है और सोशल मीडिया पर सक्रिय, कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं, बयान भी दे रहे लेकिन फिर भी दावा है कि अवकाश पर हैं? हरदा के अवकाश को लेकर आवाम और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का खूब शोर मचा हुआ है लेकिन कांग्रेस के जरूर एक हलचल मची हुई है कि आखिर हरदा का यह अर्जित अवकाश के मायने क्या हैं? बता दें कि कुछ दिन पूर्व एक लम्बे अर्से बाद कांग्रेस का कुनबा बढा है और भाजपा से कांग्रेस में आये इन नेताओं की एंट्री से उत्तराखण्ड कांग्रेस के दिग्गज नेता भी एक नई ऊर्जा के साथ सरकार को दहाडने में आगे आ रहे हैं। कांग्रेस के अन्दर अभी एक खुशी का दौर चल ही रहा था कि हरदा पार्टी से रूठे हुये नजर आये और उन्होंने पन्द्रह दिन का अर्जित अवकाश लेने का जो सोशल मीडिया पर संवाद पोस्ट किया था उससे पार्टी के अन्दर एक भूचाल सा मच गया क्योंकि हरीश धामी से लेकर कुछ और नेताओं ने हरदा के साथ खडे होने की हुंकार लगाकर कांग्रेस हाईकमान को भी कहीं न कहीं सकते में डाल रखा है।
हरीश रावत के उपवास की तमाम समीक्षाएं राजनीतिक पंडित कर रहे हैं और वह इसके पीछे का अंकगणित समझने के लिए हरीश रावत की एक दशक से चली आ रही राजनीति का डोजर बनाने में जुटे हुये हैं। उल्लेखनीय है कि हरीश रावत 2017 के बाद तीन विधानसभा हार, एक लोकसभा की हार भी देख चुके हैं, उम्र के आठवें दशक से कुछ साल पीछे चल रहे हैं लेकिन प्रासंगिक बने रहने के लिए वह सब कुछ करते दिखे जिसे देखकर आमतौर पर यह धारणा बनाई जाती है कि फंला नेता लगातार सक्रिय है। लेकिन, बीते दिनों से कांग्रेस से रूठे हुये हैैं तो उनसे ज्यादा उग्र उनके समर्थन हो रहे हैं। कोई सामूहिक इस्तीफे की बात कह रहा है तो कोई राज्य में कांग्रेस का अस्तित्व ही हरीश रावत से बता रहा है।
उल्लेखनीय है कि केदारनाथ आपदा के बाद हरीश रावत को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी लेकिन इस कुर्सी के साथ ही अगले साल उन्होंने अपनी सरकार तकरीबन गिरते देख ली थी जो किसी तरह बच गई, पार्टी के नेताओं का भाजपा में शामिल होना भी देखा। हालांकि, अपवाद विजय बहुगुणा भी हैं, जिन्हें सक्रिय राजनीति से दूर हुए भी दशक भर से ज्यादा हो गया और उन्हें राजनीति से जबरन रिटायर करवाने वाले भी हरीश रावत ही थे। एक असफल बगावत के नायक के तौर पर विजय बहुगुणा को कुल सत्तर साल का होने से पहले ही अपनी सक्रिय राजनीति की कुर्बानी देनी पड़ी और अब यदा कदा चुनावी रैलियों में दिखते हैं लेकिन उनकी विरासत को उनका बेटा सौरभ बहुगुणा आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, हरीश रावत की बेटी भी वर्तमान में विधायक है, बेटा लोकसभा चुनाव लड़ चुका है, एक अन्य बेटे के लिए भी वह तैयारियों में जुटे थे। बच्चों को राजनीति में सेट करने में जुटे हरीश रावत रिटायरमेंट के लिए भी तैयार नहीं है। उन्हें पता है कि अब उनके पास निजी तौर पर पाने या खोने के लिए सिर्फ ही मौका है।
उत्तराखण्ड कांग्रेस के काफी नेता अब हरीश रावत को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं क्योंकि अगर ऐसा होता तो कांग्रेस के दिग्गज नेता उन्हें मनाने के लिए जरूर उनके पास जाते लेकिन मौजूदा दौर में कांग्रेस के अन्दर गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत, प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, तिलक राज बेहड, भुवन कापडी समेत काफी नेता 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को विजय दिलाने के लिए सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के एजेंडे पर आगे बढे़ हुये हैं और कहीं न कहीं उन्होंने हरदा को नजर अंदाज कर दिया है।

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