युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से उठाई आवाज

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देहरादून(नगर संवाददाता)। प्रदेश युवा कांग्रेस की उपाध्यक्ष स्वाति नेगी ने कहा है कि अखिल भारतीय युवा कांग्रेस ने भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2०26 के दौरान भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने देशहित से जुड़े गंभीर मुद्दे भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाई गई। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अन्य कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से गिरफ्तार किया गया। यहां कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से मांग की है कि इस ट्रेड डील के सभी दस्तावेज और शर्तें सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि संसद और देश की जनता के सामने इस समझौते पर खुली और पारदर्शी चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि पूर्व में इस प्रदर्शन का उद्देश्य उस ट्रेड डील के खतरनाक पहलुओं को देश के सामने लाना था, जिन पर सरकार चर्चा से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, इस शांतिपूर्ण विरोध के दौरान हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब सहित युवा कांग्रेस के कई साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया मानों वे कोई अपराधी या देशद्रोही हों। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल इसलिए की गई ताकि ट्रेड डील से जुड़े गंभीर सवालों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस का कहना है कि जिस ट्रेड डील को सरकार देशहित बताने की कोशिश कर रही है, उसके कई पहलू बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि सूत्रों और सार्वजनिक चर्चाओं में यह बात सामने आई है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय विवादों और तथाकथित एपस्टीन फाइलें से जुड़े नामों को लेकर भी सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी आदि के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। नेगी ने कहा है कि भारतीय युवा कांग्रेस का कहना है कि इन सभी मामलों पर पारदर्शिता जरूरी है ताकि देश सच्चाई जान सके। महानगर अध्यक्ष मोनी मेहता ने कहा है कि यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि अमेरिका की ओर से दबाव बनाया गया और यह दबाव कारोबारी संबंधों के माध्यम से भी डाला गया।
उन्होंने कहा कि कई विश्लेषकों ने यह सवाल उठाया है कि क्या इस डील को गौतम अडानी जैसे सरकार के करीबी उद्योगपतियों के जरिए प्रभावित किया गया। साथ ही यह भी चर्चा है कि तत्कालीन अमेरिकी नेतृत्व, विशेषकर डोनॉल्ड ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस डील के तहत भारत के कृषि बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने की आशंका है, जिससे भारतीय किसानों की आजीविका पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। भारत के छोटे और मध्यम उद्योग बड़ी विदेशी कंपनियों के सामने कमजोर पड़ सकते हैं, जिससे लाखों रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगभग 18 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जा सकता है, जबकि भारत में अमेरिकी उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैक्स की संभावना जताई जा रही है। इससे भारतीय उद्योगों को भारी नुकसान हो सकता है। करीब 5०० बिलियन डॉलर तक के आयात को बढ़ाने का दबाव भारत पर डाला जा सकता है, जिससे घरेलू उद्योग और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इस अवसर पर वैभव सोनकर ने कहा कि यदि इस डील के कारण भारत को ईरान और खाड़ी देशों से सस्ता तेल खरीदने में बाधा आती है, तो देश में गैस और तेल संकट की स्थिति बन सकती है। सोनकर ने कहा है कि यह भी चिंता जताई जा रही है कि इस प्रकार के समझौते भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को कमजोर कर सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय निर्णयों में बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस डील के तहत 14० करोड़ भारतीयों के डेटा को विदेशी कंपनियों के हाथों में जाने का खतरा भी व्यक्त किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। भारतीय युवा कांग्रेस का कहना है कि इन सभी गंभीर सवालों से ध्यान भटकाने के लिए ही हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा कांग्रेस यह स्पष्ट करना चाहती है कि देशहित के मुद्दों पर हमारी लड़ाई जारी रहेगी। लोकतंत्र में आवाज उठाना हमारा अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में सूरज थापा आदि भी उपस्थित रहे।

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