मातृशक्ति ने नेताओं को दिखाया आईना

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विकास का दावा हवा-हवाईः ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बनाई सड़क
गजबः गैरसैंण में विकास का सत्र और ग्रामीणों को खुद बनाना पड़ा रास्ता
चमोली(नीरज कंडारी)। उत्तराखण्ड की सरकार चमोली के गैरसैंण में बजट सत्र के दौरान राज्य के विकास को लेकर एक बडी लकीर खींचने के लिए आगे बढ़ी और दावा किया गया कि इस बार का बजट सबसे बडा बजट है लेकिन सवाल यह है कि जिस जनपद के अन्दर सरकार विकास का खाका सदन के अन्दर खींच रही थी अगर उसी जनपद की मातृशक्ति एक लम्बे दशक से सड़क मार्ग न होने के कारण खुद चंदा इक्ट्ठा करके एक किलोमीटर सड़क बनाने के लिए आगे आई हो तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के अन्दर विकास के दावे का जो ढोल पीटा जा रहा है उसकी धरातल पर हकीकत क्या है जहां से राज्य के विकास को लेकर सरकार पांच दिन तक सदन के अन्दर बडे-बडे दावे करने से पीछे नहीं हटी। महिलाओं के मन में राजनेताओं को लेकर जो आक्रोश दिखाई दे रहा था उससे साफ नजर आ रहा था कि कुछ राजनेता सिर्फ वोट लेने के लिए अपने इलाकों में जनता के द्वार जाकर उनसे वादा करते हैं कि वह सत्ता में आने के बाद इलाके का विकास करेंगे लेकिन हकीकत में यह विकास उस समय कहां गायब हो जाता है जब कोई राजनेता मंत्री या विधायक बनता है? सरकार को चमोली जिले के एक गांव के लोगों ने आईना दिखाते हुए अपने पैसे से एक किलोमीटर सड़क बनाई है वह कई सवालों को जन्म दे गई कि उत्तराखण्ड कैसे गुलजार हो रहा है?
चमोली जिले विकासखंड पोखरी में डुंगर गांव में सड़क पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। वर्षों से सड़क सुविधा से वंचित इस गांव के लोगों ने आखिरकार खुद ही पहल करते हुए चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान कर करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण कर दिया। यह सड़क तोणजी मोटर मार्ग से गांव को जोड़ती है।
सड़क बनने के बाद पहली बार गांव में वाहन पहुंचा। वाहन के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की और इसे एक उत्सव की तरह मनाया। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने वाहन का स्वागत किया और एक-दूसरे को बधाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही थी, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला और न किसी नेताओं ने हमारी सुध ली तो गांव के लोगों ने खुद ही सड़क बनाने की जिम्मेदारी उठाई। सभी ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया और श्रमदान करते हुए सड़क निर्माण का कार्य पूरा किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से अब गांव तक वाहनों की पहुंच संभव हो गई है, जिससे मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के कामकाज में बड़ी सुविधा मिलेगी।

…………नारी शक्ति क्या नहीं कर सकती है
ग्रामीण महिलाओं ने कहा है कि आगे तो मुश्किल लग रहा है। चुनाव के टाइम नेता आते है चले जाते है। उनका कहना है कि चाहे कोई भी नेता हो राजेंद्र सिंह भंडारी हो, महेंद्र भटट हो या अभी भाजपा के आध्यक्ष बने है और उन्होंने भी इस सड़क की कोई सुध नहीं ली है। उन्होंने कहा कि आगे वोट मांगने के टाइम पर आएंगे तो किस हक यहां पर आएंगे।
एक अन्य ग्रामीण महिला देई परमार ने कहा है कि मेरी उम्र भी साठ साल हो गई है। उन्होंन कहा कि यहां पर कभी रोड़ नहीं देखी और कहा कि हम कब तक ऊपर नीचे करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लटठा टेककर कब तक आते जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि नेता लोग वोट के समय आते है और वोट मांगते है। कहते है कि हमें वोट दे दो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस समय नेता लोग भाईजी, बहनजी प्रणाम करते है लेकिन जब जीत जाते है तो तब पीठ दिखा देते है। उन्होंने कहा कि उसके बाद नेता यह भी नहीं सोचते है कि इन ग्रामीणांे के वोट में वह जीते है। उन्होंने कहा कि हमारे वोट से ही तो विधायक बने है। जब हम लोगों ने वोट दिया है।
उन्होंने कहा कि मंत्री संतरी हुए है वह मोदी के साथ पहंुचने वाले है और यहां की ग्रामीण जनता ने खुद ही सड़क बनाई है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति क्या नहीं कर सकती है। ग्रामीण महिला ने कहा है कि नारी शक्ति ने अपना रूप दिखाया, दुर्गा मां का रूप, नारी शक्ति दुर्गा मां भी है आ गई तो काली मां भी है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति सब कुछ कर सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क बनाने के लिए सभी गांव वालों के साथ ही बाहर के गांवों के लोगों ने सहयोग किया। उन्होंने कहा कि सभी ने पैसा दिया और आज सड़क बन गई तो बड़ी खुशी की बात है और सब बधाई दे रहे है और गांव वालों को लगातार सड़क बनाने के लिए बधाईयां मिल रही है।

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