गैरसैंण की सर्द हवाओं में सत्र में दिखती रही तपिश

0
4

सत्र में कांग्रेस का दिखा इकबाल
सरकार पर हमलावर रहे कांग्रेसी विधायक
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा भले ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त होने का दम भर रही हो लेकिन पिछले काफी अर्से से कांग्रेस ने एकजुट होकर सरकार को ललकारने का जो दौर शुरू कर रखा है उससे साफ नजर आ रहा है कि चुनावी रणभूमि में भाजपा को चारो खाने चित करने के लिए कांग्रेस के तमाम विधायकों ने कमर कस ली है। सदन के अन्दर जहां कांग्रेसी विधायकों ने सरकार को अपना इकबाल दिखाया तो वहीं सदन के बाहर कांग्रेस के काफी दिग्गजों ने गैरसैंण कूच करके जो शक्ति प्रदर्शन किया उससे कहीं न कहीं सरकार के माथे पर एक ंिचता की लकीर जरूर डल चुकी है? गैरसैंण की सर्द हवाओं में सदन के बाहर जहां राजनेताओं को ठंड का आभास हो रहा था वहीं सदन के अन्दर कांग्रेस व भाजपा के मंत्रियों व विधायकों के बीच बार-बार होती रही तकरार की तपिश खुलकर महसूस होती रही। गैरसैंण के बजट सत्र में पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक कांग्रेसी विधायक सरकार पर हमलावर मुद्रा में रहे और जिस तरह से उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर सरकार को ललकारने की हुंकार लगाई उससे राज्य के लाखों कांग्रेसियों के चेहरे गुलजार हो रखे हैं कि अब कांग्रेस एकजुट होकर 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपनी एकता का इकबाल दिखाकर उसे चुनावी रण में ढेर कर देगी?
उत्तराखण्ड का विधानसभा का बजट सत्र गैरसैंण में भले ही सम्पन्न हो गया लेकिन इस सत्र में कांग्रेस के तमाम विधायकों ने सदन के अन्दर जो आक्रामक रूख अपनाकर रखा उसने सरकार के मंत्रियों और विधायकों के माथे पर चिंता की एक बडी लकीर जरूर खींच दी है? कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, भुवन कापडी, हरीश धामी, शहजाद और काफी विधायकों ने सदन के अन्दर मंत्रियों से तीखे सवाल करके उन्हें बार-बार संकट में डाला और उसी का परिणाम रहा कि कई बार सदन के अन्दर का दृश्य काफी गर्माहट भरा दिखाई दिया। सदन के अन्दर अधिकांश कांग्रेसी विधायकों ने जिस अंदाज में सरकार को कई मुद्दों पर कटघरे में लाकर खडा किया वह दृश्य देखते ही बनता था। हरीश धामी ने तो जिस आक्रामकता के साथ सरकार को ललकारते हुए आमरण अनशन तक की धमकी दे दी थी उससे सरकार का जरूर बीपी बढा होगा? हरीश धामी ने अफसरों को लेकर जो अपनी नाराजगी दिखाई वह कहीं न कहीं यह बताने के लिए काफी थी कि क्या आज भी राज्य के अन्दर ब्यूरोक्रेसी के कुछ अफसर बेलगाम हैं?
उत्तराखण्ड में नौ साल से भाजपा की सरकार सत्ता में है और अकसर कांग्रेस पर मित्र विपक्ष का खुलकर आरोप लगता रहा और उसके कुछ नेताओं की कार्यशैली को लेकर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के मन में एक बडी टीस दिखाई देती रही कि अगर कांग्रेसी नेता मित्र विपक्ष की भूमिका में रहेंगे तो 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे एक बार फिर हार का सामना करना पडेगा? उत्तराखण्ड कांग्रेस के काफी नेताओं ने मित्र विपक्ष का जो चोला ओढ़ रखा था उसकी गूंज ससंद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कानो में गूंजी थी और उसके बाद उन्होंने राज्य कांग्रेस में एक बडा बदलाव कर गणेश गोदियाल को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी तो वहीं प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत को भी राहुल गांधी ने एक बडी जिम्मेदारी से नवाजकर उन्हें दो टूक संदेश दिया कि वह उत्तराखण्ड में कांग्र्रेस के अन्दर एक नई जान फूंके और 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही वह आवाम को संदेश दे कि राज्य सरकार नौ साल से उनकी उम्मीदों पर कभी खरी नहीं उतरी है?
उत्तराखण्ड के अन्दर हरीश रावत, गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, तिलकराज बेहड़, भुवन कापडी, हरीश धामी और कांग्रेस के कुछ नेताओं और विधायकों ने भ्रष्टाचार व घोटालों के मुद्दे पर सरकार को हर मोर्चे पर ललकारने का जो दौर शुरू कर रखा है उसने सरकार की चूलें हिलाकर रखी हुई हैं? कांग्रेस ने कुछ समय पूर्व राजभवन घेराव के दौरान जो शक्ति प्रदर्शन किया और उस प्रदर्शन में कांग्रेस का जनसैलाब सड़कों पर उमड़ा उसने जहां कांग्रेसियों में एक नया जोश भर दिया है वहीं कांग्रेस के इन तेवरों को देखकर सरकार भी कहीं न कहीं असहज जरूर हो रखी है?

LEAVE A REPLY