सीएम के खिलाफ बगावत करता आईपीएस!

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लम्बे अर्से से धामी के खिलाफ रच रहा ‘साजिश’
धाकड़ की कुर्सी छिनने का देख रहा सपना
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री ने उन दलालों पर बडा प्रहार कर रखा है जो कुछ आईपीएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग दिलाने के लिए लम्बे समय से कोई न कोई चाल चलते रहे लेकिन मुख्यमंत्री ने दलालों को दो टूक अल्टीमेटम दे रखा है कि अगर उन्होंने किसी भी अफसर को पोस्टिंग दिलाने की दलाली का ठेका लिया तो उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देंगे। एक बददिमाग आईपीएस अपने आपको उत्तराखण्ड के अन्दर खाकी का साम्राट समझने का भ्रम पाले हुये है और वह वर्दी की आन-बान-शान की धज्जियां उडा रहा है क्योंकि उसे अहंकार का वो भूत सवार है जैसे कोई तालिबानी अपने देश में आम जनमानस को अपनी हिटलरशाही दिखाता है? हैरानी वाली बात है कि आम इंसान के दिल अजीज बन चुके मुख्यमंत्री के खिलाफ यह आईपीएस बगावत का झंडा बडे गोपनीय अंदाज से उठाये हुये है? खटीमा से धामी के हारने के बाद इस आईपीएस ने अपने आवास में कुछ पुलिस अफसरों और अपने चेहते खाकीधारियों के साथ पार्टी की थी कि अब भाजपा हाईकमान हारे हुये मुख्यमंत्री को दुबारा मुख्यमंत्री नहीं बनायेगा लेकिन इस आईपीएस के सपने उस समय चूरचूर हो गये थे जब हाईकमान ने धामी को सत्ता की कमान फिर सौंप दी थी। धाकड़ सीएम की कुर्सी छिनने की चाहत पालने वाले इस आईपीएस ने अभी तक अपनी साजिशों का प्रपंच रचना नहीं छोडा है? सवाल है कि क्या सरकार के मुखिया अपने खिलाफ बगावत करने वाले इस आईपीएस की बेनामी सम्पत्तियों और उसके द्वारा चर्चा में आये कुछ कृत्यों की जांच कराने से क्यों परहेज कर रहे हैं यह हैरान कर रहा है?
उत्तराखण्ड का इतिहास रहा है कि जब भी कोई मुख्यमंत्री सत्ता मे आया तो शासन, प्रशासन और पुलिस के किसी भी अफसर ने मुख्यमंत्री के खिलाफ पर्दे के पीछे और पर्दे के सामने बगावत करने का साहस नहीं दिखाया। उत्तराखण्ड के अन्दर अगर किसी भी अफसर ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की कोशिश की थी तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पडा था? हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड के अन्दर पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चला रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ अगर एक आईपीएस अफसर बार-बार पर्दे के पीछे रहकर साजिश रचने का तांडव कर रहा है तो उससे समझा जा सकता है कि उसकी इस साजिश में कुछ अफसर और मुख्यमंत्री से दूरी रखने वाले कुछ नेता भी जरूर होंगे क्योंकि एक अकेला अफसर इतना निडर नहीं हो सकता कि वह राज्य के मुखिया के खिलाफ ही बार-बार बडे नाटकीय ढंग से साजिश करने का प्रपंच रचता रहे?
सबसे चौकाने वाली बात यह है कि जो आईपीएस अफसर मुख्यमंत्री के खिलाफ एक लम्बे दशक से साजिश रचने का खेल खेल रहा है वह सरकार को क्या आज तक नजर नहीं आ रहा जिसके चलते वह हमेशा ऐसी साजिशें करने के मिशन में आगे बढ़ निकलता है? चर्चाएं यहां तक हैं कि दिल्ली का एक बडा दलाल इस आईपीएस अफसर को महत्वपूर्ण पोस्टिंग दिलाने के लिए एक लम्बे समय से मुख्यमंत्री के आसपास रहने वालों के बल पर बडे-बडे दावे करता रहा कि वह चुटकी में अपने चहेते आईपीएस को महत्वपूर्ण पद दिला देगा लेकिन भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उस दलाल को दो टूक संदेश दिलवाया था कि अगर उसने आईपीएस की पोस्ंिटग की पैरवी करने का दुसाहस किया तो उसे वह सलाखों के पीछे पहुंचा देंगे। मुख्यमंत्री का फंडा है कि धरातल पर जो अफसर आम जनमानस की उम्मीदों पर खरा उतरेगा उसे ही वह महत्वपूर्ण पद की पोस्टिंग पर आसीन करेंगे और जो चंद अफसर किसी दलाल के बल पर पोस्टिंग पाने की कोशिश करेगे वह हमेशा उनकी रडार पर रहेंगे? लम्बे समय से यह बात भी उमडती आ रही है कि सरकार के मुखिया के खिलाफ साजिश के बाद फिर साजिश रच रहे आईपीएस की सम्पत्तियों को खंगालने के लिए वह आज तक क्यों खामोश हैं? चर्चाओं का बाजार हमेशा गर्म रहता है कि इस आईपीएस के पास दौलत का जो साम्राज्य है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती? सवाल यह भी है कि आखिर इस आईपीएस अफसर को वो कौन लोग अपने आंगन में पाले हुये हैं जो मुख्यमंत्री की कुर्सी छिनने का पर्दे के पीछे रहकर कोई न कोई बडी साजिश का प्लान रचते आ रहे हैं?

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