पच्चीस साल बाद भी भ्रष्टाचारी ‘बेलगाम’
बेनामी सम्पत्तियों का रहस्यमय खेल कब होगा बेनकाब?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड बनने के बाद यह उम्मीद थी कि राज्य के अन्दर भ्रष्टाचार और घोटालों का काला खेल कभी दिखाई नहीं देगा। आम जनमानस की यह सोच हमेशा हर सरकार में हवा-हवाई होती चली गई क्योंकि काफी राजनेताओं और अफसरों पर भ्रष्टाचार के बडे-बडे दाग लगते रहे लेकिन वह अपनी पॉवर के बल पर हमेशा बचते चले गये और यही कारण है कि आम जनमानस को वो राज्य आज तक नहीं मिल पाया जिसकी उन्होंने कल्पना की थी? मुख्यमंत्री ने 2025 तक उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिया था और आम जनमानस को यह उम्मीद जगी थी कि अब उनका राज्य भ्रष्टाचारमुक्त हो जायेगा लेकिन आवाम का यह सोचना एक भ्रम ही बन गया क्योंकि राज्य में भ्रष्टाचार और घोटालों का काला अध्याय कभी बंद होता हुआ नजर नहीं आया? गजब की बात है कि उत्तराखण्ड की जनता राज्य की रजत जयंती मना रही है लेकिन इस रजत जयंती मे भी भ्रष्टाचारी बेलगाम हैं क्योंकि जिन भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के पास बेनामी सम्पत्तियों का अकूत साम्राज्य है उसे खोज निकालने मे सरकार आज तक कामयाब होती हुई नजर नहीं आई जिसको लेकर आम जनमानस भी यह बोल रहा है कि हुजूर अब तो भ्रष्टाचार का फन कुचल दो जिससे उन्हें भ्रष्टाचारियों से आजादी मिल सके?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दौरान ऐलान किया था कि 2025 तक उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों से आजादी दिला दी जायेगी। मुख्यमंत्री के इस संकल्प पर आम जनमानस को विश्वास था कि अब उनका उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारियों और घोटालोंबाजों से आजाद हो जायेगा। उत्तराखण्ड के अन्दर मुख्यमंत्री के सख्त रूख के बावजूद भी कुछ राजनेता और अफसर भ्रष्टाचार करने के गुप्त एजेंडे पर बडा खेल रहे हैं यह हैरान करने जैसा ही नजर आ रहा है। उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य में कंगाल दिखने वाले काफी नेताओं के पास अचानक कुछ वर्षों में ऐसा कौन सा खजाना हाथ आ गया जिसके चलते वह इतनी बडी दौलत के मालिक बन गये जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता? कुछ राजनेताओं और अफसरों के पास आज के इस दौर में इतनी दौलत है कि अगर देश की किसी बडी एजेंसी की इन पर नजर पहुंच गई तो यह तय है कि उनकी काली कमाई का सारा खेल बेनकाब हो जायेगा? उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचारियों पर नकेल लगाने के लिए विजिलेंस का गठन तो हो रखा है लेकिन उनके पास जो अधिकार हैं वह यह बताते हैं कि यह एजेंसी भ्रष्टाचार करने वाले बडे मगरमच्छों को तब तक अपनी गिरफ्त में नहीं ले सकती जब तक शासन विजिलेंस को कार्यवाही करने के लिए अपनी हरी झंडी नहीं देगा? उत्तराखण्ड के अन्दर भ्रष्टाचार के दानव का वध करना सरकार के लिए बडी चुनौती ही नजर आ रहा है क्योंकि काफी भ्रष्टाचारी कुछ पॉवरफुल राजनेताओं और भ्रष्ट अफसरों की पनाह लिये हुये हैं और उनके सारे काले धंधों को आखिर कौन बेनकाब करेगा जब कुछ पॉवरफुल नेताओं और भ्रष्ट अफसरों का उन्हें साथ मिला हुआ है? पच्चीस साल बाद भी अगर राज्य के अन्दर भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों के मन में सरकार और सिस्टम का कोई डर देखने को नहीं मिल रहा है तो ऐसे में उत्तराखण्ड आखिर कब भ्रष्टाचारमुक्त होने का जश्न मनायेगा यह तो आज भी एक बडी पहेली बना हुआ है? आम जनमानस के मन में यह विचार आ रहे हैं कि अब तो हुजूर भ्रष्टाचारियों के फन को कुचल दो क्योंकि अब भ्रष्टाचार की इंत्हा हो चुकी है?
